US Policy: अमेरिका युद्ध की धमकी क्यों देता है? और अमेरिका को युद्ध करने से क्या लाभ होता है. तो इसकी सबसे बड़ी वजह है आर्थिक मंदी. जब-जब अमेरिका को लगता है, उसके देश में मंदी आ रही है. युद्ध से वो इसकी भरपाई करता है. ऐसा हम नहीं कह रहे. ऐसा अमेरिका की वॉर टाइमिंग बता रही है. वर्ष 1893 से लेकर 2026 तक अमेरिका इसी फॉर्मूले से काम कर रहा है.
- 1893 की मंदी के बाद अमेरिका ने स्पेनिश-अमेरिकन युद्ध लड़ा. 1898 में हुए इस युद्ध के बाद अमेरिका पहली बार ग्लोबल पावर बना.
- 1929 की महामंदी के बाद द्वितीय विश्व युद्ध में उतरकर अमेरिका ने मंदी से निकलकर विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना ली.
- 1949 की आर्थिक सुस्ती के बाद कोरियाई युद्ध ने अमेरिका का रक्षा बजट बढ़ाया और अमेरिकी इंडस्ट्री को नई गति मिली
- वर्ष 2000 में अमेरिका में डॉट-कॉम क्रैश हुआ . 1995 से 2000 के बीच अमेरिका में इंटरनेट का जबरदस्त क्रेज़ था. जिन कंपनियों के नाम में डॉट कॉम लगा होता था, उनमें लोग बिना मुनाफ़ा देखे पैसा लगा रहे थे. लेकिन मार्च 2000 में निवेशकों को एहसास हुआ कि ये कंपनियां हकीकत में पैसा कमा ही नहीं रहीं . घबराहट में लोग शेयर बेचने लगे . और अमेरिकी शेयर बाजार धड़ाम हो गया . इसके बाद न्यूयॉर्क में 9/11 आतंकी हमला हुआ और अमेरिका को युद्ध का बड़ा मौका मिल गया. यूएस ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई शुरू की . इससे अमेरिका की हथियार और डिफेंस कंपनियों को बड़ा फायदा मिला.
साल 2022 से 24 के बीच महंगाई और स्लोडाउन के दौर में यूक्रेन और इज़राइल युद्ध से अमेरिका ने रिकॉर्ड हथियार निर्यात किए और आर्थिक बढ़त हासिल की.
और अब अमेरिका में बढ़ती महंगाई के बीच..ट्रंप को भारी मंदी का डर सता रहा है. इसलिए उन्होंने एक तरफ टैरिफ वॉर छेड़ दिया है. और दूसरी ओर हथियार वाली जंग के हालात भी पैदा कर दिये हैं.
दुनिया के नक्शे को बदलने की सनक से पहले ट्रंप ने अपनी आर्थिक नीतियों से उथल-पुथल मचाया. ट्रंप की इस अस्थिर नीति का खामियाज़ा पूरी दुनिया भुगत रही है. जैसा कि हमने आपको बताया सिर्फ 6 घंटे में भारत ने 10 लाख करोड़ रुपये गंवा दिए. देश का शेयर बाजार एक हजार प्वाइंट से भी ज्यादा गिर गया. इसकी एक वजह ट्रंप भी हैं.क्योंकि ट्रंप ने भारत समेत पूरी दुनिया के बाजार को अस्थिर कर दिया है. अमेरिका के लोग भी इससे बचे नहीं हैं. इस अराजकता के माहौल में अगर किसी एक शख्स का फायदा हुआ है तो वो हैं ट्रंप.
आज आपको जानना चाहिए कि दुनिया में अस्थिरता फैलाकर कैसे ट्रंप मालामाल बन गए हैं. ट्रंप एक साल में कितने मालामाल हुए और दुनिया कितनी कंगाल हुई है, आंकड़ों के आधार पर हमने ये विश्लेषण तैयार किया है.
पिछले एक साल के दौरान ट्रंप की संपत्ति 87 प्रतिशत बढ़ी है यानी ट्रंप की कुल संपत्ति बढ़कर 3.9 अरब डॉलर से बढ़कर 7.3 अरब डॉलर हो गई है. इस तरह ट्रंप 65 हज़ार करोड़ से ज़्यादा की संपत्ति के मालिक बन गए हैं.
वहीं दूसरी तरफ़ सिर्फ़ GDP के मामले में दुनिया को 1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान होने जा रहा है.
सोचिए दुनिया के सबसे धनवान देश का राष्ट्रपति ख़ुद और अमीर हो रहा है जबकि बाक़ी देशों को उसने ग़रीब बनाना शुरू कर दिया है. इस उथल-पुथल की शुरुआत ट्रंप के टैरिफ से होती है. अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने टैरिफ के नाम पर पूरी दुनिया में टेरर फैलाया.
पहले अमेरिका में औसत टैरिफ दर 2.4 प्रतिशत था जो अब बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच गया है. यानी अमेरिका में औसत टैरिफ दर साढ़े सात गुना हो गया है.
ट्रंप के टैरिफ को लेकर अमेरिका में भी बहुत ज़्यादा असंतोष है. टैरिफ को लेकर अमेरिका की मशहूर टाइम मैगज़ीन में क्या लिखा गया है, ये आपको जानना चाहिए.
टाइम मैगज़ीन ने ट्रंप के टैरिफ की तुलना टरमाइट यानी दीमक से की है. टाइम मैगज़ीन के मुताबिक ट्रंप के टैरिफ से तत्काल तबाही नहीं आएगी लेकिन लंबे समय में इससे वैश्विक व्यापार का ढांचा कमज़ोर होगा.
मौजूदा समय में विश्व व्यापार का यही हाल है. DNA मित्रो, जो कारोबार विश्व व्यापार संगठन यानी WTO के नियमों के तहत होता था, उसे ट्रंप ने तहस-नहस कर दिया. टैरिफ लगाकर ट्रंप ने WTO के मूल सिद्धांतों को तोड़ दिया. इस तरह ट्रंप ने वैश्विक व्यापार को नियम-आधारित से ताकत आधारित बना दिया.
ट्रंप के टैरिफ वाले मनमाने फैसले से अमेरिका के लोग भी नहीं बच पाए हैं.
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जहां ट्रंप की संपत्ति में 87 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, वहीं अमेरिका में महंगाई दर में 0.3 से लेकर 0.5% तक बढ़ोतरी हुई.
- अमेरिका में बेरोज़गारी दर 4.1% से बढ़कर 4.6% हो गई है.
- टैरिफ की घोषणा के बाद अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 70,000 से ज़्यादा नौकरियां घटी हैं.
- 2025 में अमेरिका में 700 से अधिक कंपनियां दिवालिया हुईं, जो 2010 के बाद सबसे अधिक है. स्टार्टअप पर इसका सबसे ज़्यादा असर पड़ा है.
हैरानी की बात ये है कि इसके बाद भी टैरिफ को लेकर ट्रंप पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने हाल के दिनों में कई और धमकियां दी हैं. ट्रंप ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी है. इसके अलावा ग्रीनलैंड के मुद्दे पर NATO देशों पर 10 से लेकर 25 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है.
यानी कोई भी देश टैरिफ को लेकर ट्रंप की मनमानी से बच नहीं पाया है. चाहे वो यूरोपीय देश ही क्यों न हों. ये अलग बात है कि टैरिफ लगाने का ये फ़ैसला अमेरिकी क़ानून के मुताबिक है भी या नहीं, ये अभी तक साफ नहीं हो पाया है. अमेरिका की निचली अदालत ने इसे संविधान के ख़िलाफ़ बताया था. अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट में है जिस पर किसी भी दिन फ़ैसला आ सकता है.

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