चीन में रेहड़ी लगाकर बेच रहे चांदी, दुनिया को खोजे नहीं मिल रही, समझें माजरा

1 hour ago

नई दिल्‍ली. चांदी का नाम लेते ही भारतीय ग्राहकों की आंखों में चमक आ जाती है, लेकिन आजकल चांदी की चमक ने हमारी आंखों को चकाचौंध कर रखा है. 3 लाख के आंकड़े की तरफ बढ़ रही चांदी धीरे-धीरे छोटे ग्राहकों से दूर होती जा रही है. लेकिन, दूसरी तरफ पड़ोसी चीन में चांदी ऐसे बेची जा रही मानों सब्‍जी मंडी लगी हो. चीन के सबसे बड़े ज्‍वैलरी बाजार में सड़क किनारे रेहड़ी लगाकर लोग चांदी बेच रहे हैं. इसकी तस्‍वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही दुनियाभर से रिएक्‍शन आने शुरू हो गए. आखिर यह पूरा माजरा क्‍या है और चीन में चांदी की चकाचौंध इतनी ज्‍यादा कैसे फैली हुई है.

सोशल मीडिया पर यह तस्‍वीरें चीन के सबसे बडे़ ज्‍वैलरी मार्केट शुइबेई से पोस्‍ट की गई हैं. ट्विटर पर पोस्‍ट किए गए इस वीडियो में दिख रहा है कि बाजार में जमीन पर लोग 15 किलोग्राम वजनी चांदी के बड़े स्‍लैब खुले में बेच रहे हैं. यह चीन का सबसे बड़ा संगठित बाजार है, जहां खुदरा बाजार नहीं लगता बल्कि रोजाना टनों के हिसाब से चांदी की खरीद-बिक्री की जाती है. दुनियाभर में चांदी की कीमतें बढ़ रही हैं, लिहाजा चीन में भी जमकर चांदी की खरीदारी कर रहे हैं. माहौल ऐसा बन जा रहा जैसे कि सब्‍जी बाजार हो और लोग रेहड़ी-पटरी की तरह चांदी की खरीदारी करते दिख रहे हैं.

चाँदी ले लो! चाँदी ले लो!

चीन के सबसे बड़े गोल्ड और ज्वेलरी हब, शुइबेई (水贝) शेन्ज़ेन लुओहु डिस्ट्रिक्ट में बिक रहे 15 kg SGE ‘सिल्वर स्लैब’ की एक झलक।

खास है चीन में बिक रही चांदी
चीन के इस ज्‍वैलरी बाजार में बिक रही चांदी कोई आम चांदी नहीं, बल्कि 15 किलोग्राम वजनी शंघाई गोल्‍ड एक्‍सचेंज के स्‍टैंडर्ड वाली चांदी है, जिसे ग्‍लोबल ट्रेड पैमाने पर मापा जा चुका है. यह स्‍टैंडर्ड शुद्धता और भरोसे का प्रतीक है. चीन का यह बाजार लुआहू जिले में स्थित है, जहां देशभरके ज्‍वैलरी विनिर्माता, होलसेल ट्रेडर्स और निवेशक भी यहां बड़ी मात्रा में चांदी-सोना खरीदने आते हैं. ऐसी एक ट्रेडिंग के दौरान 15 किलो वजन वाले स्‍लैब को किसी उपभोक्‍ता ने कैमरे में कैद किया है. यह चांदी 99.9 फीसदी शुद्धता वाली होती है, जिसका मतलब है कि इसे ग्‍लोबल स्‍टैंडर्ड के हिसाब से तैयार किया जाता है.

चीन से क्‍यों परेशान है दुनिया
चीन ने नए साल की शुरुआत यानी 1 जनवरी, 2026 से निर्यात पर सख्‍त पाबंदी लागू कर दी है. इसका मतलब है कि चीन से बाहर किसी व्‍यापारी को अपनी चांदी भेजनी है तो उसे पहले सरकार से अनुमति लेनी पड़ेगी. चीन के इस फैसले से दुनिया परेशान इसलिए है, क्‍योंकि आज ग्‍लोबल सिल्‍वर ट्रेड का करीब 70 फीसदी हिस्‍सा चीन के कंट्रोल में है. चीन फिलहाल चांदी का सबसे बड़ा उत्‍पादक देश है और जिस तरह दुनियाभर में इलेक्ट्रिक वाहन, एआई और रिन्‍यूवेबल एनर्जी पर जोर दिया जा रहा है, चांदी की डिमांड आने वाले समय में और भी ज्‍यादा बढ़ने वाली है.

चीन में लोग क्‍यों खरीद रहे चांदी
चीन सरकार ने दुनिया को निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही अपने नागरिकों को सोने-चांदी और तांबे की खरीद के लिए प्रोत्‍साहित करना शुरू कर दिया है. आलम ये है कि चीन में लोग अपने घर और प्रॉपर्टी बेचकर, लोन लेकर भी चांदी खरीद रहे हैं. इससे बाजार में चांदी खरीदारी को लेकर एक जुनून दिखना शुरू हो गया है. इसी जुनून का परिणाम है, सड़क किनारे जमीन पर बेची जा रही चांदी. चीन में आम लोगों के बीच चांदी की डिमांड इतनी ज्‍यादा बढ़ गई है कि वहां के सिल्‍वर-गोल्‍ड बाजार में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. चीन सरकार का कहना है कि उसने यह प्रतिबंध पर्यावरण और संसाधनों के संरक्षण के लिए लगाया है, लेकिन असल बात यही है कि इस प्रतिबंध के जरिये चीन अपनी सप्‍लाई चेन को मजबूत बना रहा है.

चीन में कितना चांदी का उत्‍पादन
यह बात तो आपको पता ही है कि चीन दुनिया का सबसे बड़ा चांदी का उत्‍पादक देश है. यहां रिफाइन की गई चांदी का उत्‍पादन दुनिया का 72 फीसदी होता है. साल 2025 में चीन ने अपनी खदानों से करीब 3,600 टन चांदी का उत्‍पादन किया है, जो पूरी दुनिया में किए गए कुल उत्‍पादन का करीब 14 फीसदी रहा है. चीन में भले ही उसकी खदानों से कम चांदी निकलती है, लेकिन वह बाहर से चांदी मंगाकर रिफाइन करता है. पिछले 11 महीने में चीन ने करीब 4,600 टन से ज्‍यादा चांदी दुनिया में निर्यात की है, जबकि ग्‍लोबल प्रोडक्‍शन 26 हजार टन के आसपास रहा है. इस लिहाज से चीन का ग्‍लोबल एक्‍सपोर्ट में बड़ा हिस्‍सा रहा है.

भारत में कितनी चांदी
भारत में चांदी का उपयोग तो दिनोंरात बढ़ता जा रहा, लेकिन यहां उत्‍पादन बहुत सीमित है. आपको जानकर हैरानी होगी कि देश में चांदी को एक तरह से बाई-प्रोडक्‍ट के रूप में निकालते हैं. खासकर यह जिंक के उत्‍पादन के दौरान बाई-प्रोडक्‍ट के रूप में पैदा होती है. साल 2025 में देश का कुल चांदी का उत्‍पादन करीब 800 टन रहा है. इसके मुकाबले देश की डिमांड हर साल 7 हजार टन के आसपास है. जाहिर है कि यहां डिमांड के मुकाबले प्रोडक्‍शन महज 10 से 15 फीसदी का ही है. बाकी चांदी उसे आयात ही करनी पड़ती है, जिसमें चीन की हिस्‍सेदारी सबसे ज्‍यादा है.

भारत कहां से मंगाता है सबसे ज्‍यादा चांदी
जैसा कि आपको पता है कि भारत चांदी का सबसे बड़ा उपभोक्‍ता देश बन गया है और उसे कुल जरूरत का 90 फीसदी तक बाहर से मंगाना पड़ता है. इसमें 40 फीसदी तक चांदी तो सिर्फ चीन से ही मंगानी पड़ती है. इसके बाद नंबर आता है संयुक्‍त अरब अमीरात का, जो चांदी निर्यात में दूसरे नंबर पर है. यूके भी भारत को बड़ी मात्रा में हर साल चांदी का निर्यात करता है. इसके अलावा मैक्सिको, हांगकांग, इंडोनेशिया, इटली, पेरू, अर्जेंटीना और चिली जैसे देशों से भी भारत को चांदी का आयात करना पड़ता है.

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