Explainer: किस बैंक में वित्त मंत्रालय का मोटा अकाउंट, कौन उसके कमाऊ पूत, जो पहुंचाते रहते हैं पैसा

1 hour ago

1 फरवरी को देश का बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया. इसके जरिए लाखों करोड़ रुपए की बातें हुईं. बजट में बताया गया कि वर्ष 2026-27 में किस विभाग को कितना पैसा दिया जाएगा. किस योजना के लिए कितना पैसा अलाट किया गया. क्या आपको मालूम है कि वित्त मंत्रालय ही वो जगह है, जहां देश का एक एक पैसा आता है. वहां जमा होता जाता है. फिर ये पैसा बजट के जरिए राज्यों से लेकर विभाग और योजनाओं को दिया जाता है. तो वित्त मंत्रालय अपने पास आने वाले धन को कहां रखता है. किस बैंक में रखता है. कैसे उनकी गिनती करता रहता है.

क्या आपको अंदाज है कि जो अकूत धन वित्त मंत्रालय के पास सालभर आता रहता है, वो कैसे उसके पास आता है. उसके कौन से कमाऊ पूत हैं, जो उसके पास धन की मोटी थैली पहुंचाते ही रहते हैं. फिर इन पैसों को वो सीधे बैंक के स्पेशल खाते में डालता है. बजट वो समय है जिसके बाद वो कमाया हुआ पैसा वापस देश को ही दे देता है.

सवाल – वित्त मंत्रालय आखिर कैसे इतना मोटा धन इकट्ठा करता है, जिसको फिर बजट के लिए बांटता है यानि आवंटित करता है, कौन हैं उसके कमाऊ पूत?

– वित्त मंत्रालय के ये कमाऊ पूत ही भारत सरकार के भी कमाऊ पूत हैं. इन्हें दूसरी भाषा में आप टैक्स बोल सकते हैं. वित्त मंत्रालय के पास आने वाला रेवेन्यू मुख्य रूप से टैक्स और नॉन-टैक्स सोर्स से, सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) और सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) जैसी एजेंसियों से इकट्ठा करके भेजा जाता है.

सवाल – वित्त मंत्रालय का खास बैंक कौन सा है, जहां उसका मोटा अकाउंट खुला हुआ है?

- वित्त मंत्रालय का मुख्य बैंकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानि आरबीआई है. जहां वित्त मंत्रालय के खास अकाउंट – संचित निधि (Consolidated Fund), आकस्मिक निधि (Contingency Fund) और सार्वजनिक खाता (Public Account) आपरेट होते हैं.
RBI अधिनियम 1934 की धारा 20-21 के तहत केंद्र सरकार के सभी वित्तीय लेन-देन संभालता है. सभी टैक्स कलेक्शन, व्यय भुगतान, और सरकारी बॉन्ड जारी करना आरबीआई के जरिए होता है. वित्त मंत्रालय नीतियां बनाता है, लेकिन RBI ही खाते प्रबंधन, ट्रांसफर और सेटलमेंट करता है.

सवाल – तो वित्त मंत्री का मुख्य अकाउंट कौन सा है जिसमें सारा सरकारी पैसा आता है?

- ये मुख्य अकाउंट संचित निधि यानि कंसोलिडेटेड फंड कहलाता है. यहीं पर सरकारी पैसा आता-जाता है. आरबीआई नागपुर का एक सेंट्रलाइज्ड सिस्टम इसकी निगरानी करता रहता है.

सवाल – क्या इसी के जरिए वित्त मंत्रालय अंदाज लगाता है कि बजट के जरिए धन कैसे आवंटित करना है?

- हां, बजट के पहले वित्त मंत्रालय से अन्य मंत्रालयों से सलाह मश्विरा करके उनके खर्चों और योजनाओं के बारे में जानता है और फिर अपने एक्सपर्ट्स के जरिए तय करता है कि किस मंत्रालय, विभाग कितना आवंटन करता है. संचित फंड में इकट्ठा धन से ही मंत्रालयों, विभागों और सरकार से जुड़े कुछ निकायों को पैसा आवंटित करता है, जिससे वेतन, खर्च और योजनागत व्यय पूरा किया जाता है.

सवाल – क्या अपने इस अकाउंट से वित्त मंत्रालय एक भी पैसा निकाल सकता है?

- नहीं, बिल्कुल नहीं निकाल सकता. सभी सरकारी राजस्व -टैक्स, फीस आदि सीधे RBI द्वारा संचालित संचित निधि में जाता है, जो संविधान के अनुच्छेद 266(1) के तहत केंद्र सरकार का मुख्य खाता है. वित्त मंत्रालय इस फंड को मैनेज करता है, लेकिन कोई भी निकासी संसद की मंजूरी के बिना नहीं हो सकती. बजट तैयार करते समय मंत्रालय अन्य मंत्रालयों की डिमांड्स इकट्ठा करता है, राजस्व अनुमान लगाता है, और कैबिनेट से अप्रूवल लेता है. संसद में विनियोग विधेयक पास होने पर ही खर्च की अनुमति मिलती है, वित्त मंत्रालय फंड रिलीज करता है, जो PFMS सिस्टम से ट्रैक होता है.

सवाल – क्या बजट पास होने के बाद संबंधित मंत्रालयों और विभागों को पैसा एकमुश्त दिया जाता है या चरणों में?

- हां, बजट पारित होने के बाद पैसा संबंधित मंत्रालयों को एकमुश्त नहीं, बल्कि चरणबद्ध यानि इंस्टालमेंट में भेजा जाता है. ये फंड मासिक और त्रैमासिक आधार पर किस्त जारी की जाती है. एकमुश्त रिलीज से दुरुपयोग का खतरा होता है; इसलिए कैश मैनेजमेंट पॉलिसी के तहत जस्ट इन टाइम मोड अपनाया जाता है. मंत्रालय अपनी योजनाओं के व्यय प्रमाण-पत्र भेजते हैं, जिसके बाद अगली किस्त मिलती है.

सवाल – अगर वित्तीय वर्ष के अंत में मंत्रालयों के पास भेजा गया फंड बच गया और उसका इस्तेमाल नहीं हुआ तो क्या होता है?

- वित्त वर्ष के अंत यानि 31 मार्च तक बचा हुआ फंड अपने आप लैप्स हो जाता है, इसे फिर वित्त मंत्रालय की जानकारी में लाना होता है.

सवाल – क्या सरकार के सभी विभागों, मंत्रालयों और निकायों को रिजर्व बैंक ही वित्त मंत्रालय के जरिए पैसा रिलीज करता है या कोई विभाग ऐसा भी है, जो अपने पैसा खुद जुटाता और खर्च करता है?

- अधिकांश केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और निकायों को फंड वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के माध्यम से आरबीआई द्वारा ही जारी किया जाता है, लेकिन कुछ स्वायत्त निकाय और PSU अपने फंड खुद जुटाते और खर्च करते हैं. इसमें ONGC, NTPC, SBI जैसे संस्थान शामिल हैं. स्वायत्त संस्थाएं जैसे IITs, IIMs, UGC फंडेड यूनिवर्सिटीज अपनी फीस, ग्रांट्स और एंडॉमेंट से स्व-प्रबंधन करते हैं, लेकिन सरकारी ग्रांट वित्त मंत्रालय से लेते हैं.

सवाल – RBI के कंसोलिडेटेड फंड में हमेशा कितना पैसा रहता है और धीरे धीरे बढ़कर बजट के समय कितना हो चुका होता है

- नहीं, कंसोलिडेटेड फंड में पैसा हमेशा एक निश्चित राशि का नहीं रहता, यह गतिशील होता है. वित्तीय वर्ष भर में राजस्व संग्रह व व्यय के आधार पर उतार-चढ़ाव करता है. वर्ष की शुरुआत यानि अप्रैल में बैलेंस अपेक्षाकृत कम होता है, क्योंकि पिछले वर्ष के बचे फंड लैप्स हो चुके होते हैं. फिर टैक्स कलेक्शन GST मासिक, इनकम टैक्स अग्रिम से धीरे-धीरे बढ़ता है. जनवरी 2026 तक डेटा के अनुसार, करीब ₹48.6 लाख करोड़ मुख्य रूप से अग्रिम टैक्स और GST से आ चुके थे.
बजट के समय यानि फरवरी तक ये फंड चरम पर पहुंचकर ₹55-65 लाख करोड़ तक हो जाता है, क्योंकि FY24-25 का 80%+ संग्रह हो चुका होता है. फिर बजट व्यय शुरू होने पर घटने लगता है.

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