Last Updated:January 03, 2026, 06:33 IST
India Air Defence System: भारत अपने एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने में जुटा है. यही वजह है कि 15 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक लाल किला के प्राचीर से मिशन सुदर्शन चक्र का उल्लेख किया था. इस मिशन का उद्देश्य अखंड भारतवर्ष को किसी भी तरह के हवाई हमले से सुरक्षित रखना और दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देना है. भारत ने रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के पांच स्क्वाड्रन को खरीदने का करार किया है. अब भारतीय वायुसेना अल्ट्रा मॉडर्न S-500 डिफेंस सिस्टम को हासिल करना चाहती है, ताकि चीन और पाकिस्तान के किसी भी हमले को विफल कर माकूल जवाब दिया जा सके.
India Air Defence System: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 ने अपनी क्षमताओं का परिचय देते हुए पाकिस्तानी F-16 को 300 किलोमीटर से भी ज्याद दूर से मार गिराया था. अब इंडियन एयरफोर्स S-500 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदना चाहता है. (फाइल फोटो/Reuters)India Air Defence System: 21वीं सदी में युद्ध का स्वरूप पूरी तरह से बदल गया है. एयरफोर्स की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो चुकी है. ड्रोन भी मॉडर्न वॉरफेयर में अहम साबित हो रहा है. बदले हालात में किसी भी देश के लिए एरियल थ्रेट या हवाई हमले से खुद को बचा पाना एक कठिन चुनौती है. इससे निपटने के लिए तमाम देश अपने स्तर पर कोशिश कर रहे हैं. भारत भी इसमें पीछे नहीं है. स्वदेशी तकनीक की मदद से एयर डिफेंस सिस्टम डेवलप किए जा रहे हैं. वहीं, विदेश से भी एयर डिफेंस सिस्टम खरीदे जा रहे हैं. भारत ने मित्र देश रूस से S-400 की पांच स्क्वाड्रन खरीदने का करार किया है. इनमें से तीन की आपूर्ति की जा चुकी है. बाकी दो को भी जल्द ही मुहैया करा दिया जाएगा. S-400 एयर डिफेंस सिस्टम 400 किलोमीटर तक के हवाई हमले को विफल करने में सक्षम है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 ने 300 किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी तक मार करते हुए पाकिस्तानी लड़ाकू विमान को मार गिराया था. अब भारत ऐसा डिफेंस सिस्टम हासिल करना चाहता है जो पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट को इंटरेप्ट कर उसे तबाह कर सके. बता दें कि चीन ने 5th जेनरेशन का फाइटर जेट डेवलप कर लिया है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो चीन अपने यार पाकिस्तान को पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान बेचने जा रहा है. यदि ऐसा होता है तो भारत को दो मोर्चों पर स्टील्थ फाइटर जेट की चुनौतियों से निपटना होगा. यही वजह है कि इंडियन एयरफोर्स अब S-400 से भी ज्यादा पावरफुल और स्टील्थ फाइटर जेट के साथ ही स्पेस अटैक को नाकाम बनाने में सक्षम रूसी S-500 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदना चाहता है. बताया जा रहा है कि S-500 एयर डिफेंस सिस्टम इसी साल रूस के बेड़े में शामिल होने वाला है.
भारत अपनी हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. भारतीय वायुसेना (IAF) रूस के अत्याधुनिक S-500 ‘प्रोमेथियस’ एयर डिफेंस सिस्टम में गहरी रुचि दिखा रही है. इसका मुख्य उद्देश्य चीन के स्टील्थ फाइटर जेट्स J-20 और संभावित रूप से पाकिस्तान के लिए प्रस्तावित J-35 जैसे खतरों से निपटना है. सूत्रों के मुताबिक, भारत दो S-500 स्क्वाड्रन खरीदने पर विचार कर रहा है, जिससे पहले से तैनात पांच S-400 ‘ट्रायम्फ’ बैटरियों को और ताकत मिलेगी. महत्वपूर्ण बात यह है कि S-500 को S-400 के विकल्प के रूप में नहीं देखा जा रहा है. ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान S-400 की भूमिका को काफी प्रभावी माना गया था, जिसमें दुश्मन के कई हवाई प्लेटफॉर्म को मार गिराने का दावा किया गया. S-500 का मकसद मौजूदा मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम को और मजबूत करना है, खासकर स्टील्थ तकनीक से लैस विमानों और बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ. स्टील्थ फाइटर जेट को आम रडार या एयर डिफेंस सिस्टम इंटरसेप्ट नहीं कर पाते हैं, जिससे इसकी मारक क्षमता काफी बढ़ जाती है. इसे डेडली भी माना जाता है.
| S-400 एयर डिफेंस सिस्टम | S-500 एयर डिफेंस सिस्टम |
| दुश्मन के लड़ाकू विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल को रोकने के लिए. | यह हाइपरसोनिक मिसाइल, लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल और यहां तक कि निचली कक्षा के सैटेलाइट को भी मार गिराने में सक्षम है. |
| करीब 400 किलोमीटर तक लक्ष्य को नष्ट कर सकता है. | इसकी रेंज 500-600 किलोमीटर तक बताई जाती है. |
| लगभग 30-35 किलोमीटर की ऊंचाई तक के टारगेट को तबाह करने में सक्षम. | करीब 180-200 किलोमीटर की ऊंचाई तक मार करने में सक्षम. |
| फाइटर जेट, ड्रोन और क्रूज मिसाइल को कामर गिराने में सक्षम. | स्टील्थ फाइटर जेट (J-20, F-35), हाइपरसोनिक मिसाइल और इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के साथ ही दुश्मन के सैटेलाइट को तबाह करने में सक्षम. |
| एडवांस रडार से कई लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक और नष्ट कर सकता है. | स्टील्थ फाइटर जेट (J-20, F-35), हाइपरसोनिक मिसाइल और इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के साथ ही दुश्मन के सैटेलाइट को तबाह करने में सक्षम. |
| रूस और भारत सहित कुछ देशों में तैनात और पूरी तरह ऑपरेशनल. | S-500 को इस साल रूसी बेड़े में शामिल करने की योजना है. |
क्या है S-500 की ताकत?
रूस में इस साल सेवा में शामिल हो रहा S-500 वहां की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) सिस्टम्स में सबसे उन्नत माना जा रहा है. जहां S-400 की मारक क्षमता 400 किलोमीटर तक है और यह लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइल व ड्रोन जैसे लक्ष्यों को निशाना बना सकता है, वहीं S-500 को खास तौर पर ऊंचाई पर उड़ने वाले और अत्यंत तेज गति वाले खतरों (Hypersonic Threat) के लिए डिजाइन किया गया है. यह सिस्टम बैलिस्टिक मिसाइलों और हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल्स को भी रोकने में सक्षम है, जो मैक-5 से ज्यादा की रफ्तार से उड़ते हैं. S-500 में 77N6-N और 77N6-NH जैसी इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं, जिनकी रेंज करीब 600 किलोमीटर बताई जाती है और ये 200 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर लक्ष्य को भेद सकती हैं. इसका मतलब है कि यह सिस्टम दुश्मन की मिसाइलों को वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करने से पहले ही नष्ट कर सकता है. इसके अलावा S-500 और S-400 कुछ मिसाइलें साझा करते हैं, जैसे 48N6DM और 40N6M, जो लड़ाकू विमानों और क्रूज मिसाइलों के खिलाफ कारगर हैं. इससे दोनों प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल बनता है.
India Air Defence System: S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की ताक से पूरी दुनिया वाकिफ है. (फाइल फोटो/Reuters)
रडार सिस्टम कितना कारगर?
S-500 की सबसे बड़ी खासियत इसकी अत्याधुनिक रडार प्रणाली मानी जा रही है. इसमें वीएचएफ, एल-बैंड और एक्स-बैंड जैसे अलग-अलग फ्रीक्वेंसी वाले रडार शामिल हैं. आमतौर पर स्टील्थ जेट्स इस तरह से डिजाइन किए जाते हैं कि वे हाई-फ्रीक्वेंसी रडार से बच सकें, लेकिन वीएचएफ जैसे लो-फ्रीक्वेंसी रडार उनकी मौजूदगी का शुरुआती संकेत देने में सक्षम होते हैं. यही वजह है कि S-500 को ‘स्टील्थ बस्टर’ के रूप में देखा जा रहा है. यह सिस्टम रूस के नेबो-एम जैसे वीएचएफ रडार और वोरनेझ ओवर-द-होराइजन रडार के साथ मिलकर काम कर सकता है, जिससे करीब 800 किलोमीटर तक हवाई गतिविधियों की निगरानी संभव हो जाती है. भारतीय वायुसेना के लिए यह इसलिए अहम है क्योंकि चीन के J-20 लड़ाकू विमान एलएसी के पास सक्रिय हैं और पाकिस्तान भी भविष्य में चीन से J-35 जैसे स्टील्थ जेट हासिल कर सकता है. हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि किसी स्टील्थ विमान को पहचानना और उसे मार गिराना दो अलग-अलग बातें हैं. वीएचएफ रडार सिर्फ मोटा-मोटा संकेत देते हैं, जबकि सटीक निशाने के लिए एल-बैंड और एक्स-बैंड रडार की जरूरत होती है. अगर इन प्रणालियों के बीच तालमेल में जरा भी कमी हुई, तो पूरी प्रणाली की प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है.
S-400 दिखा चुका है जलवा
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय वायुसेना ने अपनी हवाई रक्षा रणनीति में सुधार पर जोर दिया है. S-400 ने जहां दुश्मन के विमान और AWACS जैसे बड़े लक्ष्यों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया, वहीं कम रडार क्रॉस सेक्शन वाले ड्रोन और स्टील्थ प्लेटफॉर्म के खिलाफ और मजबूत सुरक्षा की जरूरत महसूस की गई. ऐसे में दो S-500 स्क्वाड्रन की तैनाती, जिनकी अनुमानित लागत करीब 20 हजार करोड़ रुपये हो सकती है, भारत की हवाई सुरक्षा को एक नई ऊंचाई पर ले जा सकती है. इस सौदे के साथ अमेरिका के CAATSA कानून के तहत प्रतिबंधों का जोखिम भी जुड़ा है. इसके बावजूद हालिया क्षेत्रीय तनावों के बाद भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को लेकर बातचीत फिर से तेज हुई है. ब्रह्मोस-2 जैसी हाइपरसोनिक परियोजनाओं के साथ-साथ S-500 पर चर्चा भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें
Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
January 03, 2026, 06:33 IST

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