DNA Analysis: आपको पता होगा, आपने सुना होगा कि किसी एक मंत्री के पास दूसरे मंत्रालय का कार्यभार होता है. लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि एक राष्ट्रपति के पास किसी दूसरे देश का कार्यभार है? निश्चित तौर पर नहीं सुना होगा. क्योंकि आज से पहले ऐसा कभी हुआ ही नहीं. लेकिन आज से ट्रंप ने ये भी कर दिया.
एक देश का राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने स्वयं को दूसरे देश का कार्यकारी राष्ट्रपति घोषित कर दिया. ये घोषणा भी उन्होंने स्वयं की है. ऐसा कोई पहली बार नहीं हुआ है जब डॉनल्ड ट्रंप ने इस तरह का आत्मकेंद्रित और अप्रत्याशित फैसला किया है. आपने ट्रंप का सोशल मीडिया प्रोफाइल देखा है, जिसमें उनकी तस्वीर के नीचे लिखा है- एक्टिंग प्रेसिडेंट ऑफ वेनेजुएला. यानी वेनेजुएला के कार्यकारी राष्ट्रपति. ट्रंप ने स्वयं को उसी वेनेजुएला का राष्ट्रपति घोषित किया है, जिसके प्रेसिडेंट को उन्होंने 3 जनवरी को किडनैप करवाया था.
वेनेजुएला के राष्ट्रपति
वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति इस समय डेल्सी रोड्रिग्ज हैं. लेकिन उसी वेनेजुएला को अपने हिसाब से चलाने के लिए या कहिए कि दुनिया को संदेश देने के लिए ट्रंप ने खुद को वहां का कार्यकारी राष्ट्रपति घोषित कर दिया और उन्होंने ये घोषणा कहां की है? सोशल मीडिया पर, उस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जो खुद उन्हीं का है. जब ट्रंप ने खुद वेनेजुएला का भी अतिरिक्त कार्यभाल संभाल लिया है. तब वो अपने राइटहैंड और विदेश मंत्री मार्को रूबियो को एक-दूसरे देश का कार्यभार सौंपने की तैयारी में हैं. इसका संकेत भी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिया. डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को क्यूबा का राष्ट्रपति बनाने का समर्थन किया है. एक पोस्ट में कहा गया था कि रुबियो को क्यूबा का राष्ट्रपति बनाया जाए. इस पर ट्रंप ने लिखा, 'मुझे यह विचार सुनने में अच्छा लग रहा है'.
क्यूबा के भी बनेंगे राष्ट्रपति?
पिछले कुछ हफ्तों से क्यूबा को लेकर ट्रंप जिस तरह के विचार का प्रवाह कर रहे हैं. उसके बाद क्यूबा की सत्ता को लेकर भी आशंकाएं आकार ले रही है. जब ट्रंप किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था को रौंद रहे हैं. उसके राष्ट्रपति का किडनैप करवा रहे हैं दूसरे देश को धमकी दे रहे हैं. लोग ये भी पूछ रहे हैं कि क्या ट्रंप अपने तमाम कैबिनेट मंत्रियों को एक-एक देश चलाने के लिए गिफ्ट करेंगे? क्या उनका कोई मंत्री क्यूबा चलाएगा? क्या कोई मंत्री कोलंबिया चलायेगा? क्या ट्रंप के किसी मंत्री के पास ग्रीनलैंड की सत्ता होगी? या फिर खुद ट्रंप खुद इतने सारे देशों के अकेले कार्यकारी राष्ट्रपति होंगे? ये सवाल सुनने में बड़ा अजीब लग रहा होगा. लेकिन ट्रंप का जो व्यक्तित्व है वो जो अजीब-अजीब फैसले कर रहे हैं. उसमें कुछ भी संभव है. दूसरे देश का स्वयंभू कार्यकारी राष्ट्रपति बनकर अब तीसरे देश पर नजर गड़ाने वाले ट्रंप ने कोई पहली बार ऐसे अप्रत्याशित फैसले नहीं किए हैं.
वैश्विक सरपंच
ये वही ट्रंप हैं जो पहली बार राष्ट्रपति बने तो अमेरिका के जानी दुश्मन किम जोंग उन से मिलने पहुंच गए. 2025 में यूनिवर्सल टैरिफ्स लगाए, ट्रेड सिस्टम उलट दिया. वैश्विक सरपंच बनकर ताबड़तोड़ शांति समझौता करवाने का दावा कर रहे हैं. डॉनल्ड ट्रंप वही हैं जिन्हें ट्विटर ने बैन किया तो अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बना दिया. डॉनल्ड ट्रंप वही हैं जिन्होंने खुलकर नोबेल पुरस्कार मांगा, नहीं मिला तो अब दूसरों से भी उसका सौदा करने के लिए तैयार हैं. ये ट्रंप हैं, आत्मुग्ध-आत्मकेंद्रित ट्रंप कुछ भी कर सकते हैं और कर भी रहे हैं. ऐसा लग रहा है जैसे एक किताब छपेगी. उसमें ट्रंप की आत्ममुग्धता की उदाहरण समेत व्याख्या होगी, हो सकता है कि उसके लेखक भी स्यवंभ ट्रंप हों. क्योंकि इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराने के लिए ट्रंप कुछ भी कर सकते हैं और कर भी रहे हैं.

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