क्या खत्म हो जाएगा डिग्री का सिस्टम? शिक्षा मंत्री दिया सक्सेस का गुरुमंत्र

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Last Updated:January 02, 2026, 14:57 IST

Skill vs Degree: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का संकेत देते हुए अब 'डिग्री से ज्यादा स्किल' पर जोर दिया है. उनका कहना है कि युवाओं को केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रैक्टिकल स्किल्स की जरूरत है.

क्या खत्म हो जाएगा डिग्री का सिस्टम? शिक्षा मंत्री दिया सक्सेस का गुरुमंत्रSkill Development: डिग्री और स्किल्स की जंग में किसका पलड़ा भारी है?

नई दिल्ली (Skill vs Degree). केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने देश के एजुकेशन सिस्टम में बदलाव की जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि अब हमें केवल डिग्री बांटने वाली पारंपरिक शिक्षा से आगे बढ़ना होगा. आज के बदलते ग्लोबल परिवेश में युवाओं के पास केवल कागजी डिग्री होना काफी नहीं है, बल्कि उनके पास प्रैक्टिकल स्किल्स का होना भी जरूरी है. सरकार का लक्ष्य अब ऐसी व्यवस्था खड़ा करना है, जहां पढ़ाई का आधार ‘स्किल, एंटरप्रन्योरशिप और अप्रेंटिसशिप’ हो.

शिक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि लंबे समय से हमारी शिक्षा पद्धति केवल किताबों और परीक्षाओं के इर्द-गिर्द घूमती रही है. इससे इंडस्ट्री और एकेडमिक्स के बीच बड़ी खाई पैदा हो गई है. इसी को पाटने के लिए ‘नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ (NEP) के तहत बड़े बदलाव किए जा रहे हैं. धर्मेंद्र प्रधान ने जोहो (Zoho) जैसे सफल मॉडल और टीसीएस (TCS) जैसी बड़ी कंपनी का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे टैलेंट को परखने का पैमाना बदल चुका है. अब कंपनियां डिग्री के बजाय काम करने की क्षमता और नई सोच को प्राथमिकता दे रही हैं.

किताबी ज्ञान से ज्यादा जरूरी हैं प्रैक्टिकल स्किल्स

शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि अब शिक्षा का उद्देश्य केवल क्लास में बैठना नहीं, बल्कि इंडस्ट्री की वास्तविक जरूरतों को समझना है. उन्होंने चेन्नई के जोहो एजुकेशन मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि वहां छात्रों को किताबी बोझ के बजाय सीधे स्किल सीखने पर फोकस कराया जाता है. जब छात्र पढ़ाई के दौरान ही काम की बारीकियां सीखते हैं तो वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर रूप से तैयार होते हैं.

बदल रही है इंडस्ट्री की मांग

टीसीएस (TCS) जैसी बड़ी टेक कंपनियां अब ऐसे युवाओं को ढूंढ रही हैं, जो इनोवेशन कर सकें. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इंडस्ट्री अब केवल ‘सर्टिफिकेट’ नहीं मांगती, बल्कि वह ‘सॉल्यूशन’ चाहती है. विकसित भारत एजुकेशन फाउंडेशन के माध्यम से अब स्किल डेवलपमेंट और अप्रेंटिसशिप को सिलेबस का अनिवार्य हिस्सा बनाया जा रहा है. इससे छात्र पढ़ाई के साथ-साथ काम का अनुभव भी हासिल कर सकेंगे.

भाषा विवाद पर विराम और ‘थ्री लैंग्वेज फार्मूला’

शिक्षा मंत्री ने भाषा को लेकर चल रही बहस को खारिज करते हुए कहा कि असली चुनौती भाषा नहीं, बल्कि संवाद (Communication) और समझ है. नई शिक्षा नीति में अपनाए गए ‘थ्री लैंग्वेज फार्मूला’ का उद्देश्य यही है कि बच्चा अपनी मातृभाषा के साथ-साथ अन्य भाषाओं में भी सक्षम बने. जब बुनियादी समझ मजबूत होगी, तभी युवा ग्लोबल लेवल पर आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रख पाएंगे.

बढ़ेगी महिलाओं की भागीदारी

विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए धर्मेंद्र प्रधान ने लेबर फोर्स (श्रम शक्ति) में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया. उनका मानना है कि मजबूत अर्थव्यवस्था तभी बन सकती है, जब समाज का हर वर्ग, विशेषकर महिलाएं, आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से जुड़ें. इसके लिए उन्हें डिजिटल स्किल और टेक्नोलॉजी से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है.

खेती से एआई (AI) तक: टेक्नोलॉजी का जादू

ड्रोन टेक्नोलॉजी का उदाहरण देते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि कैसे मॉडर्न स्किल्स कृषि जैसे पारंपरिक क्षेत्रों को भी बदल रही हैं. आने वाले समय में ‘AI फॉर एजुकेशन’ के माध्यम से पढ़ाई के तरीकों को और भी आधुनिक बनाया जाएगा. टेक्नोलॉजी और लेबर फोर्स का सही तालमेल ही रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा. भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए ‘ज्ञान के साथ समझ’ और ‘डिग्री के साथ स्किल’ को जोड़ना होगा.

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Deepali Porwal

With more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys...और पढ़ें

First Published :

January 02, 2026, 14:57 IST

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