Last Updated:February 24, 2026, 18:06 IST
CJI Suryakant : हल्द्वानी रेलवे विस्तार से जुड़े 50 हजार लोगों की बेदखली के रिव्यू केस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि किसी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को अनिश्चितकाल तक रोका नहीं जा सकता. सीजेआई सूर्यकांत ने पुनर्वास पर जोर देते हुए निर्देश दिया कि प्रभावित परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन करें और राज्य सरकार इसके लिए कैंप लगाकर प्रक्रिया आसान बनाए.

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में रेलवे एक्सपेंशन के लिए प्रस्तावित बेदखली से जुड़े मामले की समीक्षा की. यह केस करीब 50,000 लोगों से जुड़ा है, जो वर्षों से रेलवे की जमीन पर रह रहे हैं. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण दलीलें रख रहे थे. इसी दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इसमें कोई विवाद नहीं है कि जमीन राज्य की है और उसका उपयोग कैसे किया जाए, यह तय करने का अधिकार राज्य को है.
हालांकि जस्टिस जॉयमाल्या ने आगे कहा कि मुख्य सवाल यह है कि जब वहां रह रहे लोगों को हटाया जाएगा, तो उनका पुनर्वास कैसे होगा. अदालत की पहली नजर में यह मामला ‘अधिकार से ज़्यादा मानवीय सहायता’ का प्रतीत होता है. इसी क्रम में CJI सूर्यकांत ने बेहद अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता यह तय नहीं कर सकते कि रेलवे लाइन कहां बिछेगी. किसी भी बड़े प्रोजेक्ट के लिए खाली जमीन की जरूरत होती है और ऐसी परियोजनाओं को स्थायी रूप से रोका नहीं जा सकता.
क्यों सीजेआई ने पीएम आवास योजना का किया जिक्र?
सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अपीलकर्ताओं को रेलवे साइट पर ही पुनर्वास की मांग करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. उन्होंने सुझाव दिया कि प्रभावित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बेहतर सुविधाओं वाले वैकल्पिक स्थानों पर बसाया जा सकता है.
इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार पीएम आवास योजना के तहत जमीन लेकर मुआवजे के बदले घर उपलब्ध कराने के विकल्प पर विचार कर रही है, ताकि भविष्य की पीढ़ियों को भी सुरक्षित आवास मिल सके.
कलेक्टर को दिए क्या आदेश?
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह बेहद जरूरी है कि बेदखली के कारण याचिकाकर्ताओं की रोजी-रोटी प्रभावित न हो. इसी को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने नैनीताल के जिला कलेक्टर और हल्द्वानी प्रशासन को निर्देश दिया कि पीएम आवास योजना के आवेदन फॉर्म प्रभावित लोगों को उपलब्ध कराए जाएं.
कोर्ट ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव को भी निर्देश दिया कि वे मौके पर पुनर्वास कैंप लगाएं और सुनिश्चित करें कि हर परिवार का मुखिया योजना के तहत आवेदन करे. अदालत ने कहा कि 19 मार्च के बाद कैंप लगाए जाएं और 31 मार्च से पहले कोई व्यावहारिक समाधान निकाला जाए.
Location :
Delhi,Delhi,Delhi
First Published :
February 24, 2026, 18:06 IST

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