गैंगस्टर-सफेदपोश का खूनी ट्रायंगल: ED रेड में खुला इंदरजीत के 60 करोड़ का पाप!

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Last Updated:January 01, 2026, 17:47 IST

गैंगस्टर इंदरजीत सिंह, सफेदपोश कारोबारियों और रियल एस्टेट का खूनी ट्रायंगल अब ईडी की गिरफ्त में है. दिल्ली के पॉश इलाकों में तीसरे दिन भी जारी छापेमारी में 60 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति और नकदी बरामद हुई है. जांच में खुलासा हुआ कि अपराध की कमाई को प्रॉपर्टी निवेश के जरिए सफेद किया जा रहा था. ईडी की इस बड़ी कार्रवाई ने राजधानी के रसूखदार सिंडिकेट की जड़ों को हिला कर रख दिया है.

 ED रेड में खुला इंदरजीत के 60 करोड़ का पाप!ईडी मामले की जांच कर रही है.

नई दिल्ली: दिल्ली के सबसे महंगे और वीआईपी इलाकों में शुमार सर्वप्रिय विहार और वेस्टएंड ग्रीन फार्म्स इस समय प्रवर्तन निदेशालय (ED) के घेरे में हैं. विदेश में छिपे कुख्यात गैंगस्टर इंदरजीत सिंह और उसके सहयोगियों द्वारा संचालित मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट के खिलाफ ईडी ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. 30 दिसंबर 2025 से शुरू हुई यह छापेमारी नए साल के पहले दिन यानी 1 जनवरी 2026 को भी जारी है. अब तक की जांच में लगभग 60 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति का खुलासा हो चुका है, जिसने राजधानी के व्यापारिक और आपराधिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है. प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने कारोबारी सुनील गुप्ता के ठिकानों पर दबिश दी है, जिसका संबंध गैंगस्टर इंदरजीत के करीबी सहयोगी अमन कुमार से पाया गया है. ईडी के सूत्रों के अनुसार यह केवल एक रेड नहीं है बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले क्राइम-टू-कैश नेटवर्क को ध्वस्त करने की कोशिश है.

बरामदगी का पूरा ब्यौरा: नकदी से लेकर बेनामी संपत्तियां
ईडी की छापेमारी में अब तक जो मिला है, वह किसी फिल्म की पटकथा जैसा है. अधिकारियों ने दो अलग-अलग चरणों में भारी बरामदगी की है:

1.      सर्वप्रिय विहार छापेमारी: यहां से ईडी ने ₹5.12 करोड़ नकद और ₹8.8 करोड़ कीमत के सोने व हीरे के गहने बरामद किए. इसके अलावा ₹35 करोड़ की संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं.

2.      वेस्टएंड ग्रीन (सुनील गुप्ता) छापेमारी: इस ताजा कार्रवाई में ₹1.22 करोड़ कैश और करीब ₹8.50 करोड़ के कीमती आभूषण जब्त किए गए हैं.

3.      डिजिटल साक्ष्य: बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, लैपटॉप और डायरियां मिली हैं जिनमें कोड वर्ड्स में लेन-देन का हिसाब लिखा है.

गैंगस्टर, सफेदपोश और मनी लॉन्ड्रिंग का ट्रायंगल
यह मामला केवल कुछ करोड़ों की बरामदगी तक सीमित नहीं है. यह बताता है कि कैसे विदेश में बैठे अपराधी दिल्ली के पॉश इलाकों में अपनी जड़ें जमा चुके हैं.

1. अपराध की कमाई को सफेद करने का मॉडल
गैंगस्टर इंदरजीत सिंह विदेश में बैठकर भारत में रंगदारी, ड्रग्स और अवैध हथियारों का कारोबार चला रहा है. उसकी इस काली कमाई को भारतीय अर्थव्यवस्था में शामिल करने के लिए अमन कुमार जैसे बिचौलियों का इस्तेमाल किया जाता है. अमन कुमार ने सुनील गुप्ता जैसे कारोबारियों के साथ मिलकर एक जटिल वित्तीय जाल बुना. जांच में पता चला कि अमन कुमार ने ईडी की रेड के डर से भारी रकम सुनील गुप्ता को ट्रांसफर की थी ताकि उसे बिजनेस लोन या इन्वेस्टमेंट दिखाया जा सके.

2. रियल एस्टेट: काला धन छिपाने का सुरक्षित ठिकाना
सर्वप्रिय विहार से बरामद ₹35 करोड़ के संपत्ति दस्तावेज यह बताते हैं कि गैंगस्टर की कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट में लगाया जा रहा था. वीआईपी इलाकों में फार्महाउस और फ्लैट खरीदना न केवल पैसे को सुरक्षित रखने का जरिया था बल्कि यह समाज में रसूख बनाने की भी कोशिश थी. सुनील गुप्ता का वेस्टएंड ग्रीन फार्महाउस इसी सिंडिकेट का केंद्र बना हुआ था.

3. डिजिटल हवाला और विदेशी कनेक्शन
गैंगस्टर इंदरजीत सिंह का नेटवर्क पूरी तरह डिजिटल है. वह व्हाट्सएप और सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए निर्देश देता है. ईडी इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस पैसे का कुछ हिस्सा दुबई या अन्य देशों के जरिए हवाला के माध्यम से बाहर भेजा गया. अमन कुमार की गिरफ्तारी के बाद यह साफ हो पाएगा कि इस चेन में और कितने सफेदपोश शामिल हैं.

4. जांच एजेंसी के सामने चुनौतियां
इस तरह के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती मनी ट्रेल यानी पैसे के रास्तों को साबित करना होती है. अपराधी अक्सर शेल कंपनियां (फर्जी कंपनियां) बनाते हैं. सुनील गुप्ता के घर से मिले दस्तावेज इशारा करते हैं कि कई डमी कंपनियों के जरिए पैसा घुमाया गया. ईडी अब इन कंपनियों के चार्टर्ड अकाउंटेंट्स पर भी शिकंजा कसेगी.

5. समाज और सुरक्षा पर प्रभाव
जब अपराध की कमाई रियल एस्टेट और रिटेल बिजनेस में आती है तो यह ईमानदार कारोबारियों के लिए खतरा पैदा करती है. यह नेक्सस पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी बड़ी चुनौती है क्योंकि विदेश में बैठा गैंगस्टर बिना खुद सामने आए भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है.

आगे की राह
ईडी की यह कार्रवाई 2026 की शुरुआत में अपराधियों के लिए एक सख्त चेतावनी है. सुनील गुप्ता के ठिकानों पर अभी भी सर्च जारी है, जिसका अर्थ है कि बरामदगी का आंकड़ा 100 करोड़ के पार भी जा सकता है. आने वाले दिनों में अमन कुमार और इंदरजीत के अन्य साथियों की गिरफ्तारी संभव है. इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि एजेंसियां अब केवल फुट सोल्जर्स पर नहीं बल्कि अपराध के फाइनेंसर्स पर सीधा हमला कर रही हैं.

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Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और...और पढ़ें

First Published :

January 01, 2026, 17:47 IST

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