Last Updated:February 13, 2026, 11:22 IST
Dornier 228 Aircraft Deal: रक्षा मंत्रालय ने HAL से आठ डॉर्नियर 228 खरीद को मंजूरी दी है. ये विमान कोस्ट गार्ड के लिए हैं. इससे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा मिलेगा. इसके साथ ही रक्षा मंत्रालय ने फ्रांस से 114 राफेल और अमेरिका से छह P-8I विमानों की खरीद पर भी अपनी मुहर लगाई है.

Dornier 228 Aircraft Deal: भारत बुलेट ट्रेन की रफ्तार से अपनी सेनाओं का मॉर्डरनाइजेशन कर रहा है. इसी क्रम में गुरुवार को रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी. इसमें सबसे बड़ी मंजूरी फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट्स खरीदने की है. इस डील पर ही करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसके साथ ही भारत सरकार ने इंडियन कोस्ट गार्ड के लिए भी बड़ी डील को मंजूरी दी है. इसमें नौसेना के लिए अमेरिका से छह पी-8आई टोही विमानों की खरीद को भी मंजूरी दी गई. कोस्ट गार्ड के लिए जेट की डील पब्लिक सेक्टर की कंपनी एचएएल को दी गई है. इस पर 2312 करोड़ रुपये खर्च होंगे. एचएएल से आठ डॉर्नियर 228 टोही विमान खरीदे जाएंगे.
दरअसल, भारत सरकार ने मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल को मजबूत करते हुए रक्षा क्षेत्र में कई बड़े कदम उठाए हैं. रक्षा मंत्रालय ने एचएएल के साथ डॉर्नियर के लिए जो सौदा किया है वह ‘बाय (इंडियन)’ श्रेणी के तहत हुआ है. इसकी जानकारी खुद रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने दी है.
यह अनुबंध एचएएल के कानपुर स्थित ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट डिवीजन के साथ हुआ है. इन विमानों में स्वदेशी मैरीटाइम पैट्रोल रडार, EO/IR सेंसर, आधुनिक ग्लास कॉकपिट और इंटीग्रेटेड मिशन मैनेजमेंट सिस्टम जैसे उपकरण शामिल होंगे. ये विमान समुद्री क्षेत्र जागरूकता, सर्च एंड रेस्क्यू, प्रदूषण नियंत्रण और तटीय निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस ऑर्डर से एचएएल का उत्पादन इकोसिस्टम मजबूत होगा. एमएसएमई और सहायक उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा.
कोस्ट गार्ड के लिए बेहद अहम हैं ये विमान
भारतीय तटरक्षक बल पहले से ही HAL द्वारा निर्मित डॉर्नियर 228 का संचालन कर रहा है, जो STOL (शॉर्ट टेक-ऑफ एंड लैंडिंग) क्षमता के कारण दूरस्थ द्वीपों और अर्ध-तैयार स्ट्रिप्स से उड़ान भर सकते हैं. डॉर्नियर 228 भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड के लिए बहुमुखी विमान हैं. इसका मुख्य उपयोग मैरीटाइम सर्विलांस, इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस (ELINT), एंटी-सबमरीन वारफेयर (ASW), टारगेटिंग डेटा प्रदान करना और अवैध गतिविधियों की निगरानी में होता है. हाल के वर्षों में मिड-लाइफ अपग्रेड (MLU) के तहत 25 नौसैनिक डॉर्नियर को अपग्रेड किया गया है, जिसमें एडवांस्ड ‘क्षितिज’ रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट शामिल हैं.
इसके साथ ही रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 12 फरवरी 2026 को रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में कई प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिसमें अमेरिका से छह अतिरिक्त बोइंग P-8I पोसीडॉन विमानों की खरीद शामिल है. वर्तमान में भारतीय नौसेना के पास 12 P-8I विमान हैं, जो INS राजाली (तमिलनाडु) और INS हंसा (गोवा) पर तैनात हैं. नई खरीद से फ्लीट 18 तक पहुंच जाएगी, जो अमेरिका के बाहर P-8 का सबसे बड़ा ऑपरेटर बनाएगा.
यह सौदा इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट (IGA) के तहत है. इसकी अनुमानित लागत 3-4 अरब डॉलर होने की उम्मीद है. इसमें ऑफसेट या टेक्नोलॉजी ट्रांसफर नहीं है, क्योंकि ऑपरेशनल जरूरतों को प्राथमिकता दी गई है. P-8I को सबमरीन हंटर कहा जाता है, जो लंबी दूरी की ASW, मैरीटाइम सर्विलांस और स्ट्राइक क्षमता प्रदान करता है. ये चीनी नौसेना की गतिविधियों की निगरानी और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण होंगे.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें
First Published :
February 13, 2026, 11:22 IST

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