Last Updated:August 30, 2025, 21:41 IST
Supreme Court Stray Dog News: तिरुवनंतपुरम में जस्टिस विक्रम नाथ ने सुप्रीम कोर्ट के स्ट्रे डॉग्स केस का मजेदार किस्सा सुनाया, जिससे सभागार हंसी से गूंज उठा. जज साहब ने कहा कि इस केस ने मुझे सिविल सोसाइटी के ब...और पढ़ें

स्ट्रे डॉग का मसाल पिछले कुछ सप्ताह में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है. ऐसा होना लाजमी भी है क्योंकि पहले सुप्रीम कोर्ट ने स्ट्रे डॉग को पकड़ने का आदेश दिया और बाद में इसपर तीन जजों की बेंच ने रोक लगा दी. केरल के तिरुवनंतपुरम में आयोजित रीजनल कॉन्फ्रेंस ऑन ह्यूमन-वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट के मंच पर सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ ने हल्के-फुल्के अंदाज में इसपर चुटकी ली. स्ट्रे डॉग्स पर जस्टिस नाथ ने मजाकिया लहजे में कहा, “अब तक मैं सिर्फ लीगल फ्रेटरनिटी में ही थोड़ा-बहुत जाना जाता था लेकिन इस केस ने मुझे सिविल सोसाइटी और दुनिया भर में मशहूर कर दिया. अब तो कुत्ते भी मुझे आशीर्वाद दे रहे हैं.”
जस्टिस नाथ ने पलटा फैसला
असल में जस्टिस नाथ उस तीन जजों वाली उस बेंच के अध्यक्ष रहे जिसने 22 अगस्त को एक अहम आदेश देते हुए कहा कि दिल्ली-एनसीआर से उठाए गए आवारा कुत्तों को वैक्सीनेशन और नसबंदी के बाद वापस वहीं छोड़ा जाए जहां से उन्हें पकड़ा गया था. इससे पहले 11 अगस्त को दो जजों की बेंच ने इन्हें शेल्टर से न छोड़ने का आदेश दिया था. जब दोनों आदेशों में टकराव दिखा तो चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने यह केस जस्टिस नाथ की बेंच को ट्रांसफर कर दिया.
‘आप ही वो जज हैं…’
मंच से बोलते हुए जस्टिस नाथ ने कहा कि उन्हें खुशी है कि सीजेआई ने यह मामला उन्हें सौंपा. “हाल ही में हम ‘लॉ एशिया पोल समिट’ में थे. वहां विदेशी लॉयर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट्स ने भी मुझसे यही सवाल पूछे, ‘ओह, आप ही वो जज हैं जिनके पास डॉग्स वाला केस है?’ उस वक्त मुझे लगा कि चलो, अब विदेशों में भी मेरी पहचान बन गई है.”
कुत्तों ने दी शुभकामनाएं
उन्होंने चुटकी लेते हुए आगे कहा, “अब तक तो सिर्फ इंसानों से शुभकामनाएं मिलती थीं, लेकिन इस केस के बाद डॉग लवर्स के साथ-साथ डॉग्स भी मुझे दुआएं भेज रहे हैं. शायद अब मेरे पास इंसानों और जानवरों दोनों का आशीर्वाद है.” जस्टिस नाथ की यह टिप्पणी हल्की-फुल्की जरूर थी लेकिन इसके पीछे एक गंभीर संदेश भी छिपा है. भारत में स्ट्रे डॉग्स का मुद्दा न सिर्फ पब्लिक हेल्थ से जुड़ा है बल्कि यह इंसान-जानवर के सहअस्तित्व का भी सवाल है. सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से स्पष्ट है कि समाधान दमन नहीं बल्कि संतुलन और मानवीय दृष्टिकोण से निकल सकता है.
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और...और पढ़ें
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और...
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First Published :
August 30, 2025, 21:41 IST