Last Updated:January 13, 2026, 16:15 IST
भारत साल 2026 में ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसका आधिकारिक वेबसाइट और 'नमस्ते' वाला नया लोगो लॉन्च किया. डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' और टैरिफ नीतियों के बीच भारत की अध्यक्षता बेहद अहम है. 11 देशों का यह समूह अब दुनिया की 40% जीडीपी पर नियंत्रण रखता है. भारत का लक्ष्य व्यापार और तकनीक में पश्चिमी निर्भरता कम कर ग्लोबल साउथ को मजबूत करना है.
भारत के पास इस साल ब्रिक्स की मेजबानी है. नई दिल्ली.दुनिया के नक्शे पर भारत की धमक अब और मजबूत होने वाली है. एक तरफ वाशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप की ‘टैरिफ गन’ तनी है, तो दूसरी तरफ दिल्ली ने ‘नमस्ते’ के साथ चक्रव्यूह तैयार कर लिया है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ‘नमस्ते-कमल’ वाले उस लोगो को लॉन्च कर दिया है जो 2026 में वैश्विक राजनीति की दिशा तय करेगा. यह सिर्फ एक चिह्न नहीं बल्कि उन ताकतों को सीधा संदेश है जो दुनिया को अपनी मुट्ठी में रखना चाहती हैं. भारत की मेजबानी में अब ग्लोबल साउथ की वह आवाज उठेगी, जिसे दबाना मुमकिन नहीं होगा.
ब्रिक्स के पास दुनिया का 40% व्यापार
भारत ने साल 2026 के लिए ब्रिक्स (BRICS) की कमान संभाल ली है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को नई दिल्ली में ब्रिक्स 2026 का आधिकारिक लोगो और वेबसाइट लॉन्च की. यह आयोजन इसलिए भी खास है क्योंकि 2026 में यह समूह अपनी स्थापना की 20वीं वर्षगांठ मना रहा है. भारत की अध्यक्षता के दौरान मुख्य फोकस वैश्विक कल्याण, आर्थिक लचीलापन और नवाचार पर रहेगा. जयशंकर ने कहा कि नया लोगो भारत की सांस्कृतिक विरासत और उभरती ताकत का मेल है. लोगो में ‘कमल’ के ऊपर ‘नमस्ते’ की मुद्रा सहयोग और सम्मान का संदेश देती है. इसकी पांच पंखुड़ियां संस्थापक सदस्य देशों के रंगों को दर्शाती हैं. भारत का लक्ष्य ह्यूमैनिटी फर्स्ट के मंत्र के साथ ग्लोबल साउथ की आवाज बनना है. 11 सदस्यों वाला यह समूह अब दुनिया की 40% जीडीपी का प्रतिनिधित्व कर रहा है.
डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां और ब्रिक्स की नई भूमिका
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी और उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ की आक्रामक नीतियों ने वैश्विक समीकरण बदल दिए हैं. ट्रंप ने हाल ही में ब्रिक्स देशों को चेतावनी दी है कि वे डॉलर के विकल्प के रूप में नई मुद्रा लाने का विचार छोड़ दें. उन्होंने ऐसा करने पर 100% टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की धमकी दी है. ट्रंप की यह व्यापारिक जंग ब्रिक्स को और अधिक एकजुट कर सकती है. ब्रिक्स 2026 केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि ट्रंप की ‘आक्रामक कूटनीति’ के खिलाफ एक मजबूत वैश्विक ब्लॉक बनने की परीक्षा है.
क्यों अहम है भारत की अध्यक्षता?
· डॉलर के वर्चस्व को चुनौती: ट्रंप की टैरिफ नीतियों से बचने के लिए ब्रिक्स देश अपनी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ा रहे हैं. भारत की अध्यक्षता में ‘डी-डॉलरइजेशन’ की चर्चा और तेज होने की उम्मीद है.
· व्यापारिक सुरक्षा कवच: ट्रंप के संरक्षणवाद (Protectionism) के कारण दुनिया के कई देश अब ब्रिक्स की ओर देख रहे हैं. भारत एक ‘ब्रिज’ के तौर पर काम कर सकता है जो पश्चिम और विकासशील देशों के बीच संतुलन बनाएगा.
· ग्लोबल साउथ का नेतृत्व: भारत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को ब्रिक्स के जरिए दुनिया में फैलाना चाहता है. यह उन देशों के लिए मददगार होगा जो अमेरिकी या चीनी तकनीक पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहते.
About the Author
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और...और पढ़ें
First Published :
January 13, 2026, 16:15 IST

1 hour ago
