भारत में 2025 साल मौसम के लिहाज से काफी गर्म रहा. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, यह साल देश का 8वां सबसे गर्म साल था. साल भर का औसत तापमान लंबे समय के औसत से 0.28 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा. खास बात यह है कि यह साल ऐसे समय में गर्म रहा, जब न तो तेज़ अल नीनो जैसी स्थिति थी और न ही गर्मी बेहद तीखी पड़ी. इसके बावजूद पूरे साल तापमान सामान्य से ऊपर बना रहा, जो देश में बदलते जलवायु पैटर्न की ओर संकेत करता है.
वैसे सबसे गर्म साल अभी भी 2024 ही बना हुआ है, जब तापमान औसत से 0.65 डिग्री ज्यादा था. आईएमडी के मुताबिक, पिछले 15 सालों में 10 साल सबसे गर्म रहे हैं, और 2016 से 2025 का दशक सबसे गर्म दशक साबित हुआ. आईएमडी के अनुसार, साल 2025 में देश का औसत तापमान 1991–2020 के औसत से 0.28 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा. विशेषज्ञों का कहना है कि यह दिखाता है कि भारत में गर्मी का ट्रेंड लगातार बढ़ रहा है.
क्या कह रहे मौसम वैज्ञानिक?
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के असर साफ दिख रहे हैं. 1901 से 2025 तक के आंकड़ों में सालाना औसत तापमान में हर सदी में 0.68 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है. दिन का अधिकतम तापमान 0.89 डिग्री और रात का न्यूनतम तापमान 0.47 डिग्री प्रति सदी बढ़ा है.
सर्दी से लेकर बारिश तक हर मौसम में बढ़ी गर्मी
साल 2025 में लगभग हर मौसम में तापमान सामान्य से ऊपर रहा. सर्दियों के महीने जनवरी और फरवरी अपेक्षाकृत अधिक गर्म रहे, जबकि प्री-मानसून और पोस्ट-मानसून अवधि में भी औसत से अधिक तापमान दर्ज किया गया. फरवरी 2025 विशेष रूप से असामान्य रूप से गर्म रहा. इस महीने में न्यूनतम तापमान अब तक का सबसे अधिक दर्ज किया गया, जबकि अधिकतम तापमान दूसरा सबसे ऊंचा स्तर छू गया.
मौसम ने ली 2760 लोगों का जान
हालांकि 2025 में मानसून की स्थिति कुल मिलाकर अच्छी रही और देश को सामान्य से करीब 110 प्रतिशत बारिश मिली, लेकिन इसके बावजूद चरम मौसम की घटनाओं में बढ़ोतरी देखने को मिली. भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन, आकाशीय बिजली और गर्मी से जुड़ी घटनाओं ने पूरे साल देश के अलग-अलग हिस्सों में भारी तबाही मचाई. मौसम जनित आपदाओं में वर्ष 2025 के दौरान करीब 2,760 लोगों की जान चली गई. इनमें सबसे अधिक प्रभावित राज्य उत्तर प्रदेश रहा, जहां 400 से ज्यादा मौतें दर्ज की गईं. मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और झारखंड जैसे राज्यों में भी बड़ी संख्या में लोगों की जान गई. केवल भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में ही 1,370 से अधिक मौतें हुईं.
तूफानों ने भी मचाई तबाही
इस दौरान उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में चार चक्रवाती तूफान भी बने, जिनका असर भारत के साथ-साथ पड़ोसी देशों पर भी पड़ा. इनमें से कुछ चक्रवातों ने श्रीलंका, मलेशिया, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन जैसी स्थितियां पैदा कीं. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, चक्रवातों की तीव्रता और उनकी प्रकृति में भी पिछले कुछ वर्षों में बदलाव देखा जा रहा है.
इस साल ठंड की उम्मीद
अब जनवरी 2026 की बात करें तो ज्यादातर इलाकों में न्यूनतम तापमान औसत से नीचे रहने की संभावना है. उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों और दक्षिणी प्रायद्वीप में रात का तापमान सामान्य या ऊपर रह सकता है. दिन का तापमान ज्यादातर जगहों पर औसत से नीचे रहेगा, सिवाय पश्चिम-उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व और गंगा के मैदानी इलाकों के. मध्य भारत, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में कोल्ड वेव के दिन ज्यादा हो सकते हैं. लेकिन उत्तर-पश्चिम भारत में सर्दी थोड़ी कम रह सकती है, जहां दिन और रात दोनों तापमान सामान्य या ऊपर रहेंगे.
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सर्दियों के महीनों में होने वाली बारिश खासतौर पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे क्षेत्रों के लिए बेहद अहम होती है, क्योंकि यहां की सालाना वर्षा का बड़ा हिस्सा इसी दौरान होता है. यह बारिश न केवल रबी फसलों के लिए जरूरी है, बल्कि जल स्रोतों, नदियों और ग्लेशियरों के संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. IMD का आकलन साफ संकेत देता है कि भारत में मौसम के पैटर्न तेजी से बदल रहे हैं और आने वाले वर्षों में चरम मौसमी घटनाएं और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं.

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