सूख रही पद्मा, क्या भारत देगा 40 हजार क्यूसेक पानी? ममता का वीटो बढ़ाएगा टेंशन

1 day ago

Last Updated:January 05, 2026, 17:49 IST

India-Bangadesh Ganges Water Sharing Treaty: भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल संधि (GWT) एक निर्णायक मोड़ पर है. दिसंबर 2026 में इस ऐतिहासिक समझौते की मियाद पूरी होने वाली है. 1996 में हुई यह संधि दोनों देशों के लिए लाइफलाइन की तरह है. लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद ढाका में अंतरिम सरकार का शासन है. भारत और बांग्लादेश के कूटनीतिक रिश्तों में इस वक्त काफी तनाव देखा जा रहा है. अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और हसीना को भारत में शरण मिलने जैसे मुद्दों ने दूरियां बढ़ा दी हैं. ऐसे में इस संधि का रिन्यू होना सिर्फ पानी का मामला नहीं रह गया है. यह दिल्ली और ढाका के बीच विश्वास की एक बड़ी कूटनीतिक परीक्षा बन चुका है.

गंगा जल संधि साल 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई थी. उस समय भारत में एचडी देवेगौड़ा और बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार थी. इस समझौते के पीछे पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु का भी बड़ा हाथ था. इस संधि का मुख्य उद्देश्य फरक्का बैराज पर गंगा के पानी का बंटवारा करना है. साल के शुष्क महीनों यानी जनवरी से मई के बीच पानी साझा किया जाता है. यह 10-10 दिनों के साइकिल और 40 साल के औसत डेटा पर आधारित है. अगर पानी का बहाव 75,000 क्यूसेक या उससे ज्यादा है, तो भारत 40,000 क्यूसेक पानी लेता है. बांग्लादेश को बाकी बचा हुआ पानी दिया जाता है. लेकिन अगर बहाव 70,000 क्यूसेक से कम हो, तो दोनों देश आधा-आधा पानी बांटते हैं.

ताजा रिपोर्ट्स और रिसर्च के मुताबिक गंगा नदी का बेसिन अब वाटर स्ट्रेस की स्थिति में है. भारत की तरफ उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पानी की कमी देखी जा रही है. इन इलाकों में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता काफी कम हो गई है. वहीं बांग्लादेश में पद्मा नदी (गंगा का वहां का नाम) का जलस्तर लगातार गिर रहा है. वहां नदियों के बीच में रेत के टीले यानी सैंडबैंक्स बन रहे हैं. इससे जहाजों की आवाजाही और सिंचाई पर बुरा असर पड़ रहा है. बांग्लादेश की कम से कम 25 सहायक नदियां पानी की कमी से सूख चुकी हैं. अब बांग्लादेश मांग कर रहा है कि उसे फरवरी से मई के बीच कम से कम 40,000 क्यूसेक पानी की गारंटी मिले.

संधि के भविष्य पर राजनीति का साया बहुत गहरा है. बांग्लादेश में फरवरी 2026 में आम चुनाव होने वाले हैं. वहां की अंतरिम सरकार भारत के प्रति उतनी नरम नहीं है जितनी शेख हसीना थीं. साथ ही, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का रुख भी बेहद अहम है. ममता पहले भी तीस्ता जल समझौते को अपनी सहमति न देकर रोक चुकी हैं.

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गंगा जल संधि के मामले में भी बंगाल सरकार और केंद्र के बीच मतभेद सामने आ चुके हैं. ममता बनर्जी का तर्क है कि बिना बंगाल को विश्वास में लिए कोई फैसला नहीं होना चाहिए. फरक्का बैराज से पानी छोड़ने का सीधा असर कोलकाता पोर्ट की नेविगेबिलिटी पर पड़ता है. ऐसे में ममता बनर्जी की रजामंदी के बिना केंद्र के लिए संधि को रिन्यू करना एक बड़ी चुनौती होगी.

दिसंबर 2026 के बाद संधि को जारी रखने के लिए दोनों देशों की रजामंदी जरूरी है. अच्छी बात यह है कि दोनों देश सैद्धांतिक रूप से बातचीत के लिए तैयार हैं. हाल ही में दोनों देशों के अधिकारियों ने गंगा और पद्मा नदियों में पानी का स्तर मापना शुरू कर दिया है. सेंट्रल वाटर कमीशन (भारत) और बांग्लादेश की अथॉरिटी इस काम में जुटी हैं. लेकिन जलवायु परिवर्तन और बढ़ती आबादी की वजह से पानी की मांग भी बढ़ गई है.

भारत अब चाहता है कि नई संधि में उसकी विकास की जरूरतों का भी ध्यान रखा जाए. भारत की तरफ से इस संधि की मियाद को 30 साल से घटाकर 10-15 साल करने का भी प्रस्ताव दिया जा सकता है. अब देखना यह होगा कि क्या दोनों पड़ोसी देश पुरानी कड़वाहट भुलाकर पानी पर एक नई इबारत लिख पाते हैं या नहीं.

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First Published :

January 05, 2026, 17:49 IST

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सूख रही है पद्मा, क्या भारत देगा 40 हजार क्यूसेक पानी? भारत-बांग्लादेश में ठनी

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