कपूरथला के महाराजा जगतजीत सिंह की पर्सनालिटी भारतीय रियासतों के इतिहास में सबसे रंगीन और रोचक थी. वह फ्रांस और पेरिस से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने पंजाब की छोटी सी रियासत कपूरथला को ‘मिनी पेरिस’ में तब्दील करने की कोशिश की. वह जब शराब पीते तो बिल्कुल फ्रेंच स्टाइल में पीते. फ्रांस की शराब उन्हें ज्यादा पसंद आती. साथ ही पेरिस की डांस करने वालियां भी. इस महाराजा की जीवनशैली किसी हॉलीवुड फिल्म या किसी क्लासिक उपन्यास के नायक जैसी थी.
कपूरथला के महाराजा के तौर पर जगतजीत सिंह सबसे अलग थे. वह 1872 में पैदा हुए और 1949 में उनकी मृत्यु हुई. वह ऐसे ‘कॉस्मोपॉलिटन’ शासक थे, जिनका दिल भारत में धड़कता था, लेकिन आत्मा पेरिस की गलियों में बसती थी. उनकी पढ़ाई भी फ्रांस में ही हुई.
शाम का स्वागत शैंपेन और कॉन्याक के साथ
महाराजा जगतजीत सिंह की शराबखोरी महज नशा नहीं, बल्कि एक आर्ट थी. वह देसी मदिरा के बजाय बेहतरीन फ्रेंच शैंपेन और कॉन्याक के शौकीन थे. उनके बारे में मशहूर था कि वे अपनी शाम की शुरुआत बेहतरीन शैंपेन के साथ करते थे. ये महाराजा के पास सीधे फ्रांस के रीम्स इलाके से आती थीं.
सुरूर में फ्रेंच में बोलते और कविताएं पढ़ते
महाराजा पर जब शैंपेन का सुरूर चढ़ने लगता था तो महाराजा शुद्ध फ्रेंच में बात करने लगते थे. तब वह विक्टर ह्यूगो और अन्य फ्रांसीसी कवियों की कविताएं इस कदर धाराप्रवाह पढ़ते थे कि सुनने वाले को भ्रम हो जाता कि वह पेरिस के किसी साहित्यिक क्लब में तो नहीं बैठा है. उनकी ये पार्टियां इस मायने में काफी नफासत वाली होती थीं कि उसमें सभी को सभ्यता के साथ पेश आना पड़ता था. महाराजा को कतई पसंद नहीं था कि नशे में कोई ऊंची आवाज में बोले. इन पार्टियों में कॉन्याक, बर्गंडी वाइन या शैंपेन परोसी जाती. कला, राजनीति, फ्रेंच क्रांति, भारत में सुधार जैसे विषयों पर चर्चा होती.
…फिर पेरिस की डांसर्स के साथ थिरकना शुरू करते
महाराजा को नृत्य और संगीत का गहरा शौक था लेकिन उनकी पसंद अक्सर पेरिस और यूरोप की मशहूर नर्तकियां होती थीं, जो ज्यादातर कपूरथला बुलाई जाती थीं. महाराजा अक्सर शराब के ज्यादा नशे में आने के बाद इन डांसर्स के साथ बैंड बजवाते और थिरकते.
उनके महल ‘जगतजीत पैलेस’ के भव्य बॉलरूम में रात भर पार्टियां चलती थीं. शैंपेन की लहरों के बीच महाराजा पेरिस से आई नर्तकियों के साथ बॉलरूम डांस और वाल्ट्ज़ करते थे. उनकी पार्टियों में यूरोप के ऊंचे घरानों के लोग और ब्रिटिश अधिकारी शामिल होते थे. वे खुद बेहतरीन डांसर थे. नृत्य के दौरान उनकी फुर्ती और तालमेल देखकर पेरिस के मेहमान भी दंग रह जाते थे.
कपूरथला को फ्रांस बनाने की कोशिश
महाराजा का फ्रांस प्रेम केवल शराब और डांस तक सीमित नहीं था. उन्होंने अपनी रियासत कपूरथला को पूरी तरह फ्रांसीसी रंग में रंग दिया था. उनके जगतजीत पैलेस का डिजाइन फ्रांस के वर्साय के महल की तरह हुआ था. इसकी छतें, पेंटिंग्स और फर्नीचर सब कुछ पेरिस से मंगाया गया. दरबार में काम करने वाले कई कर्मचारी फ्रांसीसी थे. यहां तक कि महाराजा ने अपने दरबारियों के लिए भी फ्रांसीसी शिष्टाचार जरूरी कर दिया था.
उनका पहनावा भी पूरी तरह से यूरोपीय था. वह भारतीय परिधानों की जगह फ्रेंच सूट, सिल्क हैट और पॉलिश किए जूते पहनना पसंद करते थे. उनकी यह शैली उस समय के भारतीय राजाओं के बीच एक अनोखी थी, जहां अधिकतर राजा भारतीय पोशाकों को ही प्राथमिकता देते थे.
जब एक विदेशी डांसर्स पर दिल आया
महाराजा के जीवन का सबसे दिलचस्प किस्सा उनकी पांचवीं पत्नी अनीता डेलगाडो से जुड़ा है. 1906 में जब महाराजा स्पेन के राजा अल्फोंसो XIII की शादी में शामिल होने मैड्रिड गए, तो उन्होंने एक कैफे में 16 साल की फ्लेमेंको डांसर अनीता को नाचते देखा. पहली ही नजर में वह उस पर फिदा हो गए. उन्होंने अनीता को कपूरथला लाने का फैसला किया.
उन्होंने अनीता को पेरिस भेजा ताकि वह फ्रेंच और अंग्रेजी सीख सके. वहां के तौर-तरीके जान सके. बाद में दोनों की शादी हुई. दोनों से एक बेटा भी हुआ. वह महारानी प्रेम कौर के नाम से जानी गईं. यह शादी उस समय पूरी दुनिया के अखबारों की सुर्खियां बनी. इस पर फिल्म भी बनी. हालांकि महाराजा ने अपनी इस विदेशी बीवी को छोड़ दिया. वह वापस चली गई.
लुई वितों के सबसे बड़े ग्राहकों में एक
महाराजा जगतजीत सिंह दुनिया की सबसे बड़े लग्जरी ब्रांड ‘लुई वितों’ के सबसे बड़े ग्राहकों में एक थे. जब भी विदेश यात्रा पर जाते, उनके साथ 60 से अधिक बड़े लुई वितों ट्रंक होते थे. इन बक्सों में उनके कीमती कपड़े, शैंपेन की बोतलें, तलवारें और उनकी पगड़ी रखने के लिए विशेष खाने बने होते थे. आज भी लुई वितों के संग्रहालय में महाराजा के लिए बनाए गए कस्टमाइज्ड ट्रंक रखे हुए हैं.
महाराजा को हीरे-जवाहरात का बेहद शौक था. वे अपनी पगड़ी पर जो सरपेच पहनते थे, उसमें दुनिया के बेहतरीन हीरे जड़े होते थे. उन्होंने पेरिस के मशहूर जौहरी कार्टियर से कई अनमोल गहने बनवाए थे. उनकी पगड़ी में लगा पन्ना इतना बड़ा था कि उसे दुनिया के सबसे बड़े पन्नों में गिना जाता था.
महाराजा के पोते ब्रिगेडियर सुखजीत सिंह और सिंथिया मीरा फ्रेड्रिक ने अपनी किताब “प्रिंस, पैट्रन एंड पैट्रियाच – महाराजा जगतजीत सिंह ऑफ कपूरथला” (Prince, Patron & Patriarch: Maharaja Jagatjit Singh of Kapurthala) में महाराजा के बारे में विस्तार से लिखा गया है.
जब शराब पीने से इनकार कर दिया
लेखक बताते हैं कि 1900 के आसपास पेरिस में एक हाई-प्रोफाइल डिनर के दौरान एक फ्रेंच उद्योगपति ने जानबूझकर महाराजा को अत्यधिक तेज़ शराब ऑफर की. ये दरअसल एक तरह का सोशल टेस्ट था कि क्या भारतीय राजा खुद पर काबू रख पाएगा?”
महाराजा ने गिलास हाथ में लिया. केवल एक घूंट लिया. फिर गिलास नीचे रख दिया. फ्रेंच में कहा, वाइन विचारों को बढ़ाती है ना कि गिराती है. किताब के अनुसार, इस जवाब ने पूरे कमरे को चुप करा दिया. ये किस्सा दिखाता है कि वे हार्ड ड्रिंकर से ज़्यादा कंट्रोल्ड ड्रिंकर थे.

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