DNA: ट्रंप-नेतन्याहू की मीटिंग में 3 बातें तय, ट्रंप ने 'मिडनाइट हैमर' की याद क्यों दिलाई?

2 hours ago

Iran-US Deal: 11 फरवरी को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुलाकात हुई और इस मुलाकात के बाद ट्रंप ने ईरान को उस हथियार की याद दिलाई जिससे आठ महीने पहले ईरान के परमाणु ठिकानों को तबाह किया गया था. आखिर ट्रंप और नेतन्याहू की मुलाकात में ऐसी क्या बात हुई जिसके बाद ट्रंप ने खलीफा को मिडनाइट हैमर की याद दिलाई.बुधवार को वॉशिंगटन में नेतन्याहू और ट्रंप के बीच करीब 3 घंटे तक बंद कमरे में बातचीत हुई. मीटिंग का मुख्य मुद्दा था ईरान. इस मुलाकात के बाद ईरान को लेकर ट्रंप ने क्या कहा, चलिए आपको बताते हैं.

मुलाकात के बाद क्या बोले ट्रंप?

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि इजरायली प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात काफी अच्छी थी. ईरान से बातचीत जारी रहनी चाहिए ताकि ये देखा जा सके कि डील होगी या नहीं. लेकिन इसके बाद ट्रंप ने जो कहा, वो किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है. ट्रंप ने लिखा कि पिछली बार ईरान ने तय किया था कि उनके लिए डील न करना बेहतर होगा, और इसका जवाब उन्हें मिडनाइट हैमर से मिला था.

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ट्रंप का ये बयान ऐसे वक्त में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच डील को लेकर बातचीत जारी है. लेकिन डील फाइनल होने के कोई संकेत मिल नहीं रहे हैं. इसी वजह से सवाल उठ रहा है. क्या ट्रंप के इस बयान को ईरान के लिए धमकी माना जाए. क्या ये मान लिया जाए कि ट्रंप और नेतन्याहू की ये मुलाकात मिडनाइट हैमर 2.0 की तैयारी है. अब समझिए कि ये डील संभव हो क्यों नहीं पा रही है.

अमेरिका और इजरायल की ये मांग है कि ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को पूरी तरह से बंद कर दे और मौजूदा यूरेनियम सरेंडर कर दे. लेकिन ईरान न्यूक्लियर संवर्धन किसी भी कीमत पर रोकने को राजी नहीं है. ईरान के सामने दूसरी शर्त ये रखी गई है कि वो अपने बैलेस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को बंद कर दे और मौजूदा मिसाइलों को सरेंडर कर दे. ईरान के खलीफा यानी खामेनेई  इस शर्त को भी मानने को राजी नहीं है.

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— Zee News (@ZeeNews) February 12, 2026

तीसरी बड़ी शर्त ये है कि ईरान अपने प्रॉक्सी संगठन जैसे हमास, हिजबुल्लाह की फंडिंग रोक दे. लेकिन ईरान डील में इस शर्त को भी शामिल करने के लिए राजी नहीं है. यानी ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर जो बातचीत शुरू हुई थी. उसमें अमेरिका और इजरायल बैलेस्टिक मिसाइल और प्रॉक्सी संगठनों की शर्त को भी शामिल करना चाहता है. लेकिन ये वो मुद्दे हैं जिसपर ईरान बातचीत करने के लिए भी तैयार नहीं है.

शर्तें नहीं मानेगा ईरान

एक तरफ ईरान ने लगभग तय कर दिया है कि शर्तें नहीं मानेगा. वहीं दूसरी तरफ ट्रंप अभी भी बातचीत से हल निकालने का जिक्र कर रहे हैं . ऐसे में आपको ये समझना चाहिए कैसे ईरान पर हमले से पहले ट्रंप की एक नई चाल है. ये मिडनाइट हैमर 2.0 की तैयारी है.

बातचीत की आड़ में ट्रंप कुछ और ही खेल, खेल रहे हैं और इस खेल का खुलासा कुछ सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ है. मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य अड्डों की कुछ सैटेलाइट तस्वीरें लीक हुई हैं, जिससे ये खुलासा हुआ है कि अमेरिका ने धीरे धीरे ईरान की जबरदस्त घेराबंदी कर दी है.

अमेरिका आया एक्शन में

कतर के अल उदैद एयरबेस पर अमेरिका ने अपनी पैट्रियट मिसाइल सिस्टम को फिक्स्ड ठिकानों से हटाकर ट्रकों पर लोड कर दिया है, ताकि किसी भी हमले की स्थिति में इन्हें तेजी से दूसरी जगह शिफ्ट किया जा सके या जवाबी हमला किया जा सके.

जॉर्डन के साल्ती एयरबेस पर 17 F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट्स को तैनात किया गया है.. इसके अलावा EA-18G ग्राउलर विमान को तैनात किया गया है जो दुश्मन के रडार सिस्टम को जाम करती हैं.

सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस अमेरिकी मालवाहक विमानों की आवाजाही बढ़ी है. इसके अलावा अमेरिका ईरान की तरफ एक और एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने की तैयारी कर रहा है.

वेनेजुएला अटैक से पहले भी ट्रंप ने की थी तैयारी

अगर आपको याद हो तो ट्रंप ने वेनेजुएला पर हमले से पहले भी कुछ इसी तरह की तैयारी की थी.ट्रंप मादुरो से बातचीत के जरिये हल निकालते की बात करते रहे. और इसकी आड़ में उन्होंने वेनेजुएला की घेराबंदी कर दी थी और आखिरकार हमला कर मादुरो को उठा ले गए. मिडिल ईस्ट में अमेरिका की ये तैनाती भी साफ इशारा कर रही है कि अगर डील नहीं हुई तो ईरान पर हमला तय है. लेकिन होशियार अकेले ट्रंप नहीं हैं.डील में जो DELAY यानी देरी हो रही है, उसकी आड़ में ईरान ने भी जंगी तैयारी पूरी कर ली है.

एक तरफ ईरान ने डिफेंसिव मोड में आकर इस्फहान में अपने परमाणु केंद्रों के प्रवेश द्वारों को मिट्टी से ढक दिया है ताकि हमलों में परमाणु संयंत्र और उसके अंडरग्राउंड ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचे. ईरान ने अपनी सबसे घातक मिसाइल ‘खुर्रमशहर-4’  को अटैक मोड पर डाल दिया है.

क्या है वैक्यूम बम?

अमेरिकी हथियारों के साथ-साथ आज इजरायल के एक हथियार के बारे में भी चर्चा हो रही है. इस हथियार का नाम है वैक्यूम बम. गाजा में हमास के खिलाफ इजरायल के ऑपरेशन को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है, जिसमें वैक्यूम बम के इस्तेमाल का दावा किया गया है.

गाजा में इस्तेमाल हुए इजरायली हथियारों की जांच करने वाली एक संस्था ने दावा किया है कि इजरायल ने गाजा में हमास के ठिकानों पर वैक्यूम बम से हमला किया था. आशंका जताई जा रही है कि अगर ईरान के साथ जंग हुई तो हो सकता है इस हथियार का इस्तेमाल खलीफा के खिलाफ भी हो जाए. इस हथियार से क्यों डरना चाहिए, अब हम आपको इससे जुड़ी जानकारी देने जा रहे हैं.

वैक्यूम बम के टकराने के बाद पहले धमाके में ज्वलनशील गैस से पूरे इलाके की हवा को सोख लेता है

इसके बाद दूसरे धमाके से इतनी गर्मी पैदा होती है कि इंसान का शरीर भाप बन जाता है.

वैक्यूम बम के धमाके के बाद हवा का तापमान 3,500 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इसके इस्तेमाल से कितनी बड़ी तबाही मचेगी.

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