नई दिल्ली. संसद के शीतकालीन सत्र से ठीक पहले रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में राजनीतिक तापमान अचानक तेज हो गया, जहां विपक्षी दलों ने SIR (Survey of Intensive Revision of Electoral Rolls) को मुख्य मुद्दा बनाते हुए सरकार पर तीखे सवाल उठाए, जबकि केंद्र ने सदन को सुचारू रूप से चलाने की अपील दोहराई. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि बैठक ‘बहुत प्रोडक्टिव’रही, लेकिन कुछ दलों ने संकेत दिए कि SIR को लेकर सदन में हंगामा भी हो सकता है. रिजिजू ने साफ कहा कि ‘सहमति के बावजूद सदन न चलने देना ठीक नहीं है.’
कांग्रेस, सपा और शिवसेना (UBT) समेत कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि SIR की प्रक्रिया ने वोटरों में असुरक्षा पैदा की है और ‘वोट चोरी’के आरोपों की वजह से इस मुद्दे पर सदन में विस्तृत चर्चा जरूरी है. कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने कहा कि “अगर SIR पर चर्चा नहीं हुई तो इसका मतलब सरकार खुद सदन को डिरेल करना चाहती है.” सपा के रामगोपाल यादव ने आरोप लगाया कि “अधिकारियों पर वोट काटने का दबाव डाला गया.”
दूसरी तरफ, JDU के संजय झा ने बिहार का बचाव करते हुए कहा कि “SIR के बाद हुए चुनाव में एक भी व्यक्ति ने वोटर लिस्ट में नाम कटने की शिकायत नहीं की.” LJP (RV) के अरुण भारती ने SIR के फायदे गिनाए और कोसी नदी की बाढ़ समस्या पर राष्ट्रीय टास्क फोर्स बनाने की मांग उठाई. बैठक में कई क्षेत्रीय मुद्दे भी उठे – TDP ने कृष्णा नदी जल बंटवारे से लेकर किसान संकट तक कई विषय उठाए, जबकि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल ने 350वें शहीदी दिवस पर सदन की शुरुआत गुरु तेग बहादुर को श्रद्धांजलि देकर करने की मांग की और पंजाब से जुड़े बिलों पर नाराज़गी जताई.
कांग्रेस के गौरव गोगोई ने केंद्र की विदेश नीति, प्रदूषण, आतंकी घटनाओं, आर्थिक सुरक्षा और प्राकृतिक आपदाओं की तैयारी पर भी चर्चा की मांग की. वहीं मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संकेत दिया कि “इस बार चर्चा होने की उम्मीद है.” कुल मिलाकर, शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले ही माहौल साफ दिखा रहा है कि SIR, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और महंगाई जैसे मुद्दों पर केंद्र और विपक्ष की भिड़ंत तय है – और 19 दिन के इस छोटे सत्र में टकराव और भी तीखा हो सकता है.
सर्वदलीय बैठक को लेकर किसने क्या कहा?
केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद के शीतकालीन सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक के बाद कहा, “बैठक में कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने कहा है कि SIR पर भी चर्चा होनी चाहिए और कई मुद्दे हैं… सदन चलने नहीं देंगे ऐसा किसी ने नहीं कहा लेकिन कुछ लोगों या नेताओं ने ये कहा है कि SIR को लेकर सदन में हंगामा कर सकते हैं… विपक्ष की बात हम सुनने के लिए तैयार हैं लेकिन कोई भी विषय जो आप रख रहे हैं और यदि उससे दूसरी पार्टी सहमत नहीं है ऐसे में सदन न चलने देने की बात करना ठीक नहीं है. हम सभी से अपील करेंगे कि पिछली बार की तरह विरोध न करें. अगर वे फिर भी करते हैं, तो हम देखेंगे.”
किरेन रिजिजू ने कहा, “संसद के शीतकालीन सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा,”बैठक बहुत अच्छी और बहुत प्रोडक्टिव रही. मैं सभी पॉलिटिकल पार्टियों के फ्लोर लीडर्स को धन्यवाद देता हूं. सभी ने हिस्सा लिया और अपनी पार्टी के विचार रखे. हम आज पॉलिटिकल पार्टियों के फ्लोर लीडर्स से मिले सभी सुझावों पर विचार करेंगे और फिर उन्हें बिज़नेस एडवाइज़री कमेटी के सामने पेश करेंगे. इस बैठक में 36 पॉलिटिकल पार्टियां और 50 नेता शामिल हुए. सरकार की तरफ से मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि हम संसद के शीतकालीन सत्र को ठीक से चलाने के लिए इसी तरह विपक्ष के साथ बातचीत करते रहेंगे. मैं विपक्षी पार्टी के नेताओं से भी अनुरोध करूंगा कि वे पार्लियामेंट को ठीक से चलाने में सहयोग करें. लोकतंत्र में खासकर पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी में रुकावटें आती हैं. पॉलिटिकल पार्टियों में मतभेद होते हैं. सभी को अपनी-अपनी आइडियोलॉजी और एजेंडा के साथ काम करना होता है, इसलिए मतभेद होंगे. इन मतभेदों के बावजूद, अगर हम सब तय करते हैं कि हाउस को डिस्टर्ब नहीं करना है, जो भी विरोध करना है सदन में रहकर विरोध करना है सदन की कार्रवाई किसी भी तरह से बंद नहीं करनी है…”
LJP (रामविलास) सांसद अरुण भारती ने संसद के शीतकालीन सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक पर कहा, “हर बार सदन शुरू होने से पहले सर्वदलीय बैठक होती है… हमारी पार्टी की ओर से हमने बिहार में कैसे SIR का फायदा हुआ और कैसे कोसी नदी में बाढ़ को लेकर राष्ट्रीय टास्क फोर्स बनाया जाए जिससे इस समस्या का निदान हो, इसपर चर्चा की…”
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने शीतकालीन सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक पर कहा, “सर्वदलीय बैठक संसदीय परंपराओं के अनुरूप आयोजित की गई है. सभी फ्लोर लीडर्स और जन प्रतिनिधि इस बैठक में उपस्थित हुए हैं… सरकार की ओर से सभी सभी राजनीतिक दलों से यही पेशकश की गई है कि सभी दल सदन को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करें… हमारी कोशिश होगी कि इस शीतकालीन सत्र का पूरी तरह से जनहित में उपयोग हो सके… अलग-अलग विषय हैं. बहुत सारी पार्टियों ने जो विषय उचित समझे हैं वो उठाए हैं. सरकार ने सभी के विषयों का संज्ञान में लिया है और इस पर हमारे सदन के जो नियम हैं उसके अनुसार चर्चा भी होगी. जैसा कि सरकार हमेशा कहती भी है कि हम चर्चा के लिए तैयार हैं तो जो भी आवश्यक विषय हैं उस पर चर्चा होगी.”
सर्वदलीय बैठक के बाद, TDP MP लावू श्री कृष्ण देवरायालु ने कहा, “तेलुगु देशम पार्टी की तरफ से, हमने जो मुद्दे उठाए, वे थे, संसद की उत्पादकता बढ़ाने की ज़रूरत है… दूसरा मुद्दा जो हम उठाना चाहते हैं, वह कृष्णा नदी के जल के वितरण से जुड़ा है. यह मुद्दा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच है… तीसरा जलजीवन मिशन से जुड़ा है… ताकि यह साफ़ हो सके कि जलजीवन योजना कैसे लागू होगी और आंध्र प्रदेश को क्या फ़ायदे मिल सकते हैं. चौथा राज्य के किसानों से जुड़ा है…”
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने शीतकालीन सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक पर कहा, “ज्यादातर दलों की एक राय है कि अगर SIR पर चर्चा नहीं हुई तो इसका मतलब सरकार सदन नहीं चलाना चाहती. उन्होंने(चुनाव आयोग) खुद महसूस किया कि उनके द्वारा दिया गया समय पर्याप्त नहीं था और SIR को लेकर एक सप्ताह का समय बढ़ाया गया है… इस प्रक्रिया में कम से कम 1 से 3 साल का समय लगेगा… कांग्रेस हमेशा चिंता व्यक्त करती रही कि भारत के संविधान के अनुसार, भारत के प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद उत्तरदायी हैं. प्रधानमंत्री कभी-कभी भूले-भटके सदन में आते तो हैं लेकिन चर्चा में शामिल नहीं होते हैं. प्रधानमंत्री संविधान की मूल भावना के समान अपने दायित्व का पालन नहीं कर रहे हैं. तीसरी बात भी कही गई कि विदेश नीति का भटकाव है यह देश हित में नहीं है… महंगाई, बेरोजगारी पर भी लोग चर्चा चाहते हैं… निर्वाचन आयोग और सरकार अपनी जिद छोड़े, लोकतंत्र की हत्या बंद करें…
समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने संसद के शीतकालीन सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक पर कहा,”सपा की तरफ से केवल SIR का मुद्दा उठाया गया है. इसमें बहुत बड़े पैमाने पर अधिकारियों के दवाब पर वोट काटने के लिए कहा जा रहा है….”
शिरोमणि अकाली दल सांसद हरसिमरत कौर बादल ने शीतकालीन सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक पर कहा, “मैंने सरकार और सदन के नेताओं से ये अपील की है कि पूरे देश में गुरु तेग बहादुर का 350वां शहीदी दिवस मनाई जा रही है… उनको श्रद्धांजलि देकर सत्र की शुरूआत की जाए… दूसरी मांग है कि बार-बार इस तरह के बिल लाए जा रहे हैं जिससे न केवल संघीय संरचना कमजोर होती है बल्कि पंजाब को आप अलग करके उसकी शांति व्यवस्था को खराब करना चाह रहे हैं. चंडीगढ़ का बिल जिसे रोका गया है न कि वापस लिया गया है उस पर चर्चा होनी चाहिए. उन्हें बताना चाहिए कि सरकार पंजाब को चंडीगढ़ को कब देंगे…”
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संसद के शीतकालीन सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक पर कहा, “इस बार ऐसा लग रहा है कि चर्चा होगी. विपक्ष के दल भी कई मुद्दे लेकर आए हैं.”
JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने संसद के शीतकालीन सत्र पर कहा, “बिहार में आखिरी सत्र भी वॉशआउट हो गया और SIR तब सिर्फ बिहार में हो रहा था और सदन यहां बंद करा रहे थे बिहार में पूरा SIR का काम एक महीने में हुआ. एक भी शिकायत नहीं आई कि कोई ये कहे कि वोटर लिस्ट से उसका नाम काट दिया गया हो. SIR के बाद बिहार में चुनाव हुआ. कोई एक इंसान ने नहीं कहा कि उनका वोटर लिस्ट से नाम काट दिया गया था या नहीं था और चुनाव आयोग ने बहुत ही अच्छा काम किया. परिणाम आप सबके सामने है.”
सर्वदलीय बैठक के बाद कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, “शीतकालीन सत्र आज सिर्फ़ 19 दिन का है, जिसमें से सिर्फ़ 15 दिन ही चर्चा हो पाएगी. यह शायद अब तक का सबसे छोटा शीतकालीन सत्र होगा…ऐसा लगता है कि सरकार खुद संसद को डिरेल करना चाहती है. हमने सुरक्षा का मुद्दा उठाया कि इस शीतकालीन सत्र में सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हो…दिल्ली में विस्फोट हुआ वह कहीं न कहीं हमारी कानूनी और गृह विभाग की विफलताओं का एक बहुत बड़ा प्रमाण है… दूसरी है लोकतंत्र की सुरक्षा की चर्चा… हमारी तीसरी मांग हमारी स्वास्थ्य से जुड़ी सुरक्षा से जुड़ी थी, जिस तरह से देश के हर कोने में वायु प्रदूषण बढ़ रहा है. चौथा मुद्दा हमारी आर्थिक सुरक्षा का था. पांचवां मुद्दा जो हमने उठाया वह प्राकृतिक सुरक्षा था. जिस तरह से बाढ़, भूस्खलन और तूफान आ रहे हैं, उसकी कोई तैयारी नहीं है. हमने अपनी विदेश नीति का मुद्दा भी उठाया, जिसे हम देख रहे हैं कि भारत दूसरे देशों के अनुसार अपनी विदेश नीति बना रहा है…”
संसद के शीतकालीन सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक पर राजद सांसद मनोज कुमार झा ने कहा,”हम उम्मीद करेंगे कि सरकार की चुनाव के आगे जाकर सोचे, GDP, SIR को लेकर जो लोगों के मन में चिंता है उस पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए….”
शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने संसद के शीतकालीन सत्र पर कहा, “मैं उम्मीद करती हूं कि आने वाला सत्र फलाफलपूर्ण सत्र होगा. जिसमें देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी… हम देख रहे हैं कि SIR प्रक्रिया के दौरान कितने BLO दबाव में काम कर रहे हैं… वोट चोरी को लेकर भी पर्दाफाश किया गया है… राहुल गांधी ने भी हरियाणा का हवाला देते हुए कई मुद्दे उठाए हैं. यही सारे मुद्दे हैं चाहें वो प्रदूषण का मुद्दा हो या मिलावटी खाने का, जो विपक्ष के मुद्दे हैं, उन पर भी हमें चर्चा करने का मौका मिलेगा मैं इसकी उम्मीद करती हूं…”

1 hour ago
