ट्रेन में मिलने वाला चिकन-मटन हलाल होता है या झटका, रेलवे ने बताई नॉनवेज खाने की सच्चाई

2 hours ago

Last Updated:January 13, 2026, 07:03 IST

Indian Railway Non Veg Food: ट्रेन में परोसे या बेचे जाने वाले नॉन-वेज खाने को लेकर लंबे समय से यह सवाल उठता रहा है कि वह हलाल पद्धति से तैयार होता है या झटका तरीके से. इस मुद्दे पर अक्सर विवाद भी सामने आते रहे हैं. अब भारतीय रेलवे ने इस पर स्थिति साफ कर दी है.

ट्रेन में मिलने वाला चिकन-मटन हलाल होता है या झटका? रेलवे ने बताई सच्चाईराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने ट्रेन में परोसे जाने वाले नॉनवेज खाने पर सफाई मांगी थी, जिस पर रेलवे ने जवाब दिया है.

ट्रेन में परोसा या बेचा जाने वाला नॉन-वेज खाना हलाल होता है या झटका? इसे लेकर अक्सर ही विवाद उठता रहता है. हालांकि अब भारतीय रेल ने इस पर तस्वीर साफ की है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने बताया कि हमें एक शिकायत मिली थी जिसमें कहा गया था कि भारतीय रेलवे में परोसा या बेचा जाने वाला नॉन-वेज खाना सिर्फ हलाल तरीके से काटे गए जानवरों से बनाया जाता है.

प्रियंक कानूनगो ने कहा कि हमने यह मुद्दा रेलवे के सामने उठाया और उनसे सफाई मांगी. रेलवे ने बताया कि उनके यहां हलाल सर्टिफिकेशन की कोई बाध्यता नहीं है. हम इस बात के लिए उनकी प्रशंसा करते हैं कि उन्होंने समय पर तुरंत संज्ञान लिया और हमें जवाब दिया. यह उनकी जिम्मेदारी को दर्शाता है.

क्यों है विवाद?

कानूनगो ने बताया कि हमने उन्हें एक नोटिस के माध्यम से पूछा है कि रेलवे में जो ठेकेदार भोजन बेचते हैं या सप्लायर मांस की सप्लाई करते हैं, वह हलाल पद्धति से है या झटका पद्धति से. यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि दारुल उलूम देवबंद के अनुसार हलाल पद्धति से जानवर का वध सिर्फ मुसलमान ही कर सकते हैं.

उन्होंने कहा, सरकारी एजेंसी होने के नाते रेलवे जो खाना बेच रही है, उसमें मांस किस पद्धति से तैयार किया जा रहा है, यह स्पष्ट होना चाहिए. झटका पद्धति से मांस का वध हिंदू तथा अन्य दलित समुदाय करते हैं. सभी वर्गों के लोगों के जीविका के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रकार के मांस की बिक्री होनी चाहिए.

ट्रेन के खाने पर लगेगा स्टिकर?

प्रियंक कानूनगो ने आगे कहा कि रेलवे के साथ-साथ FSSAI को भी नोटिस जारी कर पूछा गया है कि ऐसी संभावनाओं पर विचार किया जाए, जहां भारत में बिकने वाली मांसाहारी सामग्री पर यह स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट किया जाए कि यह सभी धर्मों के लोग खा सकते हैं या नहीं. किसी के लिए प्रतिबंध है तो उसे स्पष्ट रूप से बता दिया जाए. उन्होंने कहा कि भारत में एक अन्य अल्पसंख्यक समुदाय सिख समुदाय है. सिख धर्म मानने वालों के लिए पवित्र नियम पुस्तिका है, जिसमें आर्टिकल 24 में स्पष्ट लिखा है कि सिखों को इस्लामी हलाल पद्धति से तैयार किया गया मीट नहीं खाना चाहिए. यह उनके लिए प्रतिबंधित है. यदि एक विशेष पद्धति से तैयार मीट सिख समुदाय के लिए प्रतिबंधित है, तो अंजाने में उन्हें वही भोजन देना धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ है और मानवाधिकार का उल्लंघन है.

About the Author

Saad Omar

An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T...और पढ़ें

Location :

New Delhi,Delhi

First Published :

January 13, 2026, 07:03 IST

homebusiness

ट्रेन में मिलने वाला चिकन-मटन हलाल होता है या झटका? रेलवे ने बताई सच्चाई

Read Full Article at Source