Last Updated:March 07, 2026, 11:38 IST
मुजफ्फरपुर स्थित लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. बिकास दास ने बताया कि इस वर्ष बिहार में लीची के पेड़ों में मंजर तो अच्छा आया है, लेकिन सामान्य वर्षों की तुलना में इसकी मात्रा कुछ कम है. इसका मुख्य कारण नवंबर और दिसंबर के शुरुआती दिनों में तापमान का औसत से अधिक होना रहा है.
मौसम में हो रहे बदलाव के कारण इस बार लीची किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है. लीची के पेड़ों में मंजर (फूल) आ चुके हैं. इस समय थोड़ी सी लापरवाही भी उत्पादन को प्रभावित कर सकती है. ऐसे में वैज्ञानिकों ने किसानों को मंजर की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है.
मुजफ्फरपुर स्थित लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. बिकास दास ने बताया कि इस वर्ष बिहार में लीची के पेड़ों में मंजर तो अच्छा आया है, लेकिन सामान्य वर्षों की तुलना में इसकी मात्रा कुछ कम है. इसका मुख्य कारण नवंबर और दिसंबर के शुरुआती दिनों में तापमान का औसत से अधिक होना रहा है. जिससे कई बागानों में नए पत्ते निकल आए और मंजर की संख्या प्रभावित हुई.
लीची किसानों की बढ़ी चिंता
हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार लीची का फलन बेहतर हो सकता है. पिछले कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण मिट्टी काफी सूखी हो गई है. ऐसे में जिन बागानों की मिट्टी अत्यधिक सूखी है, वहां किसान हल्की सिंचाई कर सकते हैं. लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि इस समय अधिक सिंचाई नहीं करनी चाहिए. इससे मंजर को नुकसान पहुंच सकता है. फल सेट होने के बाद ही नियमित सिंचाई शुरू करना अधिक उचित रहेगा. डॉ. दास ने बताया कि इस समय मंजर पर इन्फ्लोरेसेंस ब्लाइट नामक बीमारी लगने का खतरा रहता है, जिससे मंजर सूखने लगते हैं। इससे बचाव के लिए किसानों को रोको दवा का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है.
लीची के पौधे मंजर में बढ़ रहा रोग
इसके अलावा लीची बग (कीट) का भी प्रकोप देखा जा रहा है. इसके नियंत्रण के लिए “अलान्टो” नामक कीटनाशक को प्रहार के साथ मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। साथ ही पेड़ों से गिरने वाले कीड़ों को इकट्ठा कर धूप में रखकर नष्ट करना जरूरी है, ताकि वे दोबारा पेड़ों पर चढ़कर नुकसान न पहुंचा सकें. वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि भविष्य में बढ़ते तापमान को देखते हुए किसानों को अपने बगीचों में मिनी स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने पर ध्यान देना चाहिए. सरकार की ओर से इस पर लगभग 80 प्रतिशत तक सब्सिडी भी दी जा रही है. मिनी स्प्रिंकलर लगाने से पेड़ की छाया के नीचे का तापमान 4 से 5 डिग्री तक कम किया जा सकता है, जिससे फल के जलने, फटने और गिरने की समस्या लगभग समाप्त हो जाती है.
Location :
Muzaffarpur,Bihar
First Published :
March 07, 2026, 11:38 IST

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