नई दिल्ली. भारत की सत्ता का धड़कता केंद्र रहा साउथ ब्लॉक केवल एक इमारत नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत की राजनीतिक यात्रा का मौन साक्षी है. यहीं से ऐसे ऐतिहासिक निर्णय लिए गए जिन्होंने युद्धों की दिशा तय की, आर्थिक नीतियों को आकार दिया और वैश्विक मंच पर भारत की पहचान को सुदृढ़ किया. अब 13 फरवरी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में स्थानांतरित होने जा रहा है. इसके साथ ही इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय पूर्ण होगा और प्रशासनिक व्यवस्था एक नए दौर में प्रवेश करेगी.
देश की दिशा तय हुई
15 अगस्त 1947 से 12 फरवरी 2025 तक प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) महान वास्तुकार हरबर्ट बेकर द्वारा डिज़ाइन किए गए साउथ ब्लॉक से संचालित होता रहा. 1911 में राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित होने के बाद ब्रिटिश शासन ने नॉर्थ और साउथ ब्लॉक का निर्माण कराया था. स्वतंत्रता के बाद साउथ ब्लॉक भारतीय सत्ता का केंद्र बन गया और यहीं से देश के प्रधानमंत्रियों ने राष्ट्र की दिशा निर्धारित की.
सबसे पहले नेहरू
जवाहरलाल नेहरू (1947-1964) ने सबसे पहले इसी भवन से शासन संभाला. उनके कार्यकाल में भारत की विदेश नीति और रक्षा रणनीति की आधारशिला रखी गई. गुटनिरपेक्ष आंदोलन की अवधारणा यहीं आकार लेती रही. 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान नेहरू देर रात तक अपने कार्यालय में बैठकर रणनीति पर मंथन करते थे. अमेरिकी राजदूत जॉन केनेथ गैल्ब्रेथ से उनकी कई महत्वपूर्ण मुलाकातें भी यहीं हुईं.
हरित क्रांति की नींव
लाल बहादुर शास्त्री ने भी इसी पीएमओ से देश का नेतृत्व किया. हरित क्रांति की नींव रखने में नॉर्मन बोरलॉग और डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन के साथ उनकी अहम बैठकों का केंद्र यही कार्यालय रहा. 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान शास्त्री जी ने साउथ ब्लॉक को अस्थायी निवास बना लिया था.
जब था ‘वॉर रूम’
इंदिरा गांधी (1966-1977, 1980-1984) के दौर में 1971 का भारत-पाक युद्ध लड़ा गया, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का उदय हुआ. उस समय साउथ ब्लॉक देश की सामरिक गतिविधियों का नर्व सेंटर बन गया था. प्रधानमंत्री कार्यालय और रक्षा मंत्रालय यहीं स्थित थे. एक विशेष ‘वॉर रूम’ में युद्ध की रणनीति तैयार होती और निगरानी की जाती थी. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और शीर्ष सैन्य अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठकें इन्हीं कमरों में होती थीं. दृढ़ राजनीतिक नेतृत्व और स्पष्ट सैन्य सलाह का वह संगम आज भी इतिहास का हिस्सा है.
राजीव गांधी (1984-1989) ने तकनीकी आधुनिकीकरण की दिशा में कई पहलें यहीं से कीं. 1987 में श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (IPKF) भेजने का निर्णय भी इसी कार्यालय में लिया गया, हालांकि यह अभियान अपेक्षित सफलता नहीं दिला सका.
1990 के दशक में पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व में आर्थिक उदारीकरण की ऐतिहासिक शुरुआत हुई. वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के साथ उनकी बैठकों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजार के लिए खोलने की दिशा दी. 1993 का भारत-चीन सीमा समझौता भी इसी कालखंड की उपलब्धि रहा.
अटल बिहारी वाजपेयी (1998-2004) ने साउथ ब्लॉक से पोखरण परमाणु परीक्षण का साहसिक निर्णय लिया और कारगिल युद्ध के दौरान रणनीतिक नेतृत्व प्रदान किया. डॉ. मनमोहन सिंह (2004-2014) के कार्यकाल में 2008 का भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता हुआ, जिसने भारत की वैश्विक स्थिति को नई मजबूती दी. 26/11 मुंबई हमलों के बाद आतंकवाद के विरुद्ध कड़ी रणनीति भी यहीं तैयार की गई.
मोदी का दौर
2014 से अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साउथ ब्लॉक से कार्य करते हुए विदेश और रक्षा नीति में अधिक सक्रिय और निर्णायक रुख अपनाया. 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 का बालाकोट एयर स्ट्राइक और बीते साल आपरेशन सिंदूर जैसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों की रणनीति इसी पीएमओ में बनी.
अब प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में स्थानांतरित हो रहा है, जो सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा है और 2026 तक पूर्ण रूप से विकसित होगा. सेवा तीर्थ-1 में पीएमओ, सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ-3 में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय स्थापित होंगे. ‘इंडिया हाउस’ नामक आधुनिक कॉन्फ्रेंस हॉल में विदेशी प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की जाएगी. अत्याधुनिक सुरक्षा, खुला कार्यस्थल और बेहतर समन्वय की सुविधाओं से युक्त यह परिसर रायसीना हिल के निकट स्थित है. प्रधानमंत्री का नया आवास भी पास ही 15 एकड़ क्षेत्र में तैयार हो रहा है.
यह बदलाव औपनिवेशिक विरासत से आगे बढ़कर नए भारत की प्रशासनिक सोच का प्रतीक माना जा रहा है. साउथ ब्लॉक को ‘भारत थ्रू द एजेस’ संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना है. ‘सेवा तीर्थ’ नाम सत्ता के बजाय सेवा की भावना को रेखांकित करता है. सरकार का मानना है कि यह स्थानांतरण प्रशासन को अधिक कुशल, आधुनिक और पारदर्शी बनाएगा.
साउथ ब्लॉक ने नेहरू से लेकर मोदी तक भारत की बदलती तस्वीर देखी है. यहां लिए गए निर्णयों ने युद्धों की दिशा बदली, अर्थव्यवस्था को नई राह दी और विश्व मंच पर भारत की भूमिका को मजबूत किया. अब सेवा तीर्थ से एक नई कहानी लिखी जाएगी. किंतु जब भी स्वतंत्र भारत के प्रारंभिक आठ दशकों का इतिहास लिखा जाएगा, साउथ ब्लॉक स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय का उल्लेख अवश्य होगा.

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