Opinion- राजनीति में अजब-गजब.... राहुल, ममता और PM ने बनाए रिकार्ड!

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Last Updated:February 08, 2026, 09:47 IST

राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष होकर भी संसद में बोल नहीं पाए. स्पीकर ने उन्हें नियमों का हवाला देकर बोलने नहीं दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पर नहीं बोल पाए. वर्ष 2004 के बाद यह पहला मौका था, जब पीएम के भाषण बगैर धन्यवाद प्ररस्ताव लोकसभा ने पारित कर दिया. इन सबसे अलग बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की एक्टिविटी रही. वे SIR पर हियरिंग के दौरान वकील के लिबास में दलील देने सुप्रीम कोर्ट पहुंच गईं.

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राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में पीएम मोदी और राहुल गांधी दोनों नहीं बोल पाए.

देश में अलग-अलग कई रिकार्ड अब तक बने हैं. इनमें ताजा तीन रिकार्ड जुड़े हैं. लोकसभा में पहली बार किसी पीएम ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस का जवाब नहीं दिया. विपक्ष ने चीनी घुसपैठ और भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर ऐसा बवेला मचाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मजबूर होकर राज्यसभा में विपक्ष को जवाब देना पड़ा. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की मानें तो विपक्ष की योजना प्रधानमंत्री पर हमला करने की थी. इस आशंका की पुष्टि इसलिए भी होती है कि कांग्रेस की महिला सांसदों ने एक दिन पहले प्रधानमंत्री की घेराबंदी करने की कोशिश की थी. दूसरा रिकार्ड नेता प्रतिपक्ष ने बनाया. राष्ट्रपति के अभिभाषण पर स्पीकर ने उन्हें बोलने नहीं दिया और रोक-टोक के पहले उनके बोले गए शब्दों को लोकसभा के रिकार्ड से हटा दिया गया. स्पीकर का कहना था कि राहुल गांधी पूर्व थल सेना प्रमुख की एक पुस्तक के हवाले से बोल रहे थे, जो सदन के नियमों के प्रतिकूल है. तीसरा रिकार्ड पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नाम रहा. ममता बनर्जी बंगाल SIR पर बहस के लिए वकील के वेश में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गईं.

राहुल पर ममता पड़ीं भारी

रिकार्ड बनाने के क्रम में दिलचस्प बात यह रही कि राहुल गांधी ने सबसे पहले SIR को राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बनाने की पहली की. दिल्ली में इसे लेकर उन्होंने प्रेस कान्फ्रेंस किए तो बिहार मे 15 दिनों तक वे आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और महागठबंधन के घटक दलों के नेताओं के साथ वोटर अधिकार यात्रा निकाली. राहुल का आंदोलन रंग नहीं दिखा पाया. पहले बिहार विधानसभा चुनाव और बाद में महाराष्ट्र के निाय चुनावों में कांग्रेस की हालत पतली हो गई. ममता बनर्जी बंगाल में अकेले SIR की लड़ाई लड़ती रहीं. उन्होंने न सिर्फ बंगाल के लोगों को इसमें सहयोग किया, बल्कि SIR की गड़बड़ियों की ओर उन्होंने लगातार 6 चिट्ठियां लिख कर चुनाव आयोग का ध्यान आकर्षित किया. अपनी बात अनसुनी होते देख वे चुनाव आयोग की पूर्ण बैठक में शिकायतों का पुलिंदा लेकर पहुंचीं. अगले दिन वे वकीलों के लिबास में सुप्रीम कोर्ट में SIR की हियरिंग में शामिल हुईं. SIR को मुद्दा बनाने में राहुल गांधी विफल रहे, लेकिन ममता आगे निकल गई हैं. इसका चुनावी लाभ ममता को कितना मिल पाता है, यह देखने वाली बात होगी.

राहुल की हवा निकल गई

राहुल गांधी के लिए यह तीसरा मौका था, जब उनकी बात हवा में उड़ गई. SIR पर ममता बनर्जी से पहले उन्होंने आवाज उठाई थी. फर्जी वोटरों का मुद्दा भी उन्होंने उठाया. राहुल इस मुद्दे पर अदालत नहीं गए. चुनाव आयोग को लिखित हलफनामा देने से भी भागते रहे. बिहार में महागठबंधन को ताकत देने के लिए राहुल ने वाटर अधिकार यात्रा की. इसका प्रतिकूल परिणाम सबने देखा. राहुल के साथ बढ़-चढ कर इस यात्रा में शामिल रहे तेजस्वी यादव की पार्टी आरजेडी पिछली बार की 75 सीटों के मुकाबले 25 पर सिमट गई और कांग्रेस 19 से खिसक कर 6 पर आ गई. इनमें भी कांग्रेस की 3 विधायकों का शुरू से ही बागी तेवर बना हुआ है. उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें लगती रहती हैं. अब तो यह कहा जा रहा है कि 3 ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के सभी 6 विधायक पाला बदलने वाले हैं. आरजेडी विधायकों के भी टूटने का दावा एनडीए के नेता लगातार कर रहे हैं.

लोकसभा से 8 का निलंबन

लोकसभा में हंगामा विपक्ष की फितरत बन गई है. राहुल गांधी के साथ कांग्रेस के सांसद तो खड़े होते ही हैं, कई बार दूसरे विपक्षी दलों के सांसद भी मोदी और भाजपा विरोध के नाम पर उनका साथ देते हैं. इस बार भी पहले दिन से ही ऐसा ही हो रहा है. प्रधानमंत्री के चेयर तक जाना और स्पीकर पर कागज फेंकने जैसी घटनाओं के बाद कांग्रेस के 7 सदस्यों समेत 8 सांसद पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिए गए. निलंबित सांसदों ने संसद के बाहर धरना दिया, जहां राहुल गांधी उनके उत्साह बढ़ाने के लिए पहुंच गए. इसी बीच कांग्रेस छोड़ भाजपा से सांसद बने पंजाब के एक नेता से राहुल उलझ गए. उन्होंने उन्हें गद्दार कहा तो भाजपा सांसद ने भी पलट कर उन्हें देश का दुश्मन बता दिया. राहुल यहां भी फंस गए. अब भाजपा ने इसे सिख समुदाय का अपमान करार दिया है. सांसदों के निलंबन से कांग्रेस खिसियानी बिल्ली की तरह सदन में अपने तेवर दिखाने से बाज नहीं आ रही है.

ममता बनर्जी भी बीते दिनों दिल्ली में खूब सक्रिय रहीं.

राहुल की संसद में उग्रता

राहुल गांधी उग्र स्वभाव के हैं, यह बात तो लोग पहले से ही जानते हैं. सदन के भीतर उनकी उग्रता जरूर नई बात है. हालांकि संसद के भीतर और बाहर उनकी उग्रता 2014 के बाद से ही अधिक बढ़ी है. यूपीए शासन के अंत और एनडीए शासन के आरंभ से ही राहुल को भाजपा खटकती रही है. नरेंद्र मोदी के प्रति उनकी धारणा कैसी है, यह उनके लिए किए संबोधनों से समझी जा सकती है. पिछली बातें छोड़ भी दें तो 2024 में तीसरी बार नरेंद्र मोदी का पीएम बनना शायद उन्हें गले नहीं उतर रहा. दुनिया के बड़े औद्योगिक घरानों में शुमार लोगों से वे मोदी की मिलीभगत बताते हैं. विदेशों में राहुल के भाषणों में मोदी की सरकार और आरएसस निशाने पर रहते हैं. सदन में वे कभी ऐसे-ऐसे मुद्दों पर बवेला खड़ा करते हैं, जिससे उनकी ही भद पिट जाती है. अब वे चीनी घुसपैठ और अमेरिका से भारत की ट्रेड डील पर सवाल उठा रहे हैं.

लोकबंधु की याद आ गई

राहुल गांधी की संसद में दिखती रही उग्रता से लोकबंधु के रूप में मशहूर समाजवादी नेता राज नारायण की बरबस याद आ गई. कांग्रेस के कार्यकाल में राजनारायण को कई बार उनकी उग्रता के कारण मार्शल आउट किया गया था. राजनारायण की पहचान मुख्यतः 2 कारणों से होती है. अव्वल कि उन्होंने 1977 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी को रायबरेली से हराया था. उनकी एक पहचान यह भी है कि उनकी ही अपील पर इलाहाबाद हाईकोर्ट 1975 में इंदिरा गांधी का चुनाव निरस्त कर दिया था. उसके बाद इंदिरा ने देश में इमरजेंसी लगा दी थी. राजनारायण संसद में अपनी उग्रता के लिए भी मशहूर रहे. राज्यसभा का सदस्य रहते उन्हें 4 बार (1966, 1967, 1971 और 1974 में) निलंबित किया गया था. अभी तक यह रिकार्ड राजनारायण के ही नाम है. विधानसभा का सदस्य रहते भी वे कई बार सदन से निलंबित हुए थे.

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ओमप्रकाश अश्क

प्रभात खबर, हिंदुस्तान और राष्ट्रीय सहारा में संपादक रहे. खांटी भोजपुरी अंचल सीवान के मूल निवासी अश्क जी को बिहार, बंगाल, असम और झारखंड के अखबारों में चार दशक तक हिंदी पत्रकारिता के बाद भी भोजपुरी के मिठास ने ब...और पढ़ें

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February 08, 2026, 09:47 IST

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