US Federal Appellate Court Decision on Trump Tariff: टैरिफ के बल पर सब देशों को अपने कदमों में झुका देने का ख्वाब देख रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को करारा झटका लगा है. अमेरिका की एक संघीय अपील अदालत ने उनके रास्ते में रोड़ा अटका दिया है. अलदात ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रीय आपातकालीन शक्तियों का गलत इस्तेमाल करके विभिन्न देशों पर जरूरत से ज्यादा आयात शुल्क थोप दिया है. ऐसा करके कोर्ट ने इस साल मई में दिए गए फैसले को काफी हद तक बरकरार रखा.
टैरिफ पर ट्रंप को लगा बड़ा झटका
हालांकि 7-4 के बहुमत से दिए गए अपील अदालत के फैसले ने मई में दिए गए डिसीजन के हिस्से को खारिज कर दिया, जिसमें शुल्कों को तुरंत रद्द कर दिया गया था. जिससे ट्रंप प्रशासन अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का समय मिल गया. यह फैसला ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका था, जिनकी अनिश्चित व्यापार नीतियों ने पूरी दुनिया के वित्तीय बाजारों को हिलाकर रखा हुआ है.
अदालत ने किन शुल्कों को खारिज किया?
संघीय अपीलीय अदालत का यह फैसला इस अप्रैल में ट्रंप प्रशासन की ओर से लगभग सभी अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर लगाए गए टैरिफ पर आया है. तब ट्रंप ने 2 अप्रैल को उन देशों पर 50% तक के तथाकथित पारस्परिक टैरिफ लगाए जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है. इसके साथ ही बाकी सभी देशों देशों पर 10% आधारभूत टैरिफ लगाए थे. उन्होंने उस दिन को राष्ट्रीय मुक्ति दिवस करार दिया था.
बाद में राष्ट्रपति ने पारस्परिक टैरिफ को 90 दिनों के लिए निलंबित कर दिया था ताकि उन देशों को अमेरिका के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करने का समय मिल सके. उनमें से ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और जापान ने टैरिफ से बचने के लिए समझौता कर लिया. जिन देशों ने ट्रंप के आगे घुटने नहीं टेके, उन्हें इस महीने की शुरुआत में और ज्यादा टैरिफ का सामना करना पड़ा.
क्या कहता है अमेरिकी संविधान?
बता दें कि अमेरिकी संविधान कांग्रेस को टैरिफ सहित कर निर्धारित करने का अधिकार देता है. लेकिन सांसदों ने धीरे-धीरे राष्ट्रपतियों को टैरिफ पर अधिक शक्ति हासिल करने दी है. ट्रम्प ने इसका सबसे अधिक फायदा उठाया है, जिसका खामियाजा अब अमेरिकी लोगों को खुद भुगतना पड़ रहा है.
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कोर्ट ने राष्ट्रपति के खिलाफ फैसला क्यों दिया?
न्यूयॉर्क स्थित अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने फैसला देते हुए इस तर्क को खारिज कर दिया ट्रम्प के टैरिफ आपातकालीन शक्तियों वाले कानून के तहत "राष्ट्रपति को दिए गए किसी भी अधिकार से अधिक हैं". शुक्रवार को, संघीय अपील न्यायालय ने अपने 7-4 के फैसले में लिखा कि "ऐसा प्रतीत नहीं होता कि कांग्रेस का इरादा राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का असीमित अधिकार देने का था." शुक्रवार के फैसले से असहमत न्यायाधीशों की असहमति ने ट्रम्प के लिए संभावित कानूनी रास्ता साफ कर दिया है.
अब आगे क्या करेंगे डोनाल्ड ट्रंप?
फैसले के बाद अपनी निराशा जाहिर करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा कि अगर टैरिफ हटा दिए जाते हैं, तो उसे वसूले गए कुछ आयात कर वापस करने पड़ सकते हैं, जिससे अमेरिकी खजाने को भारी नुकसान होगा. जुलाई तक टैरिफ से कुल राजस्व 159 अरब डॉलर था, जो पिछले साल इसी समय के मुकाबले दोगुने से भी ज़्यादा है. दरअसल, न्याय विभाग ने इसी महीने एक कानूनी दस्तावेज़ में चेतावनी दी थी कि टैरिफ हटाने का मतलब अमेरिका के लिए "वित्तीय बर्बादी" हो सकता है.
सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे राष्ट्रपति ट्रंप!
एक्सपर्टों के अनुसार, यह फैसला यह ट्रंप को आगे टैरिफ लगाने की कोशिश में भी मुश्किल में डाल सकता है.राष्ट्रपति ने इस लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की कसम खाई.उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, "अगर इसे ऐसे ही रहने दिया गया, तो यह फैसला सचमुच संयुक्त राज्य अमेरिका को बर्बाद कर देगा." ट्रंप के पास आयात कर लगाने के लिए वैकल्पिक कानून ज़रूर हैं. इसके लिए उन्हें सुप्रीम कोर्ट में अपील करनी होगी और उन्होंने अपनी पोस्ट में इसका इशारा भी कर दिया है.
(एजेंसी एपीटीएन)