Last Updated:January 14, 2026, 09:46 IST
India-America Trade Deal : भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर एक बार फिर बातचीत शुरू हो सकती है. विदेश मंत्री जयशंकर और अमेरिकी विदेश सचिव रूबियो के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत ने दोनों देशों के आगे बढ़ने के लिए एक बार फिर रास्ता खोल दिया है.
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता दोबारा शुरू होने की उम्मीद है. नई दिल्ली. अमेरिका और भारत के रिश्ते इस समय सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले दौर से गुजर रहे हैं. पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी तो इसके ठीक बाद भारत में अमेरिका के नए राजदूत ने दोनों देशों के संबंधों को बेहतर बनाने का वादा कर डाला. इस बयान के ठीक दूसरे दिन यानी 13 जनवरी को भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अगले दौर की बातचीत होनी थी, जिस पर मामला फिलहाल आगे नहीं बढ़ा और एक बार फिर निराशा हाथ लगी. अब एक बार फिर इस डील के आगे बढ़ने की उम्मीदें जगी हैं, क्योंकि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी स्टेट सचिव मार्को रूबियो ने फोन पर बातचीत की जिसमें ट्रेड डील ही प्रमुख मुद्दा रहा.
रुबियो और जयशंकर की बातचीत के बाद आर्थिक गलियारे में एक बार फिर दोनों देश के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर आगे बढ़ने के कयास लगाए जाने शुरू हो गए हैं. दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय कारोबार के अलावा खनिज, न्यूक्लीयर सहयोग, डिफेंस और एनर्जी में सहयोग को लेकर भी बातचीत हुई है. भारत में अमेरिकी राजदूत गोर ने जयशंकर और रूबियो के बीच बातचीत के अंश जारी किए हैं. उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत सकारात्मक रही है. अगले महीने व्यापार को लेकर बातचीत पर आगे बढ़ने अनुमान है और दोनों देशों के बीच बैठक हो सकती है.
दोनों देशों का बड़ा लक्ष्य
ऐसा नहीं है कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील की जरूरत सिर्फ भारत को ही है. दोनों ही देशों ने द्विपक्षीय कारोबार को लेकर बड़ा लक्ष्य बनाया है. भारत और अमेरिका ने साल 2030 तक अपने द्विपक्षीय कारोबार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य बनाया है. व्यापार के अंतर को कम करने के लिए भारत ने अमेरिका से वादा किया है कि वह एनर्जी और रक्षा उपकरणों की खरीद बढ़ाएगा. भारत ने यह वादा तब किया है, जबकि पिछले साल दोनों के बीच हुई व्यापार वार्ता अभी तक बेनतीजा रही है.
रूबियो-जयशंकर में क्या बात हुई
रूबियो और जयशंकर के बीच फोन कॉल के दौरान दोनों देशों के व्यापारिक और आर्थिक सहयोग पर बातचीत हुई. इस दौरान रूबियो ने कहा कि अमेरिका सिविल न्यूक्लियर को लेकर भारत के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है. साथ ही अमेरिकी कंपनियों के लिए ज्यादा अवसर, ऊर्जा सुरक्षा की मजबूती और जरूरी खनिजों की सप्लाई को सुनिश्चित करने पर भी जोर है. दोनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग बढ़ाने और स्थानीय मुद्दों को बातचीत से हल करने पर भी जोर दिया. इस सप्ताह की शुरुआत में ही अमेरिकी राजदूत गोर ने कहा था कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता जल्द ही शुरू हो सकती है. साथ ही उन्होंने भारत को पैक्स सिलिका समूह में शामिल होने का भी न्योता दिया.
दोनों तरफ से मिल रहे पॉजिटिव संकेत
रूबियो और जयशंकर के बीच बातचीत की टाइमिंग से कई संकेत मिलते हैं. यह बातचीत गोर के बयान के ठीक बाद शुरू हुई है और दोनों ने ही कमोबेश एक जैसे ही मुद्दों का जिक्र किया है. इससे पता चलता है कि भारत और अमेरिका देानों ही पक्ष संजीदगी से इस मुद्दे का हल निकालना चाहते हैं और द्विपक्षीय कारोबार को और बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, चौंकाने वाली बात ये है कि यह सारा माहौल अमेरिकी वाणिज्य सचिव के उस बयान के बाद बदलना शुरू हुआ है, जिसमें उन्होंने भारत पर ट्रेड डील को जानबूझकर अटकाने का आरोप लगाया था.
भारत-अमेरिका डील पर फिर बढ़ रहा फोकस
गोर ने भारत में अमेरिकी राजदूत का पद संभालने के बाद अपने पहले बयान में ही यह स्पष्ट संकेत दे दिया था कि वह भारत के साथ अपने रिश्ते बेहतर करने की कोशिश करेंगे. उन्होंने अपने बयान में यह भी संकेत दिया था कि राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी के बीच बेहतर रिश्ते दोनों देशों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं. उन्होंन इस बात की भी उम्मीद जताई थी कि दोनों देशों को धीरे-धीरे ही सही लेकिन स्थायी रूप से तनाव को कम करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए. गोर के इन्हीं बयानों ने जयशंकर और रूबियो की बातचीत की जमीन तैयार की है. वैसे तो दोनों नेताओं के बीच पिछले साल कई बार मुलाकात और बात हुई थी, लेकिन 2026 की शुरुआत में ही इस तरह की बातचीत से पॉजिटिव संकेत मिल रहे हैं.
बातचीत का सीधा रास्ता खोला
पिछले साल भारत और अमेरिका के बीच के रिश्ते काफी तल्ख हो गए थे, लेकिन रूबियो और जयशंकर की हालिया बातचीत ने दोनों के बीच सीधी बातचीत का रास्ता खोल दिया है. हालांकि, अभी ट्रेड डील पर बातचीत आगे नहीं बढ़ी है, लेकिन भारत ने अब रूस से कच्चे तेल की खरीद लगभग बंद कर दी है. ऐसे में उम्मीद जताई जा रही कि अमेरिका जल्द ही 25 फीसदी की पेनाल्टी वाली टैरिफ हटा सकता है. सूत्रों का कहना है कि ऐसा होता है तो अमेरिका की ओर से अन्य टैरिफ भी घटाने की उम्मीदें जगेंगी और व्यापार वार्ता पर भी सकारात्मक रूप से विचार बनेगा. अमेरिका ने अपनी तरफ से इसलिए भी तत्परता दिखाई है, क्योंकि भारत यूरोपीय यूनियन के साथ भी ट्रेड डील पर पॉजिटिव बातचीत कर रहा है. 26 जनवरी को ईयू के नेता भारत के चीफ गेस्ट बनने वाले हैं और इससे पहले अमेरिका इस मुद्दे पर सकारात्मक कदम उठाना चाहता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि...और पढ़ें
Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
January 14, 2026, 09:46 IST

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