Last Updated:January 24, 2026, 06:20 IST
राजधानी दिल्ली के सबसे पुराने रेलवे स्टेशन पुरानी दिल्ली और नई दिल्ली हैं. हालांकि इनमें नई दिल्ली का निर्माण बाद में हुआ है, जब संसद भवन का निर्माण हो चुका था. लेकिन पुरानी दिल्ली उससे भी पुराना है. आज दोनों स्टेशनों में मिलाकर करीब आठ लाख यात्री रोजाना सफर करते हैं. लेकिन कभी यह स्टेशन वीरान होते थे, शाम होते ही अंधेरा छा जाता है. इन दोनों स्टेशनों की ब्लैक एंड व्हाइट फोटो आपको चौंका देंगी.

आज नई दिल्ली स्टेशन से रोजाना 400 से अधिक ट्रेनें चलती हैं और पांच लाख यात्री सफर करते हैं. इसका निर्माण 1956 में शुरू हुआ था. यह ब्रिटिश काल में ईस्ट इंडियन रेलवे कंपनी द्वारा बनवाया गया था, जब नई दिल्ली शहर की स्थापना हो रही थी.

नई दिल्ली स्टेशन 1956 में बनकर आधिकारिक उद्घाटन हुआ. 1955 में नई बिल्डिंग का निर्माण शुरू हुआ और 16 अप्रैल 1956 को इसे जनता के लिए खोला गया. तब से यह दिल्ली का प्रमुख रेलवे हब बन गया.

पुरानी दिल्ली स्टेशन का निर्माण 1864 में हुआ था. जिसे दिल्ली जंक्शन कहा जाता है. यह दिल्ली का सबसे पुराना और व्यस्त रेलवे स्टेशन है, जो ब्रिटिश काल में ईस्ट इंडियन रेलवे कंपनी द्वारा बनवाया गया था. 1864 छोटे से स्टेशन के रूप में बना था, जिसे कलकत्ता (कोलकाता) से आने वाली ब्रॉड गेज ट्रेनों के लिए उत्तरी टर्मिनस के रूप में विकसित किया गया. पहली ट्रेन 1 अगस्त 1864 को कोलकाता से आई थी.
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<br />आज जो पुरानी दिल्ली स्टेशन की भव्य इमारत देख रहे हैं, वो 1900 से 1903 बनी है. 1903 में आम जनता के लिए इसे खोला गया था. यह इमारत लाल बलुआ पत्थर से बनी है, जिसमें लाल किले की शैली में बनाया गया है इसमें मेहराबें, मीनारें और किले जैसी दिखावट दूर से दिखती हैं.

आज यहां पर 16 प्लेटफार्म हैं, पर शुरू में यहां पर केवल एक प्लेटफार्म था. 1926 स्टेशन की शुरुआत एक प्लेटफॉर्म और सिंगल-स्टोरी बिल्डिंग से हुई. यहीं से ट्रेनें आती और जाती थीं. यहां पर ट्रेनों की संख्या कम थी, इसलिए शाम होते ही यहां पर अंधेरा हो जाता था. जिस तरह गांव के रेलवे स्टेशनों पर होता है.

<br />एक ट्रैक मौजूदा नई दिल्ली स्टेशन, कनाट प्लेस होते हुए संसद भवन के सामने तक बनाया गया. इसी ट्रैक पर पत्थर ढोने की ट्रेन शुरू की गयी, जो संसद भवन के सामने तक जाती थी, वहां से वापस लौट आती थी. इस तरह पत्थरों सप्लाई तेजी से शुरू हुई और छह वर्ष में यह तैयार हो गया. यह कौडि़या पुल है.

पहले स्टेशनों पर इस तरह भारी भारी कंटेनर उतारे जाते थे. आज तरह तरह की मशीनें आ गयी है,लेकिन पहले काफी काम मैन्युअल होता था.

<br />आज भारतीय रेलवे में इलेक्ट्रिनिक सिग्नल लगे हुए हैं, पर किसी समय में ऐसे सिग्नल होते हैं.कई बार इनको रेलवे कर्मी स्वयं चलाते थे
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1 hour ago
