जो न‍ियम से नहीं बोलेगा, उसका माइक बंद होगा: गृहमंत्री अमित शाह का राहुल गांधी को करारा जवाब

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जो न‍ियम से नहीं बोलेगा, उसका माइक बंद होगा: शाह का राहुल गांधी को जवाब

Last Updated:March 11, 2026, 17:59 IST

संसद में 'माइक बंद' विवाद पर गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस को करारा जवाब दिया है. उन्होंने दो टूक कहा कि जो भी सदस्य नियमों के खिलाफ बोलेगा, उसका माइक बंद होगा, चाहे वो केंद्रीय मंत्री ही क्यों न हो. स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान शाह ने साफ किया कि सदन नियमों से चलता है, किसी पार्टी के विशेषाधिकार से नहीं.

 शाह का राहुल गांधी को जवाबZoom

गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में राहुल गांधी को द‍िया जवाब.

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष, विशेषकर राहुल गांधी पर जोरदार हमला बोला. राहुल गांधी बार-बार कहते रहे हैं क‍ि चर्चा के दौरान उनका माइक बंद कर द‍िया जाता है. उन्‍हें बोलने नहीं द‍िया जाता. इसका जवाब गृहमंत्री अमित शाह ने दो टूक में कहा कि सदन न‍ियमों से चलता है, जो भी सदस्य नियम के खिलाफ बोलेगा, उसका माइक बंद किया जाएगा, फिर चाहे वह सत्ता पक्ष का हो या विपक्ष का.

विपक्ष द्वारा लगातार लगाए जा रहे ‘माइक बंद करने’ के आरोपों का करारा जवाब देते हुए गृहमंत्री ने अपनी ही सरकार के केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का उदाहरण दिया. शाह ने सदन को बताया, अभी गिरिराज सिंह पप्पू यादव के खिलाफ बोल रहे थे, तब उनका माइक भी बंद कर दिया गया था. जबकि वह एक केंद्रीय मंत्री हैं, फिर भी ऐसा हुआ. इसलिए यह बात सत्ता पक्ष या विपक्ष की नहीं है. जो भी नियमों के दायरे में नहीं रहेगा, उसका माइक बंद ही होगा, और ऐसा होना भी चाहिए. इस तर्क के साथ शाह ने विपक्ष के उस नैरेटिव को खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि केवल विपक्षी नेताओं की आवाज दबाई जा रही है.

“संविधान ने अधिकार दिए हैं, विशेषाधिकार नहीं”
अमित शाह ने असंसदीय शब्दों के इस्तेमाल पर भी विपक्ष को आईना दिखाया. उन्होंने कहा कि असंसदीय शब्दों की सूची कोई आज की बात नहीं है, बल्कि यह तब से बनती आ रही है जब से यह सदन अस्तित्व में आया है. कांग्रेस पर सीधा निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष को संविधान ने काम करने के अधिकार जरूर दिए हैं, लेकिन कोई ‘विशेषाधिकार’ नहीं दिया है कि वे मनमाने तरीके से नियमों को तोड़ें. शाह ने तंज कसते हुए कहा, “यही कारण है कि आज जनता भी आपको संरक्षण नहीं दे रही है और आपकी पार्टी दिन-ब-दिन छोटी से छोटी होती जा रही है.”

स्पीकर को हटाना प्रधानमंत्री को हटाने से भी मुश्किल
स्पीकर के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव को दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए गृहमंत्री ने कहा कि विपक्ष अगर चाहे तो प्रधानमंत्री के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव ला सकता है, उसे कोई नहीं रोकेगा. लेकिन लोकसभा अध्यक्ष जैसी गरिमामयी संस्था के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव लाना बेहद अफ़सोसजनक है. उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए दोनों प्रक्रियाओं का अंतर समझाया. शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री को हटाने के लिए सदन में ‘साधारण बहुमत’ की आवश्यकता होती है, जबकि स्पीकर को हटाने के लिए ‘प्रभावी बहुमत’ चाहिए होता है. यह व्यवस्था संविधान निर्माताओं ने स्पीकर के पद की महत्ता और उसकी गरिमा को सुरक्षित रखने के लिए ही बनाई थी.

ओम बिरला ने कायम की उच्च नैतिक मिसाल
अमित शाह ने सदन के ऐतिहासिक पन्नों को पलटते हुए याद दिलाया कि इससे पहले भी तीन स्पीकरों के खिलाफ इस तरह के प्रस्ताव लाए जा चुके हैं. लेकिन वे सभी प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान अपनी कुर्सी (चेयर) पर बैठे रहे थे. उन्होंने कहा कि एकमात्र ओम बिरला ही ऐसे स्पीकर हैं जिन्होंने उच्च नैतिक मापदंडों का पालन करते हुए अपने खिलाफ प्रस्ताव आने पर चेयर पर बैठने से इनकार कर दिया.

विपक्ष के नोटिस में निकलीं भारी कमियां
विपक्ष के प्रस्ताव की कमियों को उजागर करते हुए शाह ने उनकी गंभीरता पर ही सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने बताया कि विपक्ष ने जो पहला प्रस्ताव पेश किया था, उसमें तारीख और संकल्प दोनों ही गलत थे. इसके बाद जब विपक्ष ने दूसरा नोटिस दिया, तो उसमें भी नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं. शाह ने खुलासा किया कि दूसरे नोटिस में केवल सांसद गौरव गोगोई के असली हस्ताक्षर थे, जबकि बाकी सभी सदस्यों के हस्ताक्षरों की महज़ फोटोकॉपी लगाई गई थी, जो कि सदन के नियमों के बिल्कुल खिलाफ है.

विपक्ष अपने ही प्रस्ताव को लेकर गंभीर नहीं
अंत में गृहमंत्री ने स्पीकर की उदारता की प्रशंसा करते हुए कहा कि विपक्ष की ओर से दो-दो बार इतनी बड़ी और बचकानी गलतियां होने के बावजूद, हमारे स्पीकर ने उनके नोटिस को तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया. यही उनका ‘हाई मोरल ग्राउंड’ है. शाह ने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि वे अपने ही प्रस्ताव को लेकर जरा भी गंभीर नहीं हैं, क्योंकि जब उनका प्रस्ताव पटल पर आना था, तब उन्होंने उसे खुद ही बिखेर देने का काम किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सदन सिर्फ और सिर्फ लोकसभा के नियमों से चलेगा, न कि किसी विशेष राजनीतिक पार्टी के नियमों से.

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Gyanendra Mishra

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for 'Hindustan Times Group...और पढ़ें

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Delhi,Delhi,Delhi

First Published :

March 11, 2026, 17:59 IST

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