Last Updated:February 06, 2026, 09:03 IST
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस केवल पूछताछ के लिए किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकती. अदालत ने BNSS 2023 का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी तभी होनी चाहिए जब जांच के लिए आरोपी को हिरासत में लेना जरूरी हो. सात साल तक की सजा वाले मामलों में पहले नोटिस देना अनिवार्य बताया गया है.

नई दिल्ली: लोगों की गिरफ्तारी को लेकर अक्सर पुलिस पर सवाल उठते रहते हैं. लेकिन अब गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और सख्त संदेश दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि पुलिस सिर्फ पूछताछ करने के लिए किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकती. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी का अधिकार होने का मतलब यह नहीं है कि पुलिस हर मामले में उसे लागू करे. न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियों को गिरफ्तारी को अंतिम विकल्प के रूप में देखना चाहिए. यह फैसला आम नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि गिरफ्तारी तभी की जानी चाहिए जब जांच को आगे बढ़ाने के लिए आरोपी को हिरासत में लेना बिल्कुल जरूरी हो. अदालत ने पुलिस को यह भी याद दिलाया कि कानून में गिरफ्तारी से पहले नोटिस जारी करने का प्रावधान है और इसका पालन करना अनिवार्य है. अदालत ने चेतावनी देते हुए कहा कि गिरफ्तारी को पुलिस की सुविधा नहीं बल्कि जांच की जरूरत के आधार पर ही देखा जाना चाहिए. इस टिप्पणी के बाद गिरफ्तारी के नियमों को लेकर नई बहस छिड़ गई है.
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एम. एम. सुंद्रेश और जस्टिस एन. के. सिंह की पीठ ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 के प्रावधानों का हवाला देते हुए यह टिप्पणी की. अदालत ने कहा कि सात साल तक की सजा वाले अपराधों में पुलिस को पहले आरोपी को नोटिस देना चाहिए. अदालत ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी एक वैधानिक अधिकार जरूर है, लेकिन इसे अनिवार्य नहीं माना जा सकता. पुलिस अधिकारी को गिरफ्तारी से पहले खुद से सवाल करना होगा कि क्या बिना गिरफ्तारी के जांच संभव है या नहीं. वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत को बताया कि BNSS की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी करना अनिवार्य है और इसे केवल गिरफ्तारी के कारण दर्ज करके दरकिनार नहीं किया जा सकता. अदालत ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि जांच प्रक्रिया गिरफ्तारी के बिना भी आगे बढ़ सकती है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी तभी की जानी चाहिए जब जांच प्रभावित होने की आशंका हो या आरोपी के भागने या सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना हो.(फाइल फोटो)
गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त गाइडलाइन
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि BNSS 2023 के तहत गिरफ्तारी का अधिकार पुलिस को दिया गया है लेकिन इसका इस्तेमाल सोच-समझकर करना होगा. अदालत ने साफ किया कि गिरफ्तारी पुलिस की सुविधा नहीं बल्कि जांच की वास्तविक जरूरत के आधार पर होनी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि यदि गिरफ्तारी जरूरी नहीं है तो पुलिस को नोटिस जारी कर पूछताछ करनी चाहिए. अदालत ने इस आदेश के जरिए नागरिक स्वतंत्रता और पुलिस अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है.
सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी को लेकर क्या-क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस सिर्फ पूछताछ के लिए किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकती. अदालत ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी तभी होनी चाहिए जब जांच के लिए आरोपी को हिरासत में लेना बेहद जरूरी हो. कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी पुलिस का अधिकार जरूर है, लेकिन इसे अनिवार्य कार्रवाई नहीं माना जा सकता. पुलिस को पहले नोटिस जारी कर आरोपी से सहयोग लेने की कोशिश करनी चाहिए.
BNSS 2023 में गिरफ्तारी को लेकर क्या नियम हैं?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के तहत सात साल तक की सजा वाले मामलों में पुलिस को आरोपी को पहले नोटिस देना जरूरी है. नोटिस के जरिए आरोपी को जांच में शामिल होने का मौका दिया जाता है. गिरफ्तारी तभी की जा सकती है जब आरोपी जांच में सहयोग नहीं करे, फरार होने की आशंका हो या सबूतों से छेड़छाड़ का खतरा हो.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
इस फैसले से आम नागरिकों को बड़ी राहत मिल सकती है. इससे पुलिस द्वारा अनावश्यक गिरफ्तारी की घटनाओं पर रोक लगेगी. नागरिकों के मौलिक अधिकार मजबूत होंगे. साथ ही जांच एजेंसियों को भी पारदर्शी और संतुलित तरीके से काम करना होगा. यह फैसला न्याय व्यवस्था में भरोसा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह...और पढ़ें
First Published :
February 06, 2026, 09:01 IST

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