Last Updated:January 02, 2026, 23:22 IST
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ कोई पैरामिलिट्री संगठन नहीं है. संघ का उद्देश्य समाज को एकजुट करना और संस्कार भरना है, ताकि भारत फिर गुलाम न बने. भागवत ने विकिपीडिया की अधूरी जानकारी और संघ के खिलाफ गढ़े जा रहे नैरेटिव से बचने की सलाह दी. उन्होंने जोर दिया कि एकता और स्वार्थ त्याग से ही देश की आजादी की गारंटी सुनिश्चित की जा सकती है.
मोहन भागवत ने खुलकर अपनी बात कही. नई दिल्ली. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि यूनिफॉर्म और फिजिकल एक्सरसाइज के अलावा संघ कोई पैरामिलिट्री संगठन नहीं है. एक समारोह में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज को एकजुट करने और उसमें जरूरी गुण और संस्कार भरने का काम करता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भारत फिर से किसी विदेशी शक्ति के चंगुल में न फंसे. उन्होंने कहा, “हम यूनिफॉर्म पहनते हैं, मार्च निकालते हैं और लाठी एक्सरसाइज करते हैं लेकिन अगर कोई सोचता है कि यह एक पैरामिलिट्री संगठन है तो यह एक गलती होगी.”
मोहन भागवत ने कहा कि संघ को समझना मुश्किल है. यह एक अनोखा संगठन है. उन्होंने कहा, “संघ के खिलाफ एक गलत कहानी गढ़ी जा रही है. आजकल लोग सही जानकारी इकट्ठा करने के लिए गहराई में नहीं जाते. वे मूल स्रोत तक नहीं जाते. वे विकिपीडिया पर जाते हैं. वहां सब कुछ सच नहीं होता. जो लोग भरोसेमंद स्रोतों पर जाएंगे, उन्हें संघ के बारे में पता चलेगा.”
भागवत ने कहा, “एक आम भावना है कि संघ का जन्म (मौजूदा ताकतों के) रिएक्शन या विरोध के रूप में हुआ था. ऐसा नहीं है. संघ किसी भी चीज का रिएक्शन या विरोध नहीं है. संघ किसी से मुकाबला भी नहीं कर रहा है.” भागवत ने कहा कि अंग्रेज देश पर हमला करने वाले पहले नहीं थे. बार-बार दूर-दराज के इलाकों से मुट्ठी भर लोग जो भारतीयों से कमतर थे, आए और हमें हरा दिया.
उन्होंने कहा कि वे हमारी तरह अमीर नहीं थे, हमारी तरह गुणी नहीं थे. वे दूर-दराज के इलाकों से आए थे और देश की छोटी-मोटी बातें नहीं जानते थे, लेकिन उन्होंने हमें हमारे ही घर में हरा दिया. ऐसा सात बार हुआ था और अंग्रेज आठवें हमलावर थे. तो आजादी की क्या गारंटी है? हमें इस कारण पर सोचना होगा कि ऐसा बार-बार क्यों होता है.” भागवत ने आगे कहा, “हमें खुद को समझना चाहिए और स्वार्थ से ऊपर उठना चाहिए. अगर समाज गुणों और संस्कारों के साथ एकजुट होकर खड़ा होता है, तो इस देश की किस्मत अच्छे के लिए बदल जाएगी.”
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और...और पढ़ें
First Published :
January 02, 2026, 23:21 IST

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