अरे बाप रे! काम सफाई और सैलरी लाखों में, कहां मिल रहा स्वीपर को 2 लाख रुपए का वेतन

2 hours ago

होमताजा खबरदेश

बाप रे! काम सफाई और सैलरी लाखों में, कहां मिल रहा स्वीपर को 2 लाख रुपए का वेतन

Last Updated:February 26, 2026, 09:08 IST

तेलंगाना में वेतन संशोधन के बाद सरकारी कर्मचारियों की सैलरी तेजी से बढ़ी है_ रिपोर्ट के अनुसार लंबे अनुभव वाले सैनिटेशन वर्कर्स और स्वीपर्स की मासिक आय 2 लाख रुपये तक पहुंच रही है, जबकि राज्य का सैलरी और पेंशन खर्च 6,000 करोड़ रुपये महीना हो गया है.

बाप रे! काम सफाई और सैलरी लाखों में, कहां मिल रहा स्वीपर को 2 लाख रुपए का वेतनZoom

हैदराबाद. इस खबर को पढ़ने के बाद आप अब सफाई का काम करने वाले स्‍वीपर को कभी हल्‍के में नहीं लेंगे. जी हां, तेलंगाना में सरकारी कर्मचारियों की सैलरी को लेकर एक दिलचस्प और चौंकाने वाली तस्वीर जारी की है. राज्य के चीफ सेक्रेटरी के. रामकृष्ण राव ने बुधवार को बताया कि पिछले 10 सालों में राज्य का सैलरी और पेंशन बिल चार गुना बढ़कर करीब 6,000 करोड़ रुपये प्रति माह पहुंच गया है. खास बात यह है कि लंबे समय से काम कर रहे स्वीपर्स और सैनिटेशन वर्कर्स जैसे सीनियर क्लास-4 के कर्मचारी महीने में करीब 2 लाख रुपये तक कमा रहे हैं.

उन्‍होंने बताया कि 2014 में जब तेलंगाना, आंध्र प्रदेश से अलग होकर नया राज्य बना था, तब हर महीने सैलरी और पेंशन पर लगभग 1,500 करोड़ रुपये खर्च होते थे. लेकिन लगातार हुए पे रिविजन और चुनावी वर्षों के आसपास वेतन बढ़ोतरी के फैसलों के कारण यह खर्च करीब 300 प्रतिशत तक बढ़ गया. अब सरकारी खजाने पर फिक्स्ड एक्सपेंडिचर का बड़ा हिस्सा वेतन और पेंशन पर जा रहा है. चीफ सेक्रेटरी ने बताया कि खासकर पावर यूटिलिटीज यानी बिजली विभागों में सैलरी ज्यादा है, क्योंकि वहां हर चार साल में वेतन संशोधन किया जाता है. इसी वजह से कुछ चीफ इंजीनियर्स की सैलरी 7 लाख रुपये महीने तक पहुंच रही है.

सीनियर स्वीपर्स की सैलरी भी लाखों में

रिपोर्ट के मुताबिक, नगर निगम में शुरुआती स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी करीब 28,000 रुपये महीने से शुरू होती है. लेकिन अगर कोई ड्राइवर या सैनिटेशन वर्कर 25–30 साल की सेवा पूरी कर लेता है, तो उसकी सैलरी और भत्ते मिलाकर 1 लाख रुपये से ज्यादा हो जाते हैं. ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन यानी जीएचएमसी में करीब 2 प्रतिशत सैनिटेशन वर्कर्स नियमित यानी रेग्युलराइज्ड (regularised) कर्मचारी हैं, जिन्हें औसतन 70,000 रुपये महीने के साथ कई बेनेफिट्स (benefits) मिलते हैं. लंबे अनुभव और कई वेतन संशोधनों के बाद कुछ वरिष्ठ कर्मचारियों की आय 2 लाख रुपये तक पहुंच रही है.

आईएएस और गवर्नर से भी ज्यादा सैलरी

वेतन संशोधन का असर इतना ज्यादा हुआ है कि कुछ सार्वजनिक उपक्रमों में कर्मचारियों की सैलरी अब आईएएस ऑफिसर्स और यहां तक कि गवर्नर की सैलरी से भी अधिक हो गई है. वेतन बढ़ाने के लिए सरकार पे रिविज़न कमीशन बनाती है, जो फिटमेंट परसेंटेज तय करती है. यह प्रतिशत बेसिक पे और डियरनेस अलाउंस पर लागू होता है, जिससे कुल सैलरी में बड़ा उछाल आता है.

सरकारी नौकरियों की बढ़ती सैलरी का युवाओं पर क्या असर पड़ा है?
सरकारी नौकरियों में लगातार बढ़ रही सैलरी का सीधा असर युवाओं की पसंद पर दिखाई दे रहा है. अब सरकारी नौकरी सिर्फ सुरक्षित करियर नहीं रही, बल्कि एक हाई-पेइंग करियर ऑप्शन के रूप में देखी जा रही है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में युवा कई-कई साल तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं. हाल ही में निकली 563 ग्रुप-1 पोस्ट्स के लिए प्रति पद करीब 799 उम्मीदवारों ने आवेदन किया, जो सरकारी नौकरियों के प्रति बढ़ते आकर्षण को साफ दिखाता है. इस ट्रेंड का असर कोचिंग इंडस्ट्री पर भी पड़ा है, जो तेजी से विस्तार कर रही है क्योंकि लाखों अभ्यर्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हुए हैं.

क्या राज्य की अर्थव्यवस्था इतने बड़े वेतन खर्च को संभाल पा रही है?
राज्य सरकार के अनुसार मजबूत होती अर्थव्यवस्था के कारण बढ़ते वेतन खर्च को फिलहाल संभाला जा रहा है. चीफ सेक्रेटरी ने बताया कि तेलंगाना की इकोनॉमी लगभग 11 प्रतिशत की ग्रोथ रेट से आगे बढ़ रही है, जिससे सरकार की आय के स्रोत लगातार मजबूत हुए हैं. टैक्स कलेक्शन और अन्य रेवेन्यू सोर्सेज में वृद्धि होने से सरकारी खर्च का संतुलन बनाए रखना संभव हो पाया है. इसके अलावा सरकार ने योजनाओं के वितरण में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए डिजिटल सिस्टम को भी मजबूत किया है, जिससे खर्च का बेहतर प्रबंधन किया जा सके.

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का सरकारी योजनाओं पर क्या प्रभाव पड़ा है?
सरकार द्वारा तैयार किए गए मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का सबसे बड़ा फायदा सब्सिडी और लाभ वितरण में देखने को मिला है. उदाहरण के तौर पर रायथु बंधु स्कीम के तहत किसानों को लगभग 7,000 करोड़ रुपये सीधे वितरित किए गए. इस प्रक्रिया में केवल 6 प्रतिशत का एरर रेट दर्ज किया गया, जो बड़े स्तर पर होने वाले सरकारी भुगतान के हिसाब से काफी कम माना जाता है. डिजिटल सिस्टम के कारण पारदर्शिता बढ़ी है, बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंच रहा है.

राज्य के कुल खर्च में वेतन और कर्ज का कितना हिस्सा है?
राज्य गठन के बाद पहले 10 वर्षों में तेलंगाना सरकार ने लगभग 15 लाख करोड़ रुपये खर्च किए. इनमें से करीब 12 लाख करोड़ रुपये सैलरी, पेंशन और कर्ज की अदायगी यानी डेट रिपेमेंट पर खर्च हुए. इसके मुकाबले केवल 3 लाख करोड़ रुपये ही कैपिटल एक्सपेंडिचर, यानी इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं पर लगाए गए. यह आंकड़ा बताता है कि सरकारी वित्त का बड़ा हिस्सा राजस्व खर्च में जा रहा है, जबकि विकास से जुड़े निवेश का हिस्सा अपेक्षाकृत कम है.

About the Author

Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to ...और पढ़ें

Location :

Hyderabad,Telangana

First Published :

February 26, 2026, 09:08 IST

Read Full Article at Source