तमिलनाडु की दरगाह में रोज नमाज पर 'सुप्रीम' रोक, पशु बलि भी बैन, क्या है 100 साल पुराना मामला?

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Last Updated:February 09, 2026, 15:26 IST

Supreme Court On Daily Namaz in Thirupparankundram Dargah: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के ऐतिहासिक थिरुप्परनकुंड्रम दरगाह (Thirupparankundram Dargah) मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए दरगाह परिसर में रोज़ाना नमाज़ (Daily Namaz) और पशु बलि (Animal Sacrifice) की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है. अब वहां केवल रमज़ान और बकरीद जैसे त्योहारों पर ही नमाज़ की अनुमति होगी. जानिए सुप्रीम कोर्ट ने इमाम हुसैन की याचिका क्यों खारिज की और क्या है मुरुगन मंदिर से जुड़ा यह पूरा विवाद.

तमिलनाडु की दरगाह में रोज नमाज पर रोक, पशु बलि भी बैन, 100 साल पुराना मामलाZoom

सुप्रीम कोर्ट ने थिरुप्परनकुंड्रम दरगाह मामले में मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया है. (फाइल फोटो)

Supreme Court On Daily Namaz in Thirupparankundram Dargah: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के एक संवेदनशील में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है. शीर्ष अदालत ने थिरुप्परनकुंड्रम (Thirupparankundram) दरगाह में रोज़ाना नमाज़ पढ़ने की अनुमति मांगने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने साफ किया है कि इस दरगाह में हर दिन नमाज़ नहीं पढ़ी जाएगी, बल्कि केवल रमजान और बकरीद जैसे विशेष त्योहारों पर ही नमाज अदा करने की इजाजत रहेगी.

यह अपील एक प्रैक्टिसिंग मुस्लिम, इमाम हुसैन द्वारा दायर की गई थी. इसमें उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी. जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने मामले की सुनवाई की. पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने का कोई कारण नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने न केवल रोजाना नमाज की मांग को ठुकराया, बल्कि दरगाह परिसर में पशु बलि (Animal Sacrifice) पर लगी रोक को भी सही ठहराया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों की गरिमा और वहां की स्थापित परंपराओं का पालन करना जरूरी है.

क्या है पूरा विवाद और इसका इतिहास?

यह पूरा मामला मदुरै के पास स्थित ऐतिहासिक थिरुप्परनकुंड्रम पहाड़ी से जुड़ा है. यह पहाड़ी भगवान मुरुगन के प्राचीन मंदिर (अरुपदाई वीदु में से एक) के लिए प्रसिद्ध है. इसी पहाड़ी की चोटी पर सिकंदर बादुशा की दरगाह भी स्थित है. विवाद की जड़ दरगाह के उपयोग को लेकर थी. याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि दरगाह को एक मस्जिद की तरह इस्तेमाल करने दिया जाए. यहां रोज़ाना पांच वक्त की नमाज पढ़ने की मांग की गई थी. इसके अलावा, उर्स और अन्य मौकों पर वहां पशु बलि की अनुमति भी मांगी गई थी. हालांकि, हिंदू संगठनों और मंदिर प्रशासन ने इसका विरोध किया था, क्योंकि यह स्थान भौगोलिक और ऐतिहासिक रूप से मुरुगन मंदिर परिसर का हिस्सा माना जाता है.

नई प्रथा को इजाजत नहीं

मद्रास हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया था कि दरगाह में रोज़ाना नमाज़ की परंपरा नहीं रही है और इसे नई प्रथा के रूप में शुरू नहीं किया जा सकता. हाईकोर्ट ने माना था कि यह स्थान सभी धर्मों के लोगों के लिए श्रद्धा का केंद्र हो सकता है, लेकिन इसे विशेष समुदाय के लिए दैनिक प्रार्थना स्थल (मस्जिद) में नहीं बदला जा सकता. अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी तर्क पर मुहर लगा दी है.

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Deep Raj Deepak

दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व...और पढ़ें

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New Delhi,Delhi

First Published :

February 09, 2026, 15:26 IST

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