वोटर लिस्ट पर विपक्ष के सवाल, CEC का आया करारा जवाब; बताया कैसे सफल हुआ SIR का मॉडल?

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Last Updated:January 23, 2026, 14:42 IST

Gyanesh Kumar on SIR: वोटर लिस्ट पर विपक्ष के सवालों के बीच CEC ज्ञानेश कुमार ने SIR मॉडल का जोरदार बचाव किया. उन्होंने कहा कि शुद्ध वोटर लिस्ट लोकतंत्र का पहला स्तंभ है. बिहार उदाहरण देते हुए CEC ने दावा किया कि वहां किसी योग्य मतदाता का नाम नहीं हटा. यह बयान IICDEM 2026 के मंच से आया.

वोटर लिस्ट पर विपक्ष का हमला, CEC का जवाब; SIR मॉडल कैसे हुआ कामयाब?SIR पर विपक्ष के आरोपों के बीच CEC ज्ञानेश कुमार का बड़ा बयान. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: वोटर लिस्ट को लेकर उठ रहे सियासी सवालों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का बयान चुनावी बहस के केंद्र में आ गया है. विपक्ष जहां SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को ‘वोट कटौती’ और ‘डिसफ्रैंचाइजमेंट’ से जोड़ रहा है, वहीं CEC ने साफ शब्दों में कहा कि शुद्ध वोटर लिस्ट किसी भी लोकतंत्र का पहला स्तंभ होती है. उनका कहना है कि लोकतंत्र तभी मजबूत हो सकता है, जब हर योग्य नागरिक का नाम सूची में हो और अयोग्य नाम स्वतः हटें. यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब देश में चल रहे SIR को लेकर विपक्ष लगातार सवाल खड़े कर रहा है.

वैश्विक चुनाव प्रबंधन कॉन्फ्रेंस (IICDEM 2026) के समापन सत्र में CEC ज्ञानेश कुमार ने न सिर्फ SIR मॉडल का बचाव किया, बल्कि उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने वाला कदम बताया. उन्होंने कहा कि चुनाव प्रबंधन संस्थानों का काम किसी सरकार या दल के लिए नहीं, बल्कि संविधान और कानून के तहत हर मतदाता के अधिकार की रक्षा करना है. CEC के मुताबिक अगर वोटर लिस्ट शुद्ध होगी, तो चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी होगी और अविश्वास की गुंजाइश अपने आप खत्म हो जाएगी.

CEC का साफ संदेश: शुद्ध सूची ही लोकतंत्र की नींव

CEC ज्ञानेश कुमार ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि शुद्ध वोटर लिस्ट किसी भी लोकतंत्र का पहला स्तंभ है. उनका कहना था कि सभी योग्य मतदाताओं का नाम सूची में होना चाहिए और किसी भी अयोग्य नाम का बने रहना लोकतंत्र के लिए उतना ही खतरनाक है. CEC ने दो टूक कहा कि चुनाव आयोग का मकसद किसी को बाहर करना नहीं, बल्कि सही लोगों को शामिल करना है.

बिहार मॉडल क्यों बताया गया सफल?

CEC ने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि SIR के दौरान वहां किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटाया गया और न ही कोई गलत नाम जोड़ा गया. उन्होंने बताया कि 7.5 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं वाले राज्य में SIR के बाद अपीलों की संख्या लगभग शून्य रही. CEC के मुताबिक यह इस बात का प्रमाण है कि प्रक्रिया पारदर्शी और भरोसेमंद थी.

विपक्ष के आरोपों पर अंतरराष्ट्रीय मंच से जवाब

CEC का यह बयान सिर्फ घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहा. IICDEM 2026 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर जहां दुनिया भर के चुनाव प्रबंधन विशेषज्ञ मौजूद थे, CEC ने भारत के चुनावी सिस्टम को मजबूत और विश्वसनीय बताया. उन्होंने कहा कि जब चुनाव प्रक्रिया पर वैश्विक भरोसा बनता है तो लोकतंत्र और मजबूत होता है. विपक्ष के आरोपों के बीच इस मंच से दिया गया बयान काफी अहम माना जा रहा है.

फोटो पहचान पत्र और आसान चुनाव प्रक्रिया पर जोर

CEC ज्ञानेश कुमार ने यह भी कहा कि चुनाव प्रबंधन संस्थानों की जिम्मेदारी है कि सभी मतदाताओं को फोटो पहचान पत्र उपलब्ध कराए जाएं. इससे न सिर्फ पहचान आसान होती है बल्कि फर्जी मतदान की आशंका भी खत्म होती है. उनका कहना था कि टेक्नोलॉजी और आसान प्रक्रियाओं के जरिए चुनाव को मतदाताओं के लिए सरल बनाया जाना चाहिए.

संविधान और कानून सर्वोपरि

CEC ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग और उससे जुड़ी सभी संस्थाएं संविधान और कानून के अनुसार ही काम करती हैं. किसी भी दबाव या राजनीतिक आरोप के आधार पर प्रक्रिया नहीं बदली जाती. उनका कहना था कि अगर नियमों का सख्ती से पालन होगा, तो लोकतंत्र में भरोसा और सहभागिता दोनों बढ़ेंगी.

क्या है SIR और क्यों उठा विवाद?

SIR वोटर लिस्ट को अपडेट करने की एक विशेष प्रक्रिया है. इसके तहत मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से पलायन कर चुके लोगों और डुप्लीकेट नामों की पहचान कर सूची को शुद्ध किया जाता है. विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के नाम पर कई जगह योग्य मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं. खासकर बिहार में SIR को लेकर विपक्ष ने चुनाव आयोग पर पक्षपात और वोट चोरी के आरोप लगाए.

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Sumit Kumar

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 3 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह...और पढ़ें

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January 23, 2026, 14:42 IST

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