Last Updated:January 14, 2026, 09:13 IST
India-Pakistan Tension: ऑपरेशन सिंदूर में बुरी तरह मात खाने के बावजूद पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. वह जम्मू-कश्मीर से लेकर राजस्थान तक भारतीय सीमा में ड्रोन से हरकतें कर रहा है. इसके साथ ही सरक्रीक में सैन्य जमावड़ा बढ़ा रहा है. ऐसे में भारत पूरी तरह सतर्क है. सेना ने पाकिस्तानी सेना के प्रमुख आसिम मुनीर की किसी भी हरकत का मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर ली है.
पाकिस्तान एक बार फिर जम्मू-कश्मीर से लेकर राजस्थान और सरक्रीक तक में अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है.India-Pakistan Tension: ऑपरेशन सिंदूर में बुरी तरह मात खाने के बावजूद पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. जम्मू-कश्मीर से लेकर राजस्थान तक वह बार-बार हरकतें कर रहा है. उधर सरक्रीक में भी वह सैन्य जमावड़ा कर रहा है. वह इन नापाक गतिविधियां भारत की सुरक्षा को चुनौती दे रहा है. इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की कड़ी चेतावनी और आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी के बयानों से साफ है कि भारत किसी भी उकसावे का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है. नए साल में जारी यह स्थिति आसिम मुनीर के नेतृत्व वाली पाकिस्तानी सेना की रणनीति को उजागर करती है. वे आतंकवाद और ड्रोन के जरिए भारत को अस्थिर करने में लगे हैं.
जम्मू-कश्मीर से राजस्थान तक ड्रोन घुसपैठ
नए साल में पाकिस्तान ड्रोन को नया हथियार बनाता दिख रहा है. बीते कुछ दिनों से एलओसी और अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे इलाकों में पाकिस्तानी ड्रोन देखे जा रहे हैं. जम्मू-कश्मीर के सांबा, राजौरी और पूंछ में ड्रोन घुसपैठ को करारा जवाब दिया गया. भारतीय सेना ने फायरिंग कर कई ड्रोन को मार गिराया. उधर राजस्थान के जैसलमेर जिले के रामगढ़ गैस थर्मल पावर प्लांट पर बीते दिनों ड्रोन को मंडराते देखा गया. यह सख्त प्रतिबंध क्षेत्र है. इन गतिविधियों से पाकिस्तान की नीयत पर शक और गहरा गया है. इस बीच आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी एलओसी के करीब छह और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार दो आतंकी कैंप सक्रिय हैं. उन्होंने इसके साथ ही पाकिस्तान को अपने ड्रोन को नियंत्रित करने की चेतावनी दी है. ये ड्रोन हथियार, नशीले पदार्थ या रेकॉन्सेंस के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं. माना जा रहा है कि ये जो सॉफ्ट टारगेट्स जैसे पावर प्लांट को निशाना बना सकते हैं.
सरक्रीक में जमावड़ा बढ़ा रहा पाकिस्तान
जनवरी 2026 तक की स्थिति के अनुसार पाकिस्तान ने भारत के गुजरात और पाकिस्तान के सिंध के बीच विवादित सर क्रीक क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को काफी बढ़ा दिया है. बीते साल ऑपरेशन सिंदूर में बुरी तरह मार खाने के बाद इस क्षेत्र में पाकिस्तान की गतिविधियां और तेज हुई हैं. रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने इस दलदली क्षेत्र को पूरी तरह से एक सैन्य क्षेत्र में बदल दिया है. उसने सिंध रेजिमेंट की क्रीक बटालियनों की संख्या दो से बढ़ाकर छह बटालियन कर दी है. इलाके के सुजावल, घारो और बदिन के बाद अब जाती और केती बंडर में भी नई बटालियनें तैनात की गई हैं. इतना ही नहीं यहां अर्धसैनिक बलों (रेंजर्स) की जगह पाकिस्तानी सेना की नियमित बटालियनें तैनात हैं. यहां तक नौसैनिक तैयारी की बात है तो पाकिस्तान ने बंधा धोरा और हरामी धोरो के बीच 6 नई मरीन सुरक्षा चौकियां बनाई है. उसने भोलारी फॉरवर्ड एयरबेस पर JF-17 और J-10C लड़ाकू विमानों की तैनाती की है. चीन की मदद से इस क्षेत्र में आधुनिक रडार सिस्टम, AWACS और लॉकहीड P-3 ओरियन समुद्री गश्ती विमान भी तैनात किए गए हैं.
सरक्रीक में भारत की तैयारी
सरक्रीक में पाकिस्तानी सेना के जमावड़े के बाद भारत भी सतर्क हो गया है. बीते अक्तूबर में भारत की तीनों सेनाओं ने एक व्यापक ट्राई सर्विस युद्ध अभ्यास किया था. यह अभ्यास सर क्रीक के दलदली इलाकों से लेकर जैसलमेर तक हुआ. इसमें एआई ट्रैकिंग, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया. इसके साथ ही गुजरात तट पर नए कोस्ट गार्ड रडार स्टेशन और मरीन कमांडो की तैनाती बढ़ाई गई है. बीते साल के अंत तक भुज सैन्य बेस पर आधुनिक L-70 एयर डिफेंस गनों की तैनाती बढ़ा दी गई.
क्या है सरक्रीक का मसला
सर क्रीक का मसला भारत और पाकिस्तान के बीच कच्छ के रण के दलदली इलाके में 96 किलोमीटर लंबे मुहाने को लेकर पुराना क्षेत्रीय और समुद्री सीमा विवाद है. यह गुजरात और सिंध को अलग करता है. यह विवाद तत्कालीन कच्छ रियासत के शासक और सिंध सरकार के बीच हुए 1914 के एक प्रस्ताव की अलग-अलग व्याख्याओं से शुरू हुआ. पाकिस्तान का दावा है कि पूरे सर क्रीक पर उसका हक है. वह 1914 के प्रस्ताव के एक मानचित्र का हवाला देता है, जिसमें क्रीक के पूर्वी किनारे यानी भारत की ओर एक ग्रीन लाइन को सीमा दिखाया गया है. जबकि भारत का दावा है कि सीमा क्रीक के बिल्कुल बीच में होनी चाहिए. भारत अंतरराष्ट्रीय ‘थलवेग सिद्धांत’ का पालन करता है, जिसके अनुसार यदि दो राज्यों के बीच कोई जलमार्ग सीमा है, तो सीमा उस जलमार्ग के सबसे गहरे और नौगम्य चैनल के बीच से गुजरनी चाहिए. भारत के पास बतौर प्रमाण 1925 का एक मानचित्र और 1924 में लगाए गए सीमा स्तंभ भी हैं.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें
First Published :
January 14, 2026, 09:13 IST

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