Papaya Smart Farming Tips: परंपरागत खेती के घाटे का रोना रोने वाले किसानों के लिए भोजपुर के आशुतोष पांडेय एक नई मिसाल बनकर उभरे हैं. कभी सालाना 5 लाख की प्राइवेट नौकरी करने वाले आशुतोष आज डेढ़ एकड़ खेत में पपीते की स्मार्ट फार्मिंग के जरिए 11 लाख रुपये सालाना मुनाफा कमा रहे हैं. उनके पपीतों की डिमांड इतनी है कि फल बाजार में आने से पहले ही एडवांस बुक हो जाते हैं. आशुतोष की कामयाबी का सबसे बड़ा राज मल्चिंग और ड्रिप इरिगेशन तकनीक है. उन्होंने अपनी जमीन पर 1200 पेड़ लगाए हैं, जिन्हें वे खुद तैयार की गई जैविक खाद देते हैं. इससे पपीते का साइज बड़ा और स्वाद काफी मीठा होता है. आशुतोष बताते हैं कि एक पेड़ सालभर में करीब 300 किलो फल देता है. ₹30 प्रति किलो के होलसेल भाव पर उनका कुल उत्पादन सालाना 11 लाख रुपये का बिजनेस देता है. खुद की खाद बनाने के कारण लागत बेहद कम रहती है. आशुतोष के अनुसार, अगर किसान 10 से 30 डिग्री तापमान और दोमट मिट्टी का सही तालमेल बिठा लें, तो पपीता 24 महीने तक फल देने वाला 'पैसा कमाने का एटीएम' बन सकता है.
पुरानी परंपरा, नई तकनीक! बिहार का ये किसान पपीता से कर रहा ₹11 लाख की कमाई, जानें 'सक्सेस मंत्र'
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