Last Updated:January 31, 2026, 21:49 IST
हरियाणा सरकार की चिराग योजना गरीब बच्चों के लिए लागू हुई थी, हाल ही में इसकी लिमिट को बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दिया गया है लेकिन हरियाणा अभिभावक एकता मंच और ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन ने इसे गरीब छात्रों के साथ छलावा बताया है. आइए जानते हैं कि अभिभावक इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?
हरियाणा में गरीब बच्चों को मान्यता प्राप्त स्कूलों में पढ़ाने के लिए सरकार की चिराग योजना लागू है. Chirag Yojana limit latest news: हरियाणा सरकार ने गरीब बच्चों के लिए चिराग योजना लागू की है. हाल ही में इसकी लिमिट को भी बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दिया है. इस योजना के तहत पात्र छात्रों को मान्यता प्राप्त स्कूलों में शिक्षा दी जाएगी और उनका खर्च राज्य सरकार वहन करेगी. सरकार की ओर से बताया गया कि इससे करीब 32 लाख परिवारों को फायदा होगा, हालांकि पेरेंट्स अब इस योजना का विरोध कर रहे हैं. हरियाणा अभिभावक एकता मंच और ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन से जुड़े अभिभावक इसे गरीब बच्चों के साथ छलावा बता रहे हैं.
बता दें कि चिराग योजना के तहत सत्र 2026–27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है. मौलिक शिक्षा निदेशालय ने 28 जनवरी को सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर दिए हैं. इस योजना के अंतर्गत पात्र विद्यार्थियों को मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा दी जानी है जिसकी पूरी फीस राज्य सरकार द्वारा वहन करेगी. इस योजना में EWS आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के जो विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं उनको निजी स्कूलों में पढ़ने का अवसर देना है.
हालांकि हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने चिराग योजना को भ्रामक और गरीब बच्चों के साथ छलावे का आरोप लगाया है. मंच के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट ओपी शर्मा व प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा ने कहा है कि हरियाणा सरकार आरटीई कानून को कमजोर करने व उसे ठीक से लागू न करने की नीयत से ही चिराग योजना को लाई है.
सबसे बड़ी बात यह है कि इस चिराग योजना को न तो प्राइवेट स्कूल खासकर सीबीएसई वाले और न सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे स्वीकार कर रहे हैं. इसका सबूत है कि फरीदाबाद के किसी भी सीबीएसई के स्कूल का इस योजना से नहीं जुड़ना. हरियाणा बोर्ड के सिर्फ चार स्कूल एनबीएम मोहना,हैप्पी पब्लिक स्कूल सेक्टर 51, इकरा स्कूल बढ़खल, गांधी मेमोरियल स्कूल ही इस योजना से जुडे हैं.
मंच की ओर से कहा गया कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी भी इस योजना में कोई रुचि नहीं लेते हैं. वे चाहते हैं कि हरियाणा सरकार शिक्षा अधिकार कानून आरटीई के तहत प्रत्येक प्राइवेट स्कूल में रिजर्व की गई 25 प्रतिशत सीटों पर उनका दाखिला कराए लेकिन सरकार उनकी चाहत को पूरा नहीं कर रही है. इतना ही नहीं जो प्राइवेट स्कूल आरटीई कानून को स्वीकार नहीं कर रहे हैं और इसके तहत दाखिला देने से मना करते हैं, सरकार उनके खिलाफ भी कोई उचित कार्रवाई नहीं करती है. इसका सबसे बड़ा सबूत है कि शिक्षा सत्र 2025- 26 में फरीदाबाद के सीबीएसई के 28 स्कूलों ने शिक्षा विभाग द्वारा चिन्हित किए गए बच्चों को आरटीआई के तहत दाखिला देने से मना कर दिया.
इसकी शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी ने दो बार शिक्षा निदेशक पंचकूला से की और यह भी रिकमंड किया कि इन स्कूलों की एनओसी वापिस लेकर इनकी मान्यता रदृ की जाये. शिकायत किए हुए 6 महीने हो गये हैं. शिक्षा निदेशक ने दोषी स्कूलों के खिलाफ कोई भी उचित कार्रवाई नहीं की है. कार्रवाई क्यों नहीं की गई यह जानने के लिये मंच के राष्ट्रीय सलाहकार व सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट अशोक अग्रवाल ने मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव को एक पत्र व दो लीगल नोटिस भेज कर जानकारी मांगी लेकिन कोई भी जानकारी नहीं दी गई है.अब अशोक अग्रवाल पंजाब एन्ड हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं.
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प्रिया गौतमSenior Correspondent
अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्...और पढ़ें
Location :
Noida,Gautam Buddha Nagar,Uttar Pradesh
First Published :
January 31, 2026, 21:49 IST

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