Last Updated:March 07, 2026, 08:12 IST
Bengal Chunav: पश्चिम बंगाल में आने वाले कुछ दिनों में विधानसभा चुनाव की तिथियों का ऐलान हो सकता है. उससे पहले प्रदेश में SIR पर महीनों से चली आ रही सियासत अब उबाल तक पहुंच चुकी है. 60 लाख से ज्यादा वोटर्स का नाम कटने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोर्चा खोल दिया है. वे धरने पर बैठ गई हैं. उन्होंने शुक्रवार रात टेंट में ही बिताई.

कोलकाता. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने लगभग दो दशक बाद एक बार फिर सड़क की राजनीति का सहारा लेते हुए केंद्रीय कोलकाता के एस्प्लेनेड इलाके में धरना शुरू किया है. यह धरना राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के विरोध में किया जा रहा है. ममता बनर्जी ने भाजपा और चुनाव आयोग पर बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की साजिश रचने का आरोप लगाया और कहा कि वह इस कथित षड्यंत्र को बेनकाब करेंगी. धरने की शुरुआत शुक्रवार दोपहर करीब 2.15 बजे हुई. इस दौरान मंच पर ममता बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस के कई मंत्री, विधायक और वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. धरना स्थल पर हजारों समर्थकों की भीड़ भी देखी गई. ममता ने घोषणा की कि जिन मतदाताओं को चुनाव आयोग ने मृत घोषित कर दिया है, लेकिन वे वास्तव में जीवित हैं, उन्हें वह मंच पर लाकर दिखाएंगी.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में कहा, ‘भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर बंगाली मतदाताओं को वोट देने के अधिकार से वंचित करने की कोशिश कर रहे हैं. मैं इस साजिश का पर्दाफाश करूंगी.’ उन्होंने आरोप लगाया कि संशोधित मतदाता सूची में कई जीवित मतदाताओं को मृत घोषित कर दिया गया है. तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी SIR प्रक्रिया को लेकर लगातार चुनाव आयोग पर हमला बोल रहे हैं. उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के तहत लाखों योग्य मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किया जा सकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम बहुल जिलों (मालदा और मुर्शिदाबाद) में बड़ी संख्या में मतदाताओं को ‘विचाराधीन’ श्रेणी में डाल दिया गया है.
क्या है आरोप
अभिषेक बनर्जी के मुताबिक, मालदा के कई विधानसभा क्षेत्रों में करीब 42 प्रतिशत मतदाताओं को ‘विचाराधीन’ श्रेणी में रखा गया है. इसके अलावा मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना में भी बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए हैं. तृणमूल का आरोप है कि इस प्रक्रिया में अल्पसंख्यक समुदायों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है. हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नवंबर में शुरू हुई एसआईआर प्रक्रिया के बाद 28 फरवरी तक करीब 63.66 लाख नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं. यह कुल मतदाताओं का लगभग 8.3 प्रतिशत है. इसके साथ ही राज्य में मतदाताओं की संख्या लगभग 7.66 करोड़ से घटकर करीब 7.04 करोड़ रह गई है. इसके अतिरिक्त करीब 60.06 लाख मतदाताओं को न्यायिक जांच के अधीन श्रेणी में रखा गया है, जिनकी पात्रता का फैसला आने वाले समय में कानूनी प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा.
सीएम ममता बनर्जी ने टेंट में पूरी रात बिताई. (फोटो: PTI)
आठ जिलों में चल रही जांच
इसी संदर्भ में राज्य के आठ जिलों (उत्तर और दक्षिण 24 परगना, हुगली, हावड़ा, बीरभूम, पूर्व और पश्चिम बर्दवान तथा नादिया) में न्यायिक अधिकारियों द्वारा मामलों की जांच की जा रही है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक मुर्शिदाबाद जिले में सबसे अधिक 11 लाख से ज्यादा मामले विचाराधीन हैं, जबकि मालदा में 8 लाख से अधिक, उत्तर 24 परगना में लगभग 6 लाख और दक्षिण 24 परगना में करीब 5.22 लाख मामले दर्ज किए गए हैं.
चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ करने वाली है दौरा
ममता बनर्जी का यह धरना चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ के प्रस्तावित राज्य दौरे से ठीक दो दिन पहले शुरू हुआ है, जिससे राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है. भाजपा ने इस आंदोलन को राजनीतिक नाटक बताया है. भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा कि ममता बनर्जी को धरने का अभ्यास शुरू कर देना चाहिए, क्योंकि 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा सत्ता में आएगी और वह विपक्ष की नेता बन जाएंगी.
धरना और आंदोलन से पुराना नाता
ममता बनर्जी की राजनीति में धरना और आंदोलन हमेशा अहम रहे हैं. वर्ष 2006 में सिंगूर में टाटा मोटर्स की नैनो फैक्ट्री के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ उन्होंने कोलकाता के मेट्रो चैनल पर 25 दिनों तक भूख हड़ताल की थी. उस आंदोलन ने पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा बदल दी थी और बाद में 2011 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी. एस्प्लेनेड में हो रहा यह धरना केवल मतदाता सूची के मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ममता बनर्जी की उसी ‘स्ट्रीट पॉलिटिक्स’ की वापसी भी है, जिसने उन्हें एक जननेता के रूप में स्थापित किया था. फिलहाल उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह धरना कितने दिन तक चलेगा, लेकिन इसके जरिए राज्य की राजनीति में एक नया टकराव जरूर शुरू हो गया है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें
Location :
Kolkata,West Bengal
First Published :
March 07, 2026, 08:12 IST

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