Last Updated:January 12, 2026, 17:33 IST
World Longest Tunnel : अगर आपसे पूछा जाए कि दुनिया का सबसे महंगा प्रोजेक्ट कौन सा है, जिस पर 20 ट्रिलियन डॉलर से भी ज्यादा का खर्चा आने वाला है. यह प्रोजेक्ट दुनिया के दो सबसे हाईटेक शहरों के बीच बनाया जाएगा और इसके तैयार होने के बाद इन दोनों शहरों में आने-जाने का समय सिर्फ 54 मिनट का रह जाएगा. अभी इन शहरों के बीच हवाई जहाज से पहुंचने में भी 7 से 8 घंटे का समय लग जाता है.

यह प्रोजेक्ट अमेरिका और ब्रिटेन मिलकर बना रहे है. इसके तहत अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर को ब्रिटन के लंदन से समंदर के नीचे एक टनल के जरिये जोड़ा जाएगा. अभी दोनों शहरों के बीच फ्लाइट से जाने में भी 7 से 8 घंटे का समय लग जाता है. यह प्रोजेक्ट अटलांटिक महासागर के नीचे करीब 3,400 मील (5471 किलोमीटर) लंबी टनल बनाई जाएगी. इस टनल में सुपर स्पीड वाली ट्रेन चलाई जाएगी, जो 54 मिनट में ही इस दूरी को तय कर देगी. प्रोजेक्ट पर करीब 20 ट्रिलियन डॉलर यानी 1,800 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.

वैसे तो इस प्रोजेक्ट का एक ही मसकद है कि न्यूयॉर्क से लंदन के बीच की दूरी को कम किया जा सके. इस टनल को वैक्यूम टेक्नोलॉजी के तहत बनाया जाएगा जिसके अंदर 3 हजार मील प्रति घंटे की स्पीड से ट्रेन को चलाया जा सकेगा. अभी इन दोनों शहरों के बीच फ्लाइट से जाने में भी 8 घंटे का समय लग जाता है, क्योंकि विमान की टॉप स्पीड 550 किलोमीटर से ज्यादा नहीं होती है. लेकिन अटलांटिक महासागर के नीचे इस वैक्यूम टनल के जरिये सिर्फ 54 मिनट में ही पहुंचा जा सकेगा.

यूके से फ्रांस के बीच अभी दुनिया की सबसे लंबी टनल काम कर रही है. इस टनल को 6 साल की कड़ी मेहनत से बनाया गया है. इसका नाम है चैनल टनल, जो विश्व प्रसिद्ध इंग्लिश चैनल के नीचे बनाई गई है और इसकी लंबाई 31 मील यानी करीब 50 किलोमीटर है. हालांकि, लंदन और न्यूयॉक के बीच प्रस्तावित टनल को बनाने में इससे कहीं ज्यादा समय लग सकता है. साथ ही इसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भी जरूरत होगी.
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लंदन से न्यूयॉर्क के बीच अटलांटिक महासागर के नीचे टनल बनाने में सबसे बड़ी चुनौती इसकी लागत को लेकर है, क्योंकि यह यूके की जीडीपी से भी करीब 4 गुना ज्यादा महंगा होने वाला है. माना जा रहा है कि इसमें इस्तेमाल होने वाली तकनीक और मैटेरियल पर 20 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 1,800 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत आ सकती है. इस टनल को वैक्यूम तकनीक पर बनाया जाएगा, जिसमें चलने वाली ट्रेन मैग्नेटिक ताकत से चलेगी और उसकी स्पीड फ्लाइट से भी करीब 5 से 6 गुना ज्यादा रहेगी.

फिलहाल अभी तक ऐसी कोई तकनीक जमीन पर नहीं है और यह पूरी तरह ब्लूप्रिंट या यूं कहें कि थ्योरी तक ही आधारित है. यही वजह है कि अभी इस प्रोजेक्ट के जमीन पर आने की उम्मीद कम है. लेकिन, दोनों ही देशों ने इस पर गंभीरता से विचार करना शुरू कर दिया है. भविष्य में वैक्यूम तकनीक डेवलप होती है तो निश्चित रूप से इन दोनों शहरों के बीच बनने वाली यह टनल मानव निर्मित सबसे बड़ा अजूबा साबित हो सकती है.

इस टनल के पूरे होने के बाद यूरोप और उत्तरी अमेरिका के बीच की दूरी कम हो जाएगी. यह सिर्फ ट्रांसपोर्ट के तरीके को नहीं बदलेगा, बल्कि दो महाद्वीपों के बीच टूरिज्म और बिजनेस सेक्टर को बढ़ावा भी देगा. इस टनल के जरिये दुनिया की आर्थिक और राजनीतिक पहुंच भी बड़ा बदलाव आएगा. इस प्रोजेक्ट को लेकर अरबपति कारोबारी एलन मस्क पहले ही अपना नजरिया पेश कर चुके हैं. उनका कहना है कि इससे धरती के नक्शे में बड़ा बदलाव आएगा.

यह 20 ट्रिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट दो महाद्वीपों के बीच की दूरी को सिमेटकर सिर्फ 50 मिनट की कर सकता है. इससे दुनिया के अन्य शहरों के बीच बिना फ्लाइट या कार के आने-जाने की सुविधा और बेहतर हो सकेगी. अगर यह प्रोजेक्ट पूरा होता है तो मानव इतिहास की सबसे बड़ी क्रांति होगी, क्योंकि अभी तक इतना मुश्किल प्रोजेक्ट नहीं बनाया जा सका है. अटलांटिक महासागर को एक टनल के जरिये पार करना सोच से भी परे लगता है, लेकिन इस प्रोजेक्ट के जरिये इस सोच को साकार करने की कोशिश की जा रही है.
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3 hours ago
