Last Updated:February 02, 2026, 05:11 IST
India Iran Chabahar Project: भारत के आम बजट में ईरान के चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट के लिए को एक रुपया भी आवंटित नहीं किया गया. इसके बाद कई लोग सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन सामरिक मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी ने इसके पीछे की जो वजह बताई, वह वाकई हैरान करने वाली है. दरअसल, पीएम मोदी ने चाबहार के लिए फंड ना देकर एक तीर से दो शिकार किया है.
भारत ने ईरान के चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट के लिए कोई भी फंड नहीं दिया है. (फाइल फोटो)नई दिल्ली. केंद्रीय बजट 2026 में भारत सरकार ने ईरान के चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट के लिए कोई भी फंड आवंटित नहीं किया है. इस फैसले ने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है. हालांकि, जियोस्ट्रैटेजिस्ट ब्रह्मा चेलानी ने इसे भारत की ‘रणनीतिक वापसी’ (Strategic Withdrawal) मानने से इनकार किया है. उनका कहना है कि यह एक ‘रणनीतिक विराम’ (Tactical Pause) है. अमेरिका ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं और भारत को वहां से कामकाज समेटने के लिए 26 अप्रैल तक का अल्टीमेटम दिया है. चेलानी ने चेतावनी दी है कि अगर भारत पूरी तरह पीछे हटता है, तो चीन उस खाली जगह को भरने के लिए तैयार बैठा है.
चीन की एंट्री का बड़ा खतरा
ब्रह्मा चेलानी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है. चाबहार पोर्ट भारत के लिए पाकिस्तान को बाइपास कर अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता है. अगर भारत यहां से निकलता है, तो चीन के लिए वैक्यूम बन जाएगा. चीन इस रणनीतिक जगह पर कब्जा कर सकता है. इसलिए बजट में पैसा न देना शायद अमेरिका की डेडलाइन को देखते हुए लिया गया फैसला है. इसे प्रोजेक्ट बंद करना नहीं समझना चाहिए.
तकनीकी कारण: पैसा पहले ही दिया जा चुका
चेलानी ने फंड न देने के पीछे एक तकनीकी वजह भी बताई है. भारत पहले ही चाबहार के शाहिद बेहिश्ती टर्मिनल के विकास के लिए 120 मिलियन डॉलर दे चुका है. यह पैसा पहले से ही ‘सिस्टम’ में है. इसलिए, इस स्टेज पर नए बजटीय आवंटन की तकनीकी रूप से जरूरत नहीं थी. सरकार का यह कदम अमेरिका को शांत रखने की एक चाल हो सकती है.
अमेरिका का दबाव और 26 अप्रैल की डेडलाइन
अमेरिका ने ईरान पर शिकंजा कस दिया है. पिछले साल सितंबर में ट्रम्प प्रशासन ने भारत को मिली छूट खत्म कर दी थी. अब भारत के पास 26 अप्रैल 2026 तक का समय है. अगर भारत ने ऑपरेशन बंद नहीं किए तो उस पर प्रतिबंध लग सकते हैं. अमेरिका ने ईरान के साथ व्यापार करने वालों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ की धमकी भी दी है. भारत अभी अमेरिका के साथ ‘बीच का रास्ता’ (Middle Path) खोजने में लगा है.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h...और पढ़ें
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New Delhi,Delhi
First Published :
February 02, 2026, 05:11 IST

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