'चिकन नेक, चीन और 64 साल पुराना मंसूबा, ड्रैगन का सारथी बनेंगे यूनुस', क्या भारत की बढ़ेगी परेशानी?

2 hours ago

Chicken Neck Siliguri Corridor: अमेरिका में एक रिपोर्ट पेश की गई है. इससे जो बातें सामने आई हैं, वो भारत की चिंताओं को बढ़ाने वाली हैं. रक्षा जगत में आधिकारिक तौर पर चाइना मिलिट्री पावर रिपोर्ट (CMPR) के नाम से जानी जाने वाली इस रिपोर्ट को कानूनी प्रावधानों के तहत अमेरिकी रक्षा मंत्री ने अमेरिकी कांग्रेस में पेश किया. ‘कांग्रेस को वार्षिक रिपोर्ट: पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना से जुड़े सैन्य और सुरक्षा विकास, 2025’ शीर्षक वाली यह रिपोर्ट दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में जारी की गई. रिपोर्ट के ताजा संस्करण में दावा किया गया है कि चीन वर्ष 2049 तक पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को एक विश्व-स्तरीय सेना बनाने की योजना पर काम कर रहा है और इस दिशा में वह पहले ही उल्लेखनीय प्रगति कर चुका है. इसके साथ ही चीन की पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी (PLA) बांग्‍लादेश में बेस बनाना चाहती है. बता दें कि बांग्‍लादेश की सीमा भारत के कई राज्‍यों से लगती है. इनमें चिकन नेक यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी शामिल है. मोहम्‍मद यूनुस अपनी चीन यात्रा के दौरान 7 सिस्‍टर्स और अंग्रेजों के जमाने के लालमोनिरहाट एयरबोस की चर्चा की थी. लालमोनिरहाट भार‍त के चिकन नेक से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. ऐसे में यदि चीन यहां आर्मी बेस बनाता है तो भारत के लिए यह न केवल चिंता की बात है, बल्कि बड़ा खतरा भी है.

‘द वीक’ ने अमेरिकी रिपोर्ट का हवाला देते हुए चीन के मंसूबों के बारे में बताया है. PLA का बांग्‍लादेश में आर्मी बेस बनाने का मंसूबा बेहद खतरनाक है. मोहम्‍मद यूनुस की अगुआई वाली बांग्‍लादेश सरकार पहले ही भारतीय सीमा से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लालमोनिरहाट एयसर बेस को डेवलप करने की बात कह चुकी है. इसे चीन को सौंपने की भी चर्चाएं हैं. इन सब डेवलपमेंट के बीच अमेरिकी कांग्रेसनल रिपोर्ट सामने आई है. अब यदि चीन की तरफ से लालमोनिरहाट में किसी भी तरह का सैन्‍य बेस बनाया जाता है तो वह भारत के लिए कतई बेहतर नहीं हो सकता है. कई बांग्‍लादेशी नेता हाल के दिनों में चिकन नेक को शेष भारत से अलग करने की बात कह चुके हैं. इस लिहाज से यदि मोहम्‍मद यूनुस इस मामले में बीजिंग का सारथी बनते हैं तो यह भारत के लिए गंभीर चुनौती होगी. बता दें कि पूर्वोत्‍तर के 8 राज्‍यों को मेनलैंड इंडिया से जोड़ने का एकमात्र जरिया चिकन नेक है. 22 किलोमीटर चौड़ी इस कॉरिडोर पर यदि किसी भी तरह का व्‍यवधान पैदा होता है तो इसका असर लाखों भारतीयों पर पड़ेगा. साथ ही भारत की सामरिक स्थिति पर प्रभाव पड़ना भी स्‍वाभाविक है.

Chicken Neck Siliguri Corridor: एक रिपोर्ट की मानें तो चीन बांग्‍लादेश में सैन्‍य बेस बनाना चाहता है. चिकन नेक से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित लालमोनिरहाट पर पहले से ही बीजिंग पर नजर है. (फाइल फोटो/PTI)

चीन का 64 साल पुराना मंसूबा क्‍या है?

भारत और चीन के बीच साल 1962 में युद्ध लड़ा जा चुका है. तकरीबन साढ़े छह दशक पहले हुए इस वॉर के दौरान भी चिकन नेक की चर्चा ने जोर पकड़ी थी. चीन की सेना इस कॉरिडोर को भारत से तोड़ने की साजिश रची थी, पर ड्रैगन का यह मंसूबा अधूरा रह गया था. 1962 के भारत-चीन युद्ध में बीजिंग ने चिकन नेक को सीधे निशाना नहीं बनाया, बल्कि अरुणाचल प्रदेश (NEFA) और अक्साई चिन में भारत पर बड़े हमले किए, जहां चीनी सेना संख्याबल, आधुनिक हथियारों और बेहतर लॉजिस्टिक्स के कारण सफल रही. इससे भारत को भारी नुकसान हुआ और चीनी सेना असम के करीब तक पहुंच गई थी. हालांकि, बाद में चीन ने एकतरफा युद्धविराम कर पीछे हटने की घोषणा की, जिससे चिकन नेक सुरक्षित रहा, जो भारत के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण था. अब उस मंसूबे को चीन पूरा करने की कोशिश कर सकता है. बांग्‍लादेश की मौजूदा यूनुस सरकार इसमें उसकी मदद कर सकता है. यदि ऐसा होता है तो पूर्वी सीमा पर भारत के लिए एक और सिरदर्द पैदा हो जाएगा. इन सबके बीच लालमोनिरहाट का दशकों पुराना एयरबेस सुर्खियों में आ गया है.

‘चिकन नेक’ क्या है और यह भारत में कहां स्थित है?
‘चिकन नेक’ भारत का एक बेहद संकरा भू-भाग है, जिसे आधिकारिक तौर पर सिलीगुड़ी कॉरिडोर कहा जाता है. यह पश्चिम बंगाल में स्थित लगभग 20-25 किलोमीटर चौड़ा पट्टीनुमा इलाका है, जो भारत के मुख्य भू-भाग को उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोड़ता है. इसके एक ओर नेपाल और दूसरी ओर बांग्लादेश है, जबकि पास ही भूटान और चीन की सीमाएं भी आती हैं.

रणनीतिक दृष्टि से चिकन नेक भारत के लिए इतना अहम क्यों है?
यह कॉरिडोर भारत के आठ उत्तर-पूर्वी राज्यों (असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, त्रिपुरा, नागालैंड और सिक्किम) का मुख्य संपर्क मार्ग है. अगर किसी संकट की स्थिति में यह रास्ता बाधित हो जाए, तो पूरे उत्तर-पूर्व का भारत से संपर्क कट सकता है. इसलिए सैन्य और सुरक्षा दृष्टि से इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है.

चीन और क्षेत्रीय भू-राजनीति के संदर्भ में चिकन नेक की क्या भूमिका है?
चिकन नेक के पास ही भारत-चीन-भूटान का ट्राई-जंक्शन क्षेत्र डोकलाम स्थित है, जहां 2017 में भारत और चीन के बीच तनाव देखा गया था. चीन की बढ़ती गतिविधियां और बुनियादी ढांचे का विस्तार इस क्षेत्र को और संवेदनशील बनाता है. ऐसे में चिकन नेक भारत की सामरिक सुरक्षा की पहली पंक्ति की तरह काम करता है.

आर्थिक और परिवहन के लिहाज से चिकन नेक कितना जरूरी है?
उत्तर-पूर्वी राज्यों तक सड़क, रेल, तेल पाइपलाइन, बिजली और संचार नेटवर्क इसी कॉरिडोर से होकर गुजरते हैं. इसके जरिए न केवल आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति होती है, बल्कि व्यापार और विकास की गति भी बनी रहती है. अगर यह मार्ग बाधित हो जाए, तो पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है.

भारत सरकार चिकन नेक की सुरक्षा और मजबूती के लिए क्या कदम उठा रही है?
केंद्र सरकार इस क्षेत्र में सड़क, रेल और वैकल्पिक संपर्क मार्गों को मजबूत कर रही है. सेना और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाई गई है, साथ ही पूर्वोत्तर को जोड़ने के लिए बांग्लादेश के जरिए वैकल्पिक ट्रांजिट रूट्स पर भी काम किया जा रहा है. इन प्रयासों का उद्देश्य चिकन नेक पर निर्भरता को सुरक्षित और संतुलित बनाना है.

अमेरिकी रिपोर्ट भारत के लिए अहम क्‍यों?

अमेरिकी कांग्रेसनल रिपोर्ट के अनुसार, चीन दुनिया भर में ऐसे ठिकाने (साइट्स) बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि एक ग्‍लोबल लॉजिस्टिक्स और सैन्य ठिकानों का नेटवर्क खड़ा किया जा सके. इसका मकसद यह है कि पीएलए दूर-दराज के इलाकों में भी अपनी सैन्य ताकत दिखा सके और लंबे समय तक उसे बनाए रख सके. चीन के नेता शायद इस बात को स्वीकार करते हैं कि विदेशों में पीएलए की सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग स्तर की पहुंच जरूरी होगी. इसमें ऐसे स्थायी सैन्य अड्डे शामिल हो सकते हैं जहां चीनी सैनिक तैनात हों, मेजबान देश के साथ साझा की गई सुविधाएं हों, व्यावसायिक ढांचे के साथ बने केवल पीएलए के लॉजिस्टिक्स केंद्र हों या फिर जरूरत के समय विदेशों में मौजूद व्यावसायिक सुविधाओं का अस्थायी इस्तेमाल हो. इसे देखते हुए चीन ने अन्‍य देशों के साथ ही बांग्‍लादेश और पाकिस्‍तान में सैन्य ठिकाने बनाने की संभावनाओं पर विचार किया है. पीएलए की सबसे ज्यादा रुचि मलक्का जलडमरूमध्य, होरमुज़ जलडमरूमध्य और अफ्रीका व मध्य पूर्व के अन्य इलाकों में समुद्री संचार मार्गों (सी लाइन ऑफ कम्युनिकेशन) के पास सैन्य पहुंच बनाने में है. मलक्‍का स्‍ट्रेट भारत के लिए काफी अहम है.

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