Last Updated:January 02, 2026, 12:58 IST
Karnataka EVM Survey Report: EVM को लेकर विपक्षी पार्टियां सरकार और चुनाव आयोग पर हमलावर रही हैं. इसकी अगुआई कांग्रेस और पार्टी के सीनियर लीडर राहुल गांधी कर रहे हैं. राहुल ने कई मौकों पर विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस कर EVM और उसकी कमियों एवं खामियों को सार्वजनिक तौर पर उठाते रहे हैं. यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा था. अब कांग्रेस शासित कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार ने EVM को लेकर एक सर्वे रिपोर्ट पब्लिश की है, जिससे राहुल गांधी के दावे पर ही सवाल उठने लगे हैं.
Karnataka EVM Survey Report: कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार ने EVM यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को लेकर एक सर्वे रिपोर्ट प्रकाशित की है. इसके बाद राहुल गांधी ही घिरते नजर आ रहे हैं. (फाइल फोटो: PTI) Karnataka EVM Survey Report: भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है. संसदीय चुनाव में एक अरब से ज्यादा लोग वोट डालने के योग्य हैं. इनमें से करोड़ों लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं, ऐसे में वोटिंग प्रक्रिया का पारदर्शी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार मुक्त होना अनिवार्य है. भारत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM से वोटिंग होती है. EVM को लेकर विपक्ष की ओर से अक्सर ही सवाल उठाए जाते हैं. खासकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी इसको लेकर बेहद आक्रामक रहे हैं. राहुल ने तो EVM पर सवाल उठाते हुए कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है. अब राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी शासित कर्नाटक सरकार की ओर से EVM को लेकर ऐसी रिपोर्ट जारी की गई है, जिससे राहुल गांधी अपने दावे को लेकर खुद ही चक्रव्यूह में फंस गए हैं. कर्नाटक में इस समय सिद्दारमैया मुख्यमंत्री हैं. सर्वे रिपोर्ट की मानें तो 83 फीसद लोगों ने EVM पर भरोसा जताया है. ऐसे में बेंगलुरु से लेकर मुंबई और हैदराबाद से लेकर दिल्ली तक में राहुल गांधी के दावों पर सवाल उठने लगे हैं.
दरअसल, EVM को लेकर लंबे समय से चल रही राजनीतिक बहस के बीच कर्नाटक सरकार द्वारा कराए गए एक नए सर्वे ने इस मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है. सर्वे में यह बात सामने आई है कि राज्य के अधिकांश मतदाता EVM पर भरोसा करते हैं और उन्हें सुरक्षित मानते हैं. इस सर्वे के नतीजों के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने कांग्रेस और खास तौर पर राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है. भाजपा नेताओं का कहना है कि जब भी कांग्रेस चुनाव हारती है, वह ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठाने लगती है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
हैदराबाद में इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता एन. रामचंदर राव ने कहा कि देश की जनता को ईवीएम पर पूरा भरोसा है. उन्होंने कहा, ‘भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जहां बड़े पैमाने पर EVM के जरिए चुनाव कराए जाते हैं. सुप्रीम कोर्ट भी कई बार साफ कर चुका है कि EVM से छेड़छाड़ संभव नहीं है. जब कांग्रेस चुनाव हारती है, तब वह ईवीएम को दोष देने लगती है.’ राव ने यह भी कहा कि ईवीएम को लेकर फैलाई जा रही शंकाएं लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के प्रयास हैं. वहीं, दिल्ली में भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर और भी तीखा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को जब भी चुनाव में हार का सामना करना पड़ता है, वह EVM और चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा करने लगते हैं. पूनावाला ने कहा, ‘कर्नाटक में हुए सर्वे से साफ है कि जनता ईवीएम को सुरक्षित मानती है और उस पर भरोसा करती है. हर बार जब राहुल गांधी ईवीएम या व्यवस्था को दोष देते हैं, उन्हें हकीकत का सामना करना पड़ता है.’ उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस हार का ठीकरा संस्थाओं पर फोड़कर अपनी विफलताओं से ध्यान हटाना चाहती है.
‘EVM पर लगे सभी आरोप खारिज’
मुंबई में शिवसेना नेता शाइना एनसी ने भी कर्नाटक सर्वे के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि यह सर्वे बेहद व्यापक और स्पष्ट है. उन्होंने बताया कि कर्नाटक सरकार द्वारा कराए गए इस सर्वे में 102 विधानसभा क्षेत्रों के 5,100 लोगों को शामिल किया गया. सर्वे के अनुसार 91 प्रतिशत लोगों ने माना कि ईवीएम में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हुई और चुनाव आयोग की ओर से भी कोई हस्तक्षेप नहीं था. शाइना एनसी ने कहा कि ये आंकड़े उन सभी आरोपों को खारिज करते हैं, जो चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हैं. रांची से भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने भी इसी तरह का बयान देते हुए कहा कि जहां-जहां भी इस तरह के सर्वे कराए गए हैं, वहां की राज्य सरकारें खुद ईवीएम की विश्वसनीयता की गवाह बनी हैं. उन्होंने खास तौर पर इस बात पर जोर दिया कि कर्नाटक में फिलहाल कांग्रेस की सरकार है. प्रतुल शाह देव ने सवाल उठाया कि अगर ईवीएम में किसी तरह की गड़बड़ी होती, तो क्या कांग्रेस कहीं भी सरकार बना पाती? कर्नाटक में कांग्रेस सत्ता में है, यह अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि ईवीएम निष्पक्ष और भरोसेमंद हैं.
EVM पर चुनाव आयोग का क्या पक्ष है?
ईवीएम को लेकर यह बहस कोई नई नहीं है. पिछले कई चुनावों के बाद कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं. हालांकि चुनाव आयोग, सर्वोच्च न्यायालय और तकनीकी विशेषज्ञ बार-बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनमें छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश नहीं है. चुनाव आयोग का कहना है कि ईवीएम को कई स्तरों पर जांचा जाता है और चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होती है. कर्नाटक सर्वे के नतीजों को भाजपा लोकतंत्र में जनता के विश्वास की जीत बता रही है. पार्टी नेताओं का कहना है कि इस तरह के सर्वे यह साबित करते हैं कि आम मतदाता न केवल चुनाव प्रक्रिया को समझता है, बल्कि उस पर भरोसा भी करता है. भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस बार-बार ईवीएम पर सवाल उठाकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश करती है.
अब आगे क्या होगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों से पहले ईवीएम को लेकर बयानबाजी और तेज हो सकती है. हालांकि कर्नाटक सर्वे जैसे आंकड़े यह संकेत देते हैं कि जमीनी स्तर पर मतदाताओं का भरोसा अब भी मजबूत है. कुल मिलाकर ईवीएम को लेकर छिड़ी यह बहस केवल तकनीक की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विश्वास और राजनीतिक जवाबदेही की भी है, जिसमें जनता की राय सबसे अहम मानी जा रही है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें
Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
January 02, 2026, 12:58 IST

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