एप्रोच रोड के अभाव में करोड़ों का सोना नदी पुल बना शोपीस, तीन प्रखंडों की उम्मीदें अधूरी

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Last Updated:February 24, 2026, 16:27 IST

सोना नदी पर करीब 13 वर्ष पहले लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से पुल का निर्माण कराया गया था. पुल पूरी तरह तैयार है, लेकिन एप्रोच सड़क नहीं बनने के कारण यह आज तक उद्घाटन और उपयोग दोनों से वंचित है. बलिया पंचायत में सात राजस्व गांव शामिल हैं. ग्रामीणों के लंबे संघर्ष और मांग के बाद पुल तो बन गया, लेकिन उससे जुड़ने वाली सड़क अधूरी छोड़ दी गई.

सिवान: विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच सीवान जिले का एक गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है. मामला आंदर प्रखंड की बलिया पंचायत का है, जहां सोना नदी पर करीब 13 वर्ष पहले लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से पुल का निर्माण कराया गया था. पुल पूरी तरह तैयार है, लेकिन एप्रोच सड़क नहीं बनने के कारण यह आज तक उद्घाटन और उपयोग दोनों से वंचित है. बलिया पंचायत में सात राजस्व गांव शामिल हैं. ग्रामीणों के लंबे संघर्ष और मांग के बाद पुल तो बन गया, लेकिन उससे जुड़ने वाली सड़क अधूरी छोड़ दी गई. पुल के दोनों छोर पर कुछ दूरी तक सड़क बनाई भी गई थी, जो अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी है. नतीजतन करोड़ों रुपये की लागत से बना यह पुल आज सिर्फ शोपीस बनकर रह गया है.

ग्रामीण महेश श्रीवास्तव बताते हैं कि वर्तमान में इस पुल से किसी को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है. पुल के एक ओर गांव बसा है, जबकि दूसरी ओर कच्ची मिट्टी की सड़क है, जो हुसैनगंज प्रखंड मुख्यालय की ओर जाती है. यदि इस कच्ची सड़क को पक्का कर दिया जाए तो न सिर्फ बलिया पंचायत बल्कि आसपास के कई गांवों के लोगों को सीधा फायदा मिलेगा. स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण हो जाने से आंदर, हुसैनगंज और जिरादेई इन तीन प्रखंडों के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी. फिलहाल जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए लोगों को करीब 30 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है. पुल और सड़क चालू हो जाने पर यह दूरी लगभग आधी रह जाएगी, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी.

ग्रामीण प्रिंस कुमार बताते हैं कि समस्या के समाधान के लिए कई बार सांसद, विधायक और संबंधित अधिकारियों के कार्यालयों का चक्कर लगाया गया, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है. बरसात के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं. यदि किसी को सांप काट ले या अचानक तबीयत बिगड़ जाए, तो अस्पताल पहुंचना बड़ी चुनौती बन जाता है. कई मामलों में समय पर इलाज न मिलने से मरीजों की स्थिति गंभीर हो जाती है.

युवा ग्रामीण अभिषेक यादव का कहना है कि यह पुल दो विधानसभा क्षेत्रों जीरादेई और दरौली को जोड़ने की क्षमता रखता है. यदि आगे की कच्ची सड़क को पक्का कर दिया जाए तो आवागमन बेहद सुगम हो जाएगा. इससे न केवल आम लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा. किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी और छात्रों का स्कूल-कॉलेज जाना भी सुविधाजनक हो जाएगा.

ग्रामीणों की एक बड़ी चिंता पुल की मौजूदा स्थिति को लेकर भी है. वर्षों से उपयोग नहीं होने और नियमित रखरखाव के अभाव में पुल धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत और सड़क निर्माण नहीं कराया गया, तो यह पुल उपयोग में आने से पहले ही क्षतिग्रस्त हो सकता है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पुल का निर्माण पूरा हो चुका है, तो उससे जुड़ी सड़क अब तक क्यों नहीं बनाई गई? क्या यह विभागीय समन्वय की कमी का परिणाम है या प्रशासनिक उदासीनता का उदाहरण? करोड़ों रुपये की लागत से बने इस पुल का लाभ आखिर क्षेत्रवासियों को कब मिलेगा?

फिलहाल बलिया पंचायत के सातों राजस्व गांवों के लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार और प्रशासन उनकी समस्या पर गंभीरता से ध्यान देगा. यदि सड़क निर्माण का कार्य पूरा हो जाता है, तो यह पुल सिर्फ सोना नदी के दो किनारों को ही नहीं, बल्कि तीन प्रखंडों की तकदीर को भी जोड़ने का काम कर सकता है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क...और पढ़ें

First Published :

February 24, 2026, 16:27 IST

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