Last Updated:January 29, 2026, 07:24 IST
कश्मीर में भारी बर्फबारी में सेना के करीब 20 जवान दुर्गम इलाके में फंस गए थे. फिर ग्रामीणों बर्फ काटकर उनको सुरक्षित निकाला. फोटो- सांकेतिकजम्मू-कश्मीर के डोडा जिले की ऊंची पहाड़ियों में गणतंत्र दिवस की शाम को एक कमाल की घटना हुई. यहां के साधारण गांव वालों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सेना के 20 से ज्यादा जवानों को भारी बर्फ से बचाया. ये जवान आतंकवादियों की तलाश में ऊंचाई पर गए थे, लेकिन 23 जनवरी को तेज बर्फबारी से फंस गए. ये घटना डोडा जिले के गुंडना इलाके में मोर्चा टॉप पर हुई, जो करीब 11,000 फीट की ऊंचाई पर है. ये जगह किश्तवाड़ जिले की छत्रू एरिया से सटी हुई है.
सेना के जवान ऑपरेशन ट्राशी-1 के तहत पिछले 15 दिनों से घने जंगलों में आतंकवादियों की तलाश कर रहे थे. ये ऑपरेशन 18 जनवरी को छत्रू के सिंहपोरा इलाके में हुए एनकाउंटर के बाद और तेज हो गया था. उस एनकाउंटर में स्पेशल फोर्सेस के हवलदार गजेंद्र सिंह शहीद हो गए थे और सात जवान घायल हुए थे. मोर्चा टॉप पर तैनाती इसलिए की गई थी ताकि आतंकवादी डोडा जिले में न घुस सकें.23 जनवरी को भारी बर्फबारी हुई, जिससे इलाके में 5-6 फीट तक बर्फ जमा हो गई. जवान ऊंचाई पर फंस गए. उन्होंने बेस कैंप को मैसेज भेजा. 24 जनवरी की शाम को गुंडना पोस्ट के आर्मी अफसरों ने आसपास के गांववालों से मदद मांगी.
आर्मी की अपील पर रेस्क्यू के लिए निकले गांव वाले
इंडिनय एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 25 जनवरी की सुबह करीब 8:30 बजे गांव वाले रेस्क्यू के लिए निकले. आर्मी ने उन्हें जूते, दस्ताने और खाने के पैकेट दिए. गांव वालों ने अपने फावड़े (बेलचे) लिए और बर्फ काटते हुए आगे बढ़े. लगभग 15 किलोमीटर का रास्ता था, जो पहाड़ी इलाके में था. करीब पांच घंटे पैदल चलकर दोपहर 1:30 बजे वे जवानों तक पहुंचे. फिर शाम तक सबको सुरक्षित नीचे लाए.
एक गांव वाले ने बताया कि हमने बहुत मुश्किल से रास्ता बनाया. बर्फ इतनी थी कि हर कदम पर मेहनत लग रही थी. लेकिन जब हम जवानों तक पहुंचे, तो सबकी जान बच गई. ये हमारा फर्ज था.
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल सुनील बरतवाल ने कहा कि स्थानीय लोगों ने सेना के साथ मिलकर बर्फ में रास्ता बनाया. ये बहादुरी की मिसाल है. उसी दिन डोडा जिले में ही भदरवाह-चंबा रोड पर छतरगाला टॉप (11,500 फीट ऊंचाई) पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन ने एक और रेस्क्यू किया. यहां 40 आर्मी जवान और करीब 20 आम नागरिक फंसे थे. बीआरओ ने 40 घंटे से ज्यादा मेहनत करके 38 किलोमीटर रोड साफ किया और 26 जनवरी की सुबह तक सबको बचा लिया.
डोडा और किश्तवाड़ जिलों में भारी बर्फबारी से आम जिंदगी ठप हो गई है. वारवान वैली में एक एवलांच भी आया, जिससे चरागाह वाले इलाके प्रभावित हुए. यहां के लोग पशुपालन पर निर्भर हैं, इसलिए ये उनके लिए बड़ी मुश्किल है. गणतंत्र दिवस पर ऐसी बहादुरी की कहानी दिल को छू जाती है. सेना और गांववालों की टीमवर्क से कई जिंदगियां बच गईं.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें
First Published :
January 29, 2026, 07:24 IST

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