Last Updated:March 11, 2026, 16:52 IST
What is the purpose of ESMA: ईरान-इजरायल युद्ध के चलते पूरी दुनिया की सप्लाई चेन प्रभावित हो गई है. इसी आशंका के बीच भारत सरकार ने एलपीजी और पेट्रोलियम सेवाओं पर ईसीए यानी आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA) लागू कर दिया है. फिलहाल देश में एस्मा (ESMA) लागू नहीं किया गया है. ESMA और ECA कानून में बड़ा अंतर होता है. जानिए इन दोनों कानूनों में क्या अंतर है और कब लागू किया जा सकता है?

नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल-अमेरिका के छिड़े युद्ध ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया है. इस युद्ध का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है. ईरान-इजरायल युद्ध ने भारत की खाद्य आपूर्ति व्यवस्था को भी आलार्मिंग मोड पर ला कर खड़ा कर दिया है. युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और एलपीजी गैस सिलेंडर की संभावित किल्लत की खबरों से भारत सरकार एक्शन में आ गई है. भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA – 1955) लागू कर दिया है. केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि ‘आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम-1968’ (ESMA) लागू नहीं किया गया है. जानते हैं क्या एस्मा और ईसीए, जो एलपीजी सप्लाई और कीमत को नियंत्रण में रखेगा.
ईरान-इजरायल-यूएस संघर्ष और हार्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई बाधित होने से देश में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत की अफवाहें फैल रही हैं. उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, चेन्नई और मुंबई में लोग लंबी कतारें लगाकर सिलेंडर खरीद रहे हैं. ब्लैक मार्केट में 14.2 किलो का घरेलू सिलेंडर 1,500 तक बिक रहा है, जबकि देश में बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर 900-950 के आसपास दाम है. इसी स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने जरूरी वस्तु अधिनियम (ECA), 1955 लागू कर दिया है न कि ESMA
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पूरी ने एस्मा पर क्या कहा? (फाइल फोटो)
सरकार ने क्या निर्देश जारी किया?
पेट्रोलियम मंत्रालय ने सभी रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे एलपीजी उत्पादन को बढ़ाकर 100% घरेलू उपयोग के लिए सुरक्षित करें. होटल-रेस्तरां में सिलेंडरों की सप्लाई पर अंकुश लगा दिया गया है. तेल विपणन कंपनियां IOC, HPCL, BPCL को स्पष्ट आदेश है कि पहले 33 करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता.सरकार ने आश्वासन दिया है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए कोई कमी नहीं है और घबराने की जरूरत नहीं. 25 दिन का नया इंटर-बुकिंग नियम लागू कर कालाबाजारी पर अंकुश लगाया गया है. केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने कहा है कि हम ऑस्ट्रेलिया, अल्जीरिया और कनाडा जैसे देशों से अतिरिक्त एलपीजी मंगवा रहे हैं. घरेलू उपभोक्ताओं की रसोई नहीं रुकेगी.
क्या है एस्मा (ESMA – 1968)?
यह कानून सेवाओं से जुड़ा है. यह कानून सरकार को बिजली, पानी, रेलवे, हवाई परिवहन, टेलीफोन, अस्पताल जैसी आवश्यक सेवाओं में हड़ताल या तालाबंदी रोकने का अधिकार देता है. इसका मकसद है कि जनसेवाएं बाधित न हों और आम लोगों को रोजमर्रा की सुविधाएं मिलती रहें. यह श्रमिक विवादों या हड़ताल के दौरान लागू होता है. एस्मा यानी ‘एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट’ एक ऐसा कानून है जिसका उपयोग सरकार तब करती है जब उसे लगता है कि किसी आवश्यक सेवा के रुकने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो सकता है. ईरान-इजरायल युद्ध के मद्देनजर, सरकार ने पेट्रोलियम, सीएनजी और एलपीजी वितरण को ‘अनिवार्य सेवा’ घोषित कर दिया है, लेकिन एस्मा लागू नहीं किया है.
आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA – 1955) क्या है?
यह कानून वस्तुओं (commodities) से जुड़ा है. खाने-पीने की चीजें, दवाएं, पेट्रोलियम उत्पाद, जिसमें एलपीजी भी आता है जैसी आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण, भंडारण और कीमतों को नियंत्रित करता है. जमाखोरी, कालाबाजारी रोकने और उचित दाम पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार स्टॉक लिमिट लगा सकती है और उत्पादन बढ़ा सकती है या वितरण प्राथमिकता दे सकती है. जहां एस्मा सेवाओं (Services) और कर्मचारियों पर केंद्रित है, वहीं आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) वस्तुओं (Goods) की उपलब्धता और कीमतों पर नियंत्रण रखता है. सरकार ने एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी रोकने के लिए इस कानून के तहत जिलाधिकारियों को विशेष निर्देश दिए हैं.
| विशेषता | एस्मा (ESMA- 1968) | आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA – 1955) |
| मुख्य उद्देश्य | सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करना, जैसे हड़ताल रोकना. | वस्तुओं की आपूर्ति और उचित कीमत सुनिश्चित करना. |
| ध्यान केंद्र | यह कर्मचारियों और प्रबंधन के व्यवहार पर लागू होता है. | यह स्टॉक, वितरण और मूल्य पर लागू होता है. |
| कार्यवाही | काम रोकने वालों के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही. | जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों पर कार्यवाही. |
| उदाहरण | गैस डिलीवरी, रेल, अस्पताल और बिजली विभाग. | एलपीजी सिलेंडर, अनाज, दालें और खाद्य तेल. |
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रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर
भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा...और पढ़ें
First Published :
March 11, 2026, 16:52 IST

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