Supreme Court Hearing on Sonam Wangchuk: सुप्रीम कोर्ट में आज यानी गुरुवार 12 फरवरी को सुनवाई हुई. इस दौरान कोर्ट में जोरदार बहस देखने को मिले. केंद्र सरकार और लेह प्रशासन ने गुरुवार को लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर अपनी दलीलें पूरी कर ली हैं. वहीं, इस मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस अरविंद कुमार और पीबी वराले की बेंच के सामने सरकार ने वांगचुक की हिरासत सही ठहराया है.
उन्होंने कोर्ट से कहा कि उनकी गिरफ्तारी के बाद ही लद्दाख में हिंसा को रुका और इससे साबित होता है कि हिरासत सही थी. सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) केएम नटराज पेश हुए. उन्होंने अदालत से कहा, ‘हिरासत के बाद, पूरा आंदोलन और हिंसा कंट्रोल में आ गई. इसलिए यह साबित हो गया है कि यह एक सही व्यवस्था थी जो उस स्थिति में सही थी.’
काफी सावधानी से हुई गिरफ्तारी
एसजी नटराज ने अदालत से यह भी कहा कि वांगचुक को हिरासत में लेते समय अथॉरिटी ने पूरी सावधानी बरती थी. उन्होंने कोर्ट से कहा, ‘कृपया हालात देखें. बॉर्डर वाले इलाके, जहां आंदोलन और हिंसा हो रही है. देश का हित सबसे जरूरी होना चाहिए. इन सभी बातों को नजरअंदाज करके, फंडामेंटल राइट्स के अलग-अलग पहलुओं को बताते हुए, इस कोर्ट के सामने आने वाले व्यक्ति को नागरिकों और देश के प्रति अपने फंडामेंटल ड्यूटीज़ के बारे में भी पता होना चाहिए.’
कोर्ट से क्यों मांगी माफी
अपनी दलीलें खत्म होने पर नटराज ने दलीलें पूरी करने में समय लेने के लिए माफी मांगी. कोर्ट ने कहा, ‘इन मामलों में ऐसा होना तय है.’ कोर्ट ने सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो की जवाबी दलीलों की सुनवाई के लिए सोमवार, 16 फरवरी को मामला लिस्ट किया. यानी कि उनकी याचिका पर सोमवार को फिर से सुनवाई होगी.
बुरा तो नहीं तो मानेंगे ना
कोर्ट ने आज ASJ नटराज से पूछा, ‘उम्मीद है अगर हम आपसे कोई सवाल पूछें तो आपको कोई एतराज़ नहीं होगा. आपको बाद में यह नहीं कहना चाहिए कि गलत सवाल पूछे जा रहे हैं. इसीलिए हम इसकी शुरुआत कर रहे हैं.’ नटराज ने कहा कि जब कोर्ट कोई सवाल पूछता है, चाहे वह रेलिवेंट हो या इर्रेलेवेंट, तो वे जवाब देने के लिए मजबूर हैं. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि कोई वकील यह तय नहीं कर सकता कि बेंच का पूछा गया सवाल रेलिवेंट है या इर्रेलेवेंट. कोर्ट ने साफ किया, ‘यह आपके और उनके (दूसरे पक्ष) लिए इर्रेलेवेंट हो सकता है, लेकिन यह हमारे लिए रेलिवेंट हो सकता है. और बाद में, हम यह भी कह सकते हैं कि इसकी ज़रूरत नहीं थी. यह बेहतर समझ के लिए है.’
महात्मा गांधी से तुलना पर कोर्ट से क्या बोले
एसजी मेहता ने कल सुनवाई के दौरान महात्मा गांधी के भाषण को कोर्ट द्वारा पढ़े जाने पर आपत्ति जताई थी, और कहा था कि मीडिया इसे अलग तरीके से दिखाएगा. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि उसे इस बात से कोई मतलब नहीं है कि कोर्टरूम के बाहर क्या होता है. पिछले हफ्ते, कोर्ट ने केंद्र सरकार से जेल में वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए. उन्हें हिरासत में लेने के फैसले पर रिव्यू करने को कहा था. हालांकि, कोर्ट ने सेहत के आधार पर वांगचुक को रिहा न करने का फैसला किया.
बहुत ज़्यादा नुकसान होता
एएसजी ने कोर्ट से आग्रह किया कि वह उस दबाव पर विचार करें जिसकी वजह से वांगचुक को गिरफ्तार किया गया था. उन्होंने कहा कि अथॉरिटी ने लेह में चार लोगों की मौत के बाद हिरासत का ऑर्डर पास किया था. उन्होंने आगे कहा कि कोर्ट हिरासत में लेने वाली अथॉरिटी से भाषा में परफेक्शन की उम्मीद नहीं कर सकते. आगे कहा, ‘हिरासत के ऑर्डर की तुलना इस कोर्ट या किसी भी कोर्ट के फैसलों से नहीं की जा सकती. अगर हिरासत का ऑर्डर नहीं दिया गया होता, तो बहुत ज्यादा नुकसान होता.’ नटराज ने आगे कहा कि हिरासत का ऑर्डर पुलिस की सिफारिश की कॉपी-पेस्ट नहीं था.
4 वीडियो गायब है
सुनवाई के आखिर में वीडियो की जिन्न निकला बाहर. दरअसल, वांगचुक के वकील ने शिकायत की कि उन्हें जो पेन ड्राइव दी गई है, उसमें उनके खिलाफ बताए गए चार वीडियो में से कोई भी नहीं था. उन्होंने कोर्ट से बताया, ‘हमने उन्हें बार-बार इसके बारे में बताया है. हम बाकी वीडियो न देने का आरोप नहीं लगा रहे हैं. लेकिन एनेक्सर A में बताए गए 4 वीडियो उस पेन ड्राइव में नहीं थे. लैपटॉप हमें पहली बार 5 अक्टूबर को दिया गया था, जिसमें से ये 4 वीडियो गायब थे.

1 hour ago
