Last Updated:February 02, 2026, 18:31 IST
BJP and Hindutva politics: नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में एक भी मुस्लिम मंत्री नहीं है. मुस्लिम सांसद भी नदारद हैं. यूपी और महाराष्ट्र में ही भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में 1-1 मुस्लिम मंत्री हैं. मुख्तार अब्बास नकवी और शाहनवाज हुसैन जैसे नेता हाशिए पर चले गए हैं. यानी भाजपा ने बहुसंख्यक हिन्दू आबादी की राजनीति की लाइन स्पष्ट कर दी है. दूसरी ओर, कांग्रेस के साथ सभी क्षेत्रीय दल और मुस्लिम हितों की रक्षा के नाम पर बनी कुछ पार्टियां अब भी मुसलमानों के 20 फीसदी से भी कम वोटों के लिए कभी साथ तो कभी अलग-अलग गुत्थमगुत्था हो रहे हैं. भाजपा आज विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनकर देश में राज कर रही है. कांग्रेस एक बार सत्ता से दूर हुई तो वापसी के इंतजार की घड़ियां खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं.

भाजपा ने स्थापना से अब तक अपनी लीक नहीं छोड़ी. जनसंघ से जनता पार्टी का सफर तय करते हुए भाजपा ने जब नया अवतार लिया, तब भी उसकी लाइन वही रही. राष्ट्रीयता और हिन्दुत्व की डगर पर भाजपा चलती रही, जबकि दूसरे राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल हवा का रुख देखकर अपना स्टैंड बदलते रहे. कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टिकरण के दौरान कई बार हद भी पार किया. क्षेत्रीय दलों ने भी मुस्लिम वोट के लिए उनकी खुशामद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. सिर्फ भाजपा ही ऐसी रही, जिसने कभी मुसलमानों को केंद्र कर राजनीति नहीं की. नतीजा सामने है. देश में तीसरी बार लगातार भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनी है.
भाजपा बढ़ती गई, कांग्रेस घटी
कभी लोकसभा में 2 सीटों वाली भाजपा अपने दम पर 2019 में 303 तक पहुंच गई. आज भाजपा की पहचान विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के रूप में हो गई है. देश के 21 राज्यों में भाजपा की सत्ता है. पहले से स्थापित पुरानी पार्टी कांग्रेस को अब इतने से ही संतोष करना पड़ रहा है कि वह दुनिया की सबसे प्राचीन पार्टी है. उसके साथ महात्मा गांधी का नाम जुड़ा है. कांग्रेस ने कभी यह जानने-समझने की कोशिश नहीं की कि अति प्राचीन पार्टी और राष्ट्रव्यापी पहचान के बावजूद उसकी ऐसी दुर्गति क्यों हो गई. कांग्रेस ने अगर ईमानदारी से इसके कारणों की पड़ताल कर ससमय अपने में बदलाव किया होता तो शायद उसे इस हाल में नहीं आना पड़ता.
सेकुलरिज्म का जादू फेल हुआ
2014 के पहले तक कांग्रेस की सत्ता इसलिए कायम रही कि उसने बहुसंख्यक आबादी को सेकुलरिज्म के भ्रम में उलझाए रखा. दरअसल, कांग्रेस ने सेकुलरिज्म की आड़ में मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा दिया. शुरू में तो लिबरल हिन्दुओं ने सेकुलरिज्म के नाम पर कांग्रेस का साथ दिया. पर, असलियत का अहसास होते ही मुंह मोड़ लिया. भाजपा ने इसका भरपूर फायदा उठाया. आहिस्ता-आहिस्ता घटते जा रहे अपने प्रभाव का भी कांग्रेस ने कभी आंकलन करने की जरूरत नहीं समझी. बहुसंख्यक आबादी वाले वोटर उससे दूर होते गए. आज हालत यह है कि कांग्रेस न सिर्फ राज्यों में समाप्तप्राय है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी उसका दबदबा कम हुआ है. पीएम फेस के तौर तीन बार से आजमाए जा रहे कांग्रेस के राहुल गांधी को 2014 और 2019 में नेता प्रतिपक्ष लायक सांसदों की संख्या के लिए लोकसभा में तरस जाना पड़ा. राज्यों से भी कांग्रेस का शासन खत्म होता रहा.
राजीव ने तुष्टिकरण को बढ़ाया
पुरानी बातें छोड़ दें तो राजीव गांधी के जमाने से ही कांग्रेस का क्षरण तेजी से शुरू हो गया था. कांग्रेस के क्षरण-पतन के लिए उनके एक फैसले का उल्लेख ही काफी है. शाह बानो प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने जब गुजारा भत्ता देने का फैसला सुनाया तो मुसलमानों से अधिक चिंतित कांग्रेस हो गई. राजीव गांधी ने बहैसियत पीएम इस मामले में दखल दी और संसद से कानून बना कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी कर दिया. उन्हें यही लगा कि इससे कांग्रेस की मुस्लिम वोटों की दावेदारी और पुख्ता होगी. वे भूल गए कि मुसलमानों में उदार छवि के लोग भी कम नहीं. भाजपा में रहते हुए संप्रति बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने राजीव गांधी के इसी एक फैसले के कारण कांग्रेस छोड़ दी थी. हिन्दू वोटरों का कांग्रेस से मोह भंग होने का यह शुरुआती कारण था.
राहुल गांधी ने तो हद ही कर दी
राजीव गांधी के निधन के बाद कांग्रेस की कमान सोनिया-राहुल के हाथ आई. तब से कांग्रेस की हालत और खराब हुई है. हिन्दुओं में सवर्ण जातियां कांग्रेस को वोट करती थीं. दलित-पिछड़े भी कांग्रेस के हिमायती होते थे. मुस्लिम वोट कांग्रेस, कम्युनिस्ट और समाजवादी पार्टियों में बंटते रहे. पर, कांग्रेस ने जैसे ही मुस्लिम तुष्टिकरण की लाइन पकड़ी, सवर्ण मतदाताओं ने सबसे पहले उसका साथ छोड़ा. भाजपा की हिन्दुत्व लहर के कारण दलित-पिछड़े भी कांग्रेस से कटते गए. कांग्रेस अब भी मुसलमानों के मन की बात करती है. जम्मू-कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति हो, पाकिस्तान की आतंकवादी गतिविधियों पर भारत का एक्शन हो या फिर एनआरसी और सीएए की बात; कांग्रेस मुखरता से उसके खिलाफ खड़ी हो जाती है. मुस्लिम इससे खुश होते हैं. पर, सच यह है कि कांग्रेस से अब मुसलमानों ने भी मुंह मोड़ना शुरू कर दिया है. शायद इसलिए कि कांग्रेस के न चाहते हुए भी भाजपा वही कर रही है, जो वे नहीं चाहते. मुस्लिम हितों की बात करने वाली ओवैसी की AIMIM बिहार विधानसभा चुनाव में दूसरी बार 5 सीटें जीतने में कामयाब हुई. महाराष्ट्र के हालिया निकाय चुनावों में भी AIMIM ने कांग्रेस को करारी टक्कर दी. इससे कांग्रेस की आंखें खुल जानी चाहिए. पर, ऐसा हो पाएगा, इसमें संदेह है.
भाजपा की लाइन-सिर्फ हिन्दुत्व
भाजपा की हिन्दुत्व की स्पष्ट लाइन देखिए. पार्टी में अल्पसंख्यक मोर्चा के अलावा संगठन में कहीं मुस्लिम नहीं दिखते. भाजपा में मुस्लिम सांसद-विधायक भी नदारद हैं. जो कुछ मुसलमान नेता भाजपा में बचे भी हैं तो वे हाशिए पर हैं. उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में एक मुस्लिम दानिश आजाद अंसारी हैं भी तो वे असेंबली चुनाव जीत कर नहीं आए, बल्कि विधान परिषद के रास्ते उन्हें मंत्रिमंडल में एंट्री मिली है. महाराष्ट्र में भी एक मुस्लिम मंत्री हसन मुश्रिफ हैं. मुख्तार अब्बास नकवी हों या शाहनवाज हुसैन, दोनों में कोई अब सांसद-विधायक नहीं है. अलबत्ता इक्का-दुक्का मुस्लिम लीडर भाजपा में प्रवक्ता जरूर हैं.
भाजपा को सनातन का सहारा
सनातन, हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद के त्रिकोण के सहारे भाजपा बहुसंख्यकों की पसंद बनती जा रही है. भाजपा 80 प्रतिशत से अधिक हिन्दू आबादी को अपनी ओर आकर्षित कर रही है, जबकि कांग्रेस या दूसरे दलों को 20 प्रतिशत से भी कम मुसलमानों की राजनीति पसंद है. इस 20 प्रतिशत के लिए भी कांग्रेस के अलावा राष्ट्रीय जनता दल, समाजवादी पार्टी, एनसीपी और तृणमूल कांग्रेस जैसी क्षेत्रीय पार्टियां धमाल मचाए हुई हैं. बंगाल में मुस्लिम राजनीति करने उतरे टीएमसी से निष्कासित हुमायू कबीर, हैदराबाद से पहुंचे ओवैसी और आईएसएफ भी मुस्लिम वोटों पर आश्रित हैं. ऐसे में यह अनुमान लगाना कठिन नहीं कि भाजपा विरोधी दलों की डगर कितनी मुश्किल है.
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प्रभात खबर, हिंदुस्तान और राष्ट्रीय सहारा में संपादक रहे. खांटी भोजपुरी अंचल सीवान के मूल निवासी अश्क जी को बिहार, बंगाल, असम और झारखंड के अखबारों में चार दशक तक हिंदी पत्रकारिता के बाद भी भोजपुरी के मिठास ने ब...और पढ़ें
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First Published :
February 02, 2026, 18:31 IST

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