'बैन' के बाद भी जिंदा PFI के जिन्न, 2026 चुनाव से पहले बिल से बाहर निकलने लगे आतंकी भूत, इंटेलिजेंस का खुलासा

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'बैन' के बाद भी जिंदा PFI, 2026 चुनाव से पहले बिल से बाहर निकलने लगे आतंकी भूत

Last Updated:February 12, 2026, 16:35 IST

Kerala PFI News: एक्सक्लूसिव इंटेलिजेंस रिपोर्ट से पता चलता है कि केरल में बैन PFI कैडर 2026 के राज्य चुनावों पर असर डालने के लिए SDPI की मदद ले रहे हैं. उत्तरी केरल ISIS समर्थकों के लिए हॉटस्पॉट बना हुआ है, जहां 2025 में UAPA के तहत कट्टरता के नए मामले दर्ज किए गए हैं. सलाफी मदरसों को विदेशी फंडिंग और अंसारुल्लाह बांग्ला टीम जैसे ग्रुप्स का असर बढ़ रहा है, जो सड़क पर हिंसा से विचारधारा को मज़बूत करने की ओर एक खतरनाक बदलाव का संकेत है.

'बैन' के बाद भी जिंदा PFI, 2026 चुनाव से पहले बिल से बाहर निकलने लगे आतंकी भूतZoom

पीएफआई अब दूसरे रूप में केरल में पैर पसार रहा है. (फाइल फोटो)

Kerala News: केरल में कट्टरपंथ जड़ें खत्म होने की नाम नहीं ले रही है. एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसने केरल की राजनीति को हिला दिया है. दरअसल, 4 साल पहले बैन की गई संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर लगा था, लेकिन इंटेलिजेंस ने दावा किया कि ये एक बार फिर से पनपने लगा हैं. लेकिन, इस बार यह दूसरा रूप लेकर आया है. CNN-News18 के अनुसार, PFI का नेटवर्क खत्म नहीं हुआ, बल्कि उसने अपना रूप बदल लिया है. 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले यह नेटवर्क अब ‘बैलेट’ यानी वोट की ताकत से सत्ता में अपनी पैठ बनाने की खतरनाक तैयारी कर रहा है.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 28 सितंबर 2022 को PFI पर प्रतिबंध लगने के बाद इसके लगभग सारे सक्रिय सदस्य अब सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) में शामिल हो चुके हैं. 2025 के मध्य तक, मलप्पुरम, कन्नूर और कासरगोड जैसे संवेदनशील जिलों में SDPI ने बूथ-स्तर पर अपनी कमेटियां खड़ी कर ली हैं. इन कमेटियों में वही पुराने PFI ऑर्गनाइजर बैठे हैं जो पहले सड़कों पर हिंसा और प्रदर्शनों को अंजाम देते थे. अब इनका मकसद बदल गया है- सड़क की हिंसा की जगह ये लोग ‘वोट बैंक’ की ब्लैकमेलिंग कर रहे हैं. राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि राजनीतिक पार्टियां अब SDPI और जमात के वोट बैंक पर निर्भर होती जा रही हैं.

आतंक का नया नाम?

खुफिया एजेंसियों ने एक नए खतरे की घंटी भी बजाई है. 2025 में ताम्रशेरी के बिशप रेमिगियोस इंजानियेल (Remigiose Injaniyel) को मिली जान से मारने की धमकी के बाद ‘इस्लामिक डिफेंस फोर्सेज ऑफ इंडिया’ (IDFI) नामक एक नए गुट का नाम सामने आया है. यह पीएफआई की पुरानी ‘हिट स्क्वाड’ रणनीति का ही नया रूप माना जा रहा है. इसके साथ ही, ‘रिहैब इंडिया फाउंडेशन’ जैसे एनजीओ अब भी कल्याणकारी कार्यों की आड़ में कट्टरपंथ की विचारधारा को जिंदा रखे हुए हैं, ताकि कानूनी शिकंजे से बचा जा सके.

ISIS हमदर्दों का गढ़?

‘ऑपरेशन पिजन’ (2016-18) से लेकर एनआईए (NIA) के 2024-25 के ताजा असेसमेंट तक, सब यही इशारा कर रहे हैं कि उत्तरी केरल देश में आईएसआईएस (ISIS) हमदर्दों का सबसे बड़ा गढ़ बना हुआ है. हाल ही में तिरुवनंतपुरम में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जहां एक मां और सौतेले पिता पर अपने ही नाबालिग बच्चे को कट्टरपंथी बनाने के आरोप में यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया. यह घटना साबित करती है कि जहर अब परिवारों के अंदर तक घुल चुका है.

खाड़ी देशों से ‘फंड’ और ‘फरमान’

रिपोर्ट में 2023 से 2025 के बीच खाड़ी देशों से अनौपचारिक हवाला नेटवर्क के जरिए सलाफी मदरसों को मिल रही भारी फंडिंग का भी जिक्र है. पुलिस के गुप्त आकलन के मुताबिक, प्रवासी मजदूरों के जरिए ‘अंसारुल्लाह बांग्ला टीम’ जैसे विदेशी आतंकी संगठनों की विचारधारा भी केरल में घुसपैठ कर रही है. पिछले दो सालों में हेट स्पीच, धार्मिक स्थलों पर तोड़फोड़ और हमास नेताओं के महिमामंडन की घटनाएं बढ़ी हैं, जो इशारा करती हैं कि अब रणनीति खुले तौर पर हिंसा की नहीं, बल्कि लंबी वैचारिक गुलामी की है.

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Deep Raj Deepak

दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व...और पढ़ें

Location :

New Delhi,Delhi

First Published :

February 12, 2026, 16:34 IST

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