Air India AI171 Plane Crash: पहले से ही थीं प्‍लेन में दिक्‍कतें, पायलट को दी क्लीन चिट; अमेरिकी जांच एजेंसी ने खोली बोईंग की पोल

2 hours ago

Last Updated:January 22, 2026, 10:12 IST

Air India AI171 Plane Crash Investigation: अहमदाबाद में हुए प्‍लेन क्रैश मामले में अमेरिका के एफएएस ने कैप्‍टन सुमित सभरवाल को क्‍लीन‍ चिट दी है. साथ ही, हादसे का शिकार हुए प्‍लेन को गंभीर सवाल खड़े किए हैं. एफएएस का दावा है कि सर्विस में आने के साथ ही इस प्‍लेन में तकनीकी खामियां आना शुरू हो गईं थीं.

 प्‍लेन में थीं दिक्‍कतें, पायलट को क्लीन चिट; खुली बोईंग की पोलअमेरिकी सीनेट में पेश रिपोर्ट में कैप्‍टन सुमित सभरवाल को क्‍लीन चिट दी गई है. (फाइल फोटो)

Air India AI171 Plane Crash Investigation: अहमदाबाद में 12 जून 2025 को हुए एयर इंडिया के बोइंग 787 प्‍लेन हादसे को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है. अमेरिका में पेश एक व्हिसल ब्लोअर रिपोर्ट ने उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि प्‍लेन के पायलट कैप्टन सुमीत सभरवाल ने फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद कर दिए थे और इसी वजह से हादसा हुआ. यह रिपोर्ट अमेरिका की फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी (एफएएस) नाम की ऑर्गेनाइजेशन ने अमेरिकी सीनेट की स्थायी जांच उपसमिति के सामने पेश की है.

एफएएस का कहना है कि शुरुआती जांच रिपोर्टों में जिस तरह से पायलट की गलती की ओर इशारा करते हुए कहा गया है कि इससे पहले हुए बोइंग 737 मैक्स हादसों में भी पायलटों को दोषी ठहराने की कोशिश की गई थी. एफएएस का दावा है कि AI 171 प्‍लेन क्रैश मामले में भी असल वजहों से ध्यान हटाया जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे का शिकार हुआ प्‍लेन अपनी सर्विस के पहले दिन से ही तकनीकी समस्याओं से जूझ रहा था. मौजूद दस्तावेज बताते हैं कि 1 फरवरी 2014 को भारत पहुंचने के दिन से ही इस प्‍लेन में सिस्टम फेल्योर की शिकायतें आने लगी थीं.

11 साल की सर्विस में बार-बार आईं ये दिक्कतें

एफएएस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बोइंग 787 कार्यक्रम में इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, क्वालिटी और मेंटेनेंस से जुड़ी कई खामियां आती रहीं. इनमें इलेक्ट्रॉनिक और सॉफ्टवेयर खराबियां, बार-बार सर्किट ब्रेकर ट्रिप होना, वायरिंग डैमेज, शॉर्ट सर्किट, बिजली आपूर्ति का बंद होना और पावर सिस्टम के हिस्सों का ओवरहीट होना शामिल है. एफएएस का कहना है कि ये समस्याएं किसी एक प्‍लेन तक सीमित नहीं हैं.

एफएएस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह प्‍लेन 2011 के अंत में फैक्ट्री से बाहर आया था, दिसंबर 2013 में पहली उड़ान भरी, 28 जनवरी 2014 को एयर इंडिया को सौंपा गया और 8 फरवरी 2014 को इसकी पहली कमर्शियल फ्लाइट हुई थी. इसके बाद 11 साल की सर्विस के दौरान इसमें बार-बार तकनीकी खराबियां दर्ज की गईं. रिपोर्ट में धुएं और बदबू, इलेक्ट्रिकल सर्ज और पावर सिस्टम के ज्यादा गर्म होने जैसी घटनाओं का भी जिक्र है.

एफएएस ने बोइंग 18 फीसदी फ्लीट का किया है एनालिसिस

रिपोर्ट में बताया गया है कि जनवरी 2022 में प्‍लेन के P100 प्राइमरी पावर पैनल में आग लगी थी. इससे L2 बस टाई ब्रेकर और आसपास की वायरिंग को भारी नुकसान पहुंचा और पूरा पैनल बदलना पड़ा. इसके अलावा अप्रैल 2022 में लैंडिंग गियर इंडिकेशन सिस्टम में खराबी के चलते प्‍लेन को ग्राउंड किया गया और कई अहम पार्ट बदले गए थे. ऐसी ही इलेक्ट्रिकल समस्याएं एयर इंडिया के अन्य 787 विमानों के साथ-साथ अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में रजिस्टर्ड 787 प्‍लेन्‍स में भी देखी गई हैं.

ऑर्गेनाइजेशन का दावा है कि उन्‍होंने बोइंग 787 से जुड़े 2,000 से ज्यादा सिस्टम फेल्योर रिपोर्ट्स का एनालिसिस किया है, जो ग्‍लोबल फ्लीट का करीब 18 प्रतिशत हिस्सा है. वहीं इन आरोपों पर बोइंग के प्रवक्ता ने कहना है कि वह संयुक्त राष्ट्र के इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गेनाइजेनश (ICAO) के नियमों के तहत भारत के एयरक्राफ्ट एक्‍सीडेंअ इंवेस्टिगेशन ब्‍यूरो (AAIB) की जांच पर ही भरोसा करेगा.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to ...और पढ़ें

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Ahmedabad,Ahmedabad,Gujarat

First Published :

January 22, 2026, 10:12 IST

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