आज प्रियंका गांधी का जन्मदिन है. वह 12 जनवरी 2026 को 54 साल की हो जाएंगी. नेहरू-गांधी परिवार में उनकी दादी से लेकर उन तक हर किसी से लव मैरिज की लेकिन हर किसी की लव स्टोरी अलग रही. कैसे प्रियंका की प्रेम कहानी अपनी दादी और मां से अलग रही. ये भी जानेंगे कि तीनों प्रेम कहानियों में किसने पहले प्रोपोज किया.
प्रियंका गांधी वाड्रा की लव स्टोरी तीन पीढ़ियों इंदिरा गांधी, सोनिया और खुद की प्रेम-कथाओं में सबसे आधुनिक, निजी और कम राजनीतिक मानी जाती है. ये बदलते समय में स्त्री की स्थिति और भूमिका को भी दिखाती है.
तब प्रेम विवाह बहुत दुर्लभ थे
इंदिरा गांधी के दौर में महिलाएं प्रेम विवाह नहीं किया करती थीं. ये बहुत दुर्लभ था. दूसरे धर्म में विवाह के बारे में सोचा ही नहीं जा सकता था लेकिन इंदिरा ने इन सारी सीमाओं को तोड़ा. उन्होंने ना केवल प्रेम विवाह किया. इस पर उनके परिवार में विरोध भी हुआ लेकिन फिर पिता जवाहरलाल नेहरू को राजी होना पड़ा. हालांकि ये फिर परिवार की मर्जी से पारंपरिक तौर तरीकों से हुआ बल्कि उनका ये विवाह दूसरे धर्म के फिरोज गांधी से हुआ.
क्या हुआ था इंदिरा की बुआ के साथ
इस दौर से पहले ही इंदिरा गांधी की बुआ विजयालक्ष्मी एक आकर्षक और बेहद प्रबुद्ध मुस्लिम युवक सैयद हुसैन के प्यार में पड़ गईं थीं, जो इलाहाबाद में मोतीलाल नेहरू द्वारा निकाले गए पैट्रियाट के संपादक थे. इसका उनके पिता ने ना केवल विरोध किया बल्कि सैयद को अखबार छोड़कर जाना पड़ा. बाद में उनका विवाह महाराष्ट्रीयन सारस्वत ब्राह्मण रंजीत सीताराम पंडित से हुआ, जो काठियावाड़ के सफल बैरिस्टर और विद्वान थे.
आजादी से पहले के बरसों में भारत की यही स्थिति थी. महात्मा गांधी ने खुद अपने बीच के बेटे मणिलाल गांधी को साउथ अफ्रीका में एक मुस्लिम लड़की से प्यार हो गया था लेकिन गांधीजी तब इसके सख्त खिलाफ थे, जिससे ये रिश्ता टूट गया.
इंदिरा का प्रेम विवाह विरोध के बीच हुआ
इंदिरा गांधी का जीवन राजनीतिक संस्कारों में ढला था. फिरोज़ गांधी से उनका रिश्ता प्रेम का था, लेकिन जाति-धर्म का फर्क था, लिहाजा दोनों ने इंतजार भी किया, परिवारों को भी मनाया, विरोध भी झेला. नेहरू परिवार इस शादी को लेकर सार्वजनिक दबाव में था. हालांकि ये प्रेम विवाह हुआ. कुछ सालों तक चला और फिर टूटने जैसी स्थिति में रहा.
सोनिया की लव मैरिज बदलते देश की भी कहानी
सोनिया गांधी का प्यार 1960-70 के दशक का प्यार था. जो बदलते भारत की कहानी भी कह रहा था. सोनिया माइनो और राजीव गांधी की कैंब्रिज में मुलाक़ात एक सामान्य प्रेम कहानी थी. दोनों वहां सामान्य जीवन जी रहे थे. सामान्य लोगों की तरह रह रहे थे. उसमें कहीं भी राजनीति और इसकी छाया नहीं थी. इंदिरा गांधी तब देश की प्रधानमंत्री थीं. वह जब सोनिया गांधी से मिलीं तो उन्हें मालूम था कि वह ईसाई धर्म की हैं. उन्हें इस रिश्ते से कोई गुरेज नहीं था बल्कि सोनिया के पेरेंट्स इस शादी को लेकर जरूर हिचक रहे थे.
सोनिया शायद पेरेंट्स को नाराज करके ये शादी की. ये शादी सफल रही. राजीव और सोनिया की शादी भारत की आम शादियों की तरह सादगी से हुई. दोनों आदर्श पति – पत्नी साबित हुए. इंदिरा हमेशा सोनिया को पसंद करती रहीं. लेकिन सोनिया और राजीव की शादी पर राजनीति की छाया जरूर पड़ी. इंदिरा की हत्या के बाद राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनना पड़ा. सोनिया नहीं चाहती थीं कि उनके पति राजनीति में आएं लेकिन ऐसा हुआ, क्योंकि संजय गांधी के असामायिक निधन के बाद इंदिरा चाहती थीं कि राजीव राजनीति में आएं. पति की वजह से ही सोनिया को मजबूरी में राजनीति में आना पड़ा.
प्रियंका के दौर में प्रेम विवाह बहुत सामान्य हो चले थे
अब आइए प्रियंका गांधी वाड्रा के प्यार के बारे में जानते हैं, जो दादी और मां से बिल्कुल अलग तरह का रहा. अलग माहौल में रहा. ये 1990 के दशक की बात है. भारत बदल चुका था. प्रेम विवाह सामान्य हो चले थे, यहां तक अंतर जातीय और अंतर धार्मिक विवाहों को भी लोग अब सामान्य नजरिए से ही देखना शुरू कर चुके थे.
प्रियंका और रॉबर्ट वाड्रा की मुलाक़ात कॉलेज के दिनों में हुई. कहीं कोई राजनीति एजेंडा नहीं था. कोई पारिवारिक हस्तक्षेप नहीं था. दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे. दोनों में प्रेम का रिश्ता विकसित हुआ. ये ना किसी किसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा था ना न सत्ता की तैयारी का. इस शादी से सोनिया गांधी को कोई इतराज नहीं था. शादी के बाद भी प्रियंका लंबे समय तक राजनीति से दूर रहीं. बच्चों और परिवार को प्राथमिकता दी.
तीनों शादियों में किसने पहल की
तीनों प्रेम कथाओं में पहल सिर्फ़ पुरुषों की नहीं थी. कम से कम एक में तो महिला ने निर्णायक क़दम उठाया. इंदिरा गांधी – फिरोज़ गांधी के समय ये जानकारी नहीं मिलती कि किसने पहले प्रोपोज किया. हालांकि ये विवरण जरूर मिलता है कि फिरोज ने ही सबसे पहले इंदिरा से प्यार करने की बात कही थी लेकिन तब उन्होंने आगे पैर नहीं बढ़ाया. बाद में ऐसा हुआ.
फिरोज़ गांधी नेहरू परिवार के क़रीबी थे. इंदिरा के प्रति खुलकर आकर्षण और समर्पण दिखाते थे. इंदिरा स्वभाव से अंतर्मुखी भावनात्मक रूप से संयमी थीं. इतिहासकारों की आम सहमति है कि प्रेम की पहल फिरोज़ की तरफ़ से ज़्यादा थी. शादी का अंतिम फ़ैसला इंदिरा ने खुद लिया, भारी विरोध के बावजूद भी.
सोनिया माइनो – राजीव गांधी में किसने पहले प्रोपोज किया होगा, ये तो काफी साफ लगता है कि कैंब्रिज में मुलाकात के बाद राजीव गांधी ने ही पहले विवाह का प्रस्ताव रखा. लेकिन भारत अकेले आकर शादी करने और अलग संस्कृति अपनाने का फैसला तो खुद सोनिया ने किया. कई जीवनीकारों जैसे रामचंद्र गुहा और कैथरीन फ्रैंक के अनुसार, राजीव ने प्रपोज़ किया. सोनिया ने पूरा जीवन बदलने वाला “काउंटर-प्रपोज़” स्वीकार किया.
प्रियंका गांधी – रॉबर्ट वाड्रा में किसने प्रपोज़ किया होगा? दोनों ने बराबरी से रिश्ता आगे बढ़ाया. सार्वजनिक रूप से किसी एक “प्रपोज़” की पुष्टि नहीं है. करीबी सूत्रों और मीडिया प्रोफाइल्स के अनुसार, प्रियंका रिश्ते में कहीं ज़्यादा स्पष्ट और निर्णायक थीं. उन्होंने शादी का समय तय किया. निजी जीवन की शर्तें तय कीं. राजनीति से दूरी चुनी. वह पहली गांधी महिला हैं, जिनके प्रेम में पहल ‘बराबरी’ या महिला की तरफ़ से ज़्यादा दिखती है.

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