बांग्लादेश चुनाव से पहले ही यूनुस ने कर ली थी सेटिंग! तारिक रहमान के पीएम बनते ही होगा ऐलान?

1 hour ago

2024 की उथल-पुथल के बाद बांग्लादेश में हुए पहले चुनाव में बीएनपी ने एकतरफा जीत हासिल कर ली है. कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी काफी पीछे रह गई. तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना तय है. सवाल यह है कि करीब दो साल से अंतरिम सरकार के मुखिया के तौर पर जमे मोहम्मद यूनुस का क्या होगा? बांग्लादेश में भारत की उच्चायुक्त रहीं वीणा सीकरी कहती हैं कि चुनाव के साथ-साथ कराए गए रेफरेंडम से अधिकार बढ़ जाएंगे और ढाका में चर्चा है कि यूनुस पहले 'शक्तिमान राष्ट्रपति' बनना चाहते हैं. असल में पूरी फील्डिंग उन्होंने पहले ही सेट कर रखी है. 

सीकरी ने मीडिया को दिए इंटरव्यू में इस रेफरेंडम को ही असंवैधानिक बताया. उन्होंने सबसे बड़ी पार्टी आवामी लीग को बैन कर चुनाव कराने पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि चुनावों में यूनुस की भूमिका क्रिटिकल है. यूनुस शुरू से ही रेफरेंडम पर काफी जोर देते रहे हैं, जिसे 'जुलाई नेशनल चार्टर ऑफ 2025' कहा जाता है. अब यह समझना होगा कि युनूस को जब कट्टरपंथियों की पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने सपोर्ट किया तो झट से वह रिफॉर्म्स की बातें करने लगे थे. वह चाहते थे कि संविधान बदलें, ब्यूरोक्रेसी चेंज करें, न्यायपालिका में सुधार के नाम पर बदलाव करें. 

पूर्व भारतीय डिप्लोमेट ने कहा कि याद कीजिए यूनुस कहते थे कि हमारे ये रिफॉर्म्स चार साल में पूरे होंगे यानी तब तक सरकार की कुर्सी पर वही बने रहते. यही उनकी मंशा थी. चार साल बाद वह चुनाव कराने के मूड में थे. हालांकि बांग्लादेश की जनता ने विरोध किया. पार्टियां आगे आईं. सीकरी ने कहा कि यूनुस की रिजीम ही असंवैधानिक और अवैध है. अंतरिम रिजीम का बांग्लादेश के संविधान में कोई प्रावधान ही नहीं था. सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी तो भी अंतरिम प्रशासन को 90 दिन रहने के लिए कहा गया है. इसका मकसद कानून-व्यवस्था को देखने के साथ यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हों और सभी की हिस्सेदारी हो. 

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हालांकि यूनुस सरकार ने इसमें से कुछ नहीं किया. भारतीय डिप्लोमेट ने कहा कि यूनुस 90 दिन से ज्यादा समय से टिके हैं. इस रिजीम को अराजनीतिक होना था, किसी राजनीतिक पार्टी के लोग इसमें नहीं होने चाहिए थे लेकिन सारी इस्लामिक पार्टीज के लोग इसमें भर गए. वे एडवाइजर की पोस्ट पर बैठ गए. हिज्ब-उत-तहरीर प्रतिबंधित संगठन है लेकिन उसके लोग भी यूनुस के खास बन गए. रेफरेंडम की संविधान में अनुमति ही नहीं है लेकिन वह इसे सबसे ज्यादा महत्व दे रहे हैं. सबको कह रहे हैं कि YES वोट सुनिश्चित कीजिए. 

अब जबकि यस वोट ही ज्यादा आ गए हैं तो राष्ट्रपति को ज्यादा अधिकार मिल सकते हैं, सरकार की राष्ट्रपति प्रणाली हो सकती है. वे लिबरेशन वॉर का महत्व कम करना चाहते हैं. संविधान बदलना चाहते हैं. अब चर्चा है कि बढ़ी हुई पावर्स के साथ युनूस पहले राष्ट्रपति बनना चाहते हैं. इस कारण वह रेफरेंडम को खूब महत्व दे रहे हैं. 

सीकरी का मानना है कि रहमान के पीएम बनने के बाद डिप्टी पीएम जमात-ए इस्लामी के नेता को बनाया जा सकता है और अच्छे रिश्ते होने के कारण यूनुस को राष्ट्रपति बनाने का ऐलान किया जा सकता है. मतलब यूनुस जो चार साल चाहते थे उन्हें और बड़ी कुर्सी मिल जाएगी.  

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