साइबर ठगों आ गए तुम्हारे काल! भारत के 'साइबर कमांडो' तैयार, बस डायल करना होगा 1930 और हो जाएगा काम

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साइबर ठगों का खत्म खेल! भारत के ‘साइबर कमांडो’ तैयार, बस डायल करें 1930

Last Updated:March 05, 2026, 13:13 IST

India Cyber Commando: भारत में बढ़ते साइबर अपराध से निपटने के लिए सरकार ने बड़ा डिजिटल सुरक्षा तंत्र तैयार किया है. इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के तहत प्रशिक्षित साइबर कमांडो अब साइबर ठगों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं. अगर किसी के साथ साइबर फ्रॉड होता है तो उसे बस हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना है या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करनी है.

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भारत में साइबर अपराध से निपटने के लिए I4C और साइबर कमांडो तैयार हैं. (AI फोटो)

नई दिल्ली: भारत में साइबर अपराध अब सबसे तेजी से बढ़ने वाले खतरों में शामिल हो चुका है. हर दिन हजारों लोग ऑनलाइन ठगी का शिकार हो रहे हैं. कभी फर्जी इन्वेसटमेंट के नाम पर पैसा ठगा जाता है. कभी हनी ट्रैप के जरिए ब्लैकमेल किया जाता है. कहीं बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट के नेटवर्क चल रहे हैं तो कहीं साइबर स्लेवरी जैसे अपराध सामने आ रहे हैं. मोबाइल पर आया एक लिंक, सोशल मीडिया का एक मैसेज या अनजान कॉल और देखते ही देखते किसी की पूरी कमाई गायब हो जाती है. यही वजह है कि आम नागरिकों के मन में डर बैठ चुका है कि अगला निशाना कहीं वे खुद तो नहीं बनने वाले.

लेकिन अब इस डिजिटल अपराध की दुनिया को जवाब देने के लिए भारत ने अपनी नई डिजिटल सेना तैयार कर ली है. देश में इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी I4C के जरिए साइबर ठगों के खिलाफ बड़ी रणनीति बनाई गई है. यहां खास तरह के प्रशिक्षित ‘साइबर कमांडो’ तैयार किए गए हैं, जो साइबर अपराधियों की चाल समझते हैं और तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि अगर कोई साइबर फ्रॉड होता है तो पीड़ित को बस हेल्पलाइन नंबर 1930 डायल करना होता है या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करनी होती है. इसके बाद पूरा सिस्टम तुरंत सक्रिय हो जाता है.

गृह मंत्रालय के तहत इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की स्थापना. (AI फोटो)

साइबर अपराधियों पर कैसे होगा डिजिटल हमला

केंद्र सरकार ने साइबर अपराध से निपटने के लिए गृह मंत्रालय के तहत इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की स्थापना की है. यह एक नोडल एजेंसी है जो देशभर की पुलिस, बैंकिंग संस्थानों, टेलीकॉम कंपनियों और पेमेंट गेटवे को एक ही प्लेटफॉर्म से जोड़कर काम करती है. इसका मकसद है कि साइबर अपराध की शिकायत मिलते ही कार्रवाई शुरू हो जाए और ठगों के नेटवर्क को तुरंत रोका जा सके. जब कोई व्यक्ति 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करता है या ऑनलाइन शिकायत दर्ज करता है, तो मामला सीधे Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System में दर्ज हो जाता है. इसके बाद Cyber Fraud Mitigation Centre सक्रिय हो जाता है. यहां अलग-अलग एजेंसियां एक ही जगह से काम करती हैं. API इंटीग्रेशन के जरिए बैंक, टेलीकॉम और पेमेंट कंपनियों के सिस्टम जुड़े हुए हैं, इससे संदिग्ध ट्रांजैक्शन को तुरंत ट्रैक और फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. हालिया डेटा बताता है कि देश में साइबर फ्रॉड अब संगठित नेटवर्क के रूप में फैल चुका है. 10 जनवरी 2025 से 20 जनवरी 2026 के बीच चेक के जरिए संदिग्ध निकासी के 3827 मामले सामने आए. इनमें राजस्थान, उत्तर प्रदेश और गुजरात शीर्ष पर रहे. वहीं एटीएम के जरिए संदिग्ध निकासी के 43,450 मामले सामने आए, जिनमें बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड सबसे ऊपर रहे. इसके अलावा देशभर में 54,869 बैंक खाते संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े पाए गए हैं.

साइबर ठगी होने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?

अगर किसी व्यक्ति के साथ साइबर फ्रॉड होता है तो सबसे पहले उसे तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए या cybercrime.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करनी चाहिए. जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी उतनी ही जल्दी बैंक ट्रांजैक्शन को ट्रैक करके रकम को फ्रीज या रिकवर करने की संभावना बढ़ जाती है. देरी होने पर पैसे कई खातों में ट्रांसफर हो सकते हैं, इससे रिकवरी मुश्किल हो जाती है.

साइबर कमांडो क्या होते हैं और उनका काम क्या है?

साइबर कमांडो विशेष रूप से प्रशिक्षित विशेषज्ञ होते हैं जिन्हें साइबर अपराध के नए-नए तरीकों को समझने और उनसे निपटने के लिए तैयार किया गया है. ये डिजिटल फॉरेंसिक, नेटवर्क ट्रैकिंग, डेटा एनालिसिस और ऑनलाइन अपराधियों की पहचान करने में माहिर होते हैं. उनका काम साइबर अपराधियों के नेटवर्क को पहचानना, डिजिटल सबूत जुटाना और एजेंसियों को कार्रवाई में मदद करना है.

भारत में साइबर फ्रॉड के सबसे बड़े खतरे कौन से हैं?

भारतीय एजेंसियों के अनुसार इस समय सबसे बड़ा खतरा फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड है. इसमें फर्जी निवेश वेबसाइट, नकली ट्रेडिंग ऐप, फर्जी कस्टमर केयर नंबर और सोशल मीडिया स्कैम शामिल हैं. अपराधी लोगों को मोटे मुनाफे का लालच देकर पैसे निवेश करवाते हैं और फिर गायब हो जाते हैं. इसके अलावा फिशिंग, OTP फ्रॉड, हनी ट्रैप और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग जैसे अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं.

कैसे टूट रहा साइबर ठगों का नेटवर्क?

सरकारी एजेंसियों का मानना है कि हॉटस्पॉट मैपिंग, रियल-टाइम निगरानी और मल्टी-एजेंसी कोऑर्डिनेशन के जरिए साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तेजी से तोड़ा जा सकता है. I4C के जरिए देशभर की एजेंसियां एक साथ मिलकर काम कर रही हैं. इससे डिजिटल अपराधियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई तेज हुई है. साफ है कि अब साइबर ठगों के खिलाफ भारत का डिजिटल पलटवार शुरू हो चुका है.

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Sumit Kumar

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह...और पढ़ें

First Published :

March 05, 2026, 13:11 IST

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