घना कोहरा, हर तरफ नाकाबंदी, भागते जवान, भारत-पाक बॉर्डर पर क्‍या हुआ?

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Last Updated:January 02, 2026, 15:02 IST

NSG India-Pakistan Border: सर्दियों के मौसम में पाकिस्‍तान से लगती सीमा पर हालात कठिन हो जाते हैं. बर्फबारी की वजह से सुरक्षाबलों का मूवमेंट काफी कम हो जाता है, पर इस बार की प्‍लानिंग कुछ अलग है. आर्मी स्‍थानीय पुलिस और अन्‍य सशस्‍त्र बलों के जवानों के साथ मिलकर लगातार सघन अभियान चला रही है. इस मौसम में पाकिस्‍तान समर्थित आतंकवादियों की आमद बढ़ जाती है, ऐसे में उनको मुंहतोड़ जवाब देने की पूरी तैयारी चल रही है.

घना कोहरा, हर तरफ नाकाबंदी, भागते जवान, भारत-पाक बॉर्डर पर क्‍या हुआ?NSG India-Pakistan Border: कठुआ से लगते पाकिस्‍तान सीमा पर एनएसजी के जवानों ने मॉक ड्रिल किया है. (फाइल फोटो)

NSG India-Pakistan Border: इंटरनेशनल बॉर्डर से सटे जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में संभावित फिदायीन हमले के इनपुट के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क नजर आईं. घने कोहरे और सीमा पार से घुसपैठ की आशंकाओं के बीच जम्मू-कश्मीर पुलिस और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) ने संयुक्त रूप से एक व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया. इस अभ्यास का उद्देश्य किसी भी आतंकी हमले, विशेषकर फिदायीन हमले की स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों, प्रशासन और राहत टीमों की तैयारी, आपसी तालमेल और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को परखना था. सर्दियों के मौसम में सीमा पार से आने वाले आतंकवादी कठिन परिस्थितियों का फायदा उठाने की फिराक में रहते हैं.

मॉक ड्रिल की शुरुआत होते ही पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया. जैसे ही संभावित हमले का संकेत मिला( सुरक्षाबल तुरंत हरकत में आ गए. कुछ ही मिनटों में संवेदनशील क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया गया. प्रवेश और निकास के सभी मार्गों पर कड़ी नाकेबंदी की गई और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जवानों को ऊंचे और रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया गया. आम नागरिकों से शांति बनाए रखने, अफवाहों से दूर रहने और सुरक्षाबलों के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई. ड्रिल के दौरान यह व्यावहारिक रूप से दिखाया गया कि फिदायीन हमले की आशंका होते ही सुरक्षा एजेंसियां किस तरह चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई करती हैं. सबसे पहले क्षेत्र को सुरक्षित कर बाहरी खतरे को रोका गया, इसके बाद NSG और पुलिस के कमांडो दस्तों ने संयुक्त रूप से इमारत-दर-इमारत तलाशी अभियान शुरू किया. हर कमरे, हर गली और हर संभावित रास्ते की बारीकी से जांच की गई, ताकि किसी भी छिपे खतरे को समय रहते निष्क्रिय किया जा सके.

बॉम्‍ब स्‍क्‍वॉयड की टीम भी मुस्‍तैद

इस दौरान बम निरोधक दस्ता (BDS) भी मौके पर पहुंचा. अत्याधुनिक उपकरणों और तकनीकी संसाधनों की मदद से संदिग्ध वस्तुओं की गहन जांच की गई. ड्रिल में यह भी दर्शाया गया कि विस्फोटक मिलने या विस्फोट की आशंका की स्थिति में किस तरह सुरक्षित तरीके से उसे निष्क्रिय किया जाता है. हर कदम पर अत्यधिक सावधानी बरती गई, जिससे यह संदेश गया कि वास्तविक हालात में भी किसी भी तरह की चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी. मॉक ड्रिल का एक अहम हिस्सा घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने और उन्हें प्राथमिक उपचार देने का अभ्यास भी रहा. एम्बुलेंस, मेडिकल स्टाफ और राहत टीमों ने समन्वय के साथ काम किया. घायलों को तत्काल प्राथमिक चिकित्सा देने, उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और अस्पताल तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को रिहर्सल के रूप में अंजाम दिया गया. इससे यह परखा गया कि आपात स्थिति में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम रखने के लिए सिस्टम कितना प्रभावी है.

कड़ी मॉनिटरिंग

पूरे ऑपरेशन की निगरानी प्रशासनिक अधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा कंट्रोल रूम से की गई. वायरलेस, मोबाइल और अन्य संचार माध्यमों के जरिए पल-पल की जानकारी साझा की जाती रही. इस अभ्यास के जरिए यह भी स्पष्ट हुआ कि किसी भी आतंकी या आपदा जैसी स्थिति में मजबूत और निर्बाध कम्युनिकेशन सिस्टम कितना अहम होता है. गौरतलब है कि कठुआ जिला पहले भी आतंकियों के निशाने पर रह चुका है. करीब 15 साल पहले जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने राजबाग थाने पर फिदायीन हमला किया था, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया था. ऐसे में मौजूदा इनपुट के बाद सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की लापरवाही बरतने के मूड में नहीं हैं. सीमा से सटे इलाकों में अतिरिक्त निगरानी, गश्त और खुफिया तंत्र को भी मजबूत किया गया है.

सुरक्षाबलों के इरादे स्‍पष्‍ट

मॉक ड्रिल के जरिए सुरक्षा एजेंसियों ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि फिदायीन हमले जैसी गंभीर परिस्थितियों में सिर्फ हथियार ही नहीं, बल्कि संयम, अनुशासन, प्रशिक्षण और आपसी तालमेल ही सबसे बड़ा हथियार होता है. अधिकारियों ने यह भी रेखांकित किया कि आम नागरिकों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है. अफवाहों से बचना, सतर्क रहना और प्रशासन पर भरोसा बनाए रखना सामूहिक सुरक्षा के लिए जरूरी है. अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के अभ्यास समय-समय पर इसलिए किए जाते हैं, ताकि सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा सके और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित व प्रभावी कार्रवाई कर जान-माल के नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें

Location :

Jammu,Jammu and Kashmir

First Published :

January 02, 2026, 15:02 IST

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