78 साल तक थी अनपढ़, अंगूठा छाप बुलाते थे लोग, बुढ़ापे में बन गई ग्रेजुएट!

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Last Updated:March 03, 2026, 09:01 IST

अगर मन में लगन हो तो कोई भी काम असंभव नहीं है. यहां लोग मेहनत ना करने के लिए बहाने ढूंढते हैं. वहीं साउथ कोरिया में रहने वाली एक महिला ने 78 साल की उम्र में पढ़ाई शुरू की और 85 की उम्र में ग्रेजुएशन की डिग्री पा ली. ये महिला मिसाल बन गई है.

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आगे की पढ़ाई के लिए भी तैयार है ये बुजुर्ग स्टूडेंट (इमेज- फाइल फोटो)

दक्षिण कोरिया में एक ऐसी कहानी सामने आई है जो हर किसी को प्रेरित कर रही है. 85 साल की किम जोंग-जा (Kim Jeong-ja) ने हाल ही में सूकम्युंग वुमेंस यूनिवर्सिटी (Sookmyung Women’s University) से सोशल वेलफेयर में एसोसिएट डिग्री हासिल की है.

वो इस साल कोरिया की सबसे उम्रदराज कॉलेज ग्रेजुएट बनी हैं. लेकिन सबसे कमाल की बात ये है कि उन्होंने पढ़ाई की शुरुआत 78 साल की उम्र में की थी, जब वो पूरी तरह अनपढ़ थीं. युद्ध के बाद की गरीबी और पारिवारिक जिम्मेदारियों ने उन्हें स्कूल नहीं जाने दिया, लेकिन बुढ़ापे में उन्होंने फैसला किया कि अब जीवन में कुछ नया सीखेंगी. इसके बाद उन्होंने पढ़ाई करने का फैसला किया.

लाखों की बनी प्रेरणा
किम जोंग-जा ने बताया कि 78 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार पेंसिल उठाई और हंगुल (कोरियाई लिपि) सीखना शुरू किया. शुरुआत में शर्मिंदगी महसूस होती थी, लेकिन लगन और सपोर्ट से वो आगे बढ़ीं. कुछ महीनों में ही उन्होंने बेसिक लिटरेसी सीख ली. फिर एडल्ट एजुकेशन प्रोग्राम के जरिए मिडिल स्कूल और हाई स्कूल इक्विवेलेंसी पास की. 2024 में वो कोरिया की सबसे उम्रदराज स्टूडेंट बनीं, जिन्होंने कॉलेज एंट्रेंस एग्जाम (CSAT) दिया था. उसके बाद सूकम्युंग यूनिवर्सिटी के फ्यूचर एजुकेशन इंस्टीट्यूट में एडमिशन लिया, जहां उन्होंने सोशल वेलफेयर का कोर्स पूरा किया. ग्रेजुएशन सेरेमनी में नेवी कैप और ब्राउन परम्ड हेयर के साथ वो स्टेज पर पहुंचीं. धीरे-धीरे चलते हुए डिग्री ली और ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा. उनकी पोती अमेरिका से स्पेशल फ्लाइट लेकर आई और दादी को किस किया.

डिग्री पर गर्व
किम ने कहा, “ये सब स्कूल की पढ़ाई और सपोर्ट की वजह से हुआ. मैं कंप्यूटर नहीं यूज कर पाती थी इसलिए असाइनमेंट्स हाथ से लिखने में पूरा दिन लग जाता था, लेकिन प्रोफेसर्स ने एक्स्ट्रा टाइम देकर मदद की.” उन्होंने थैंक्यू बोला और कहा कि उम्र के कारण कुछ भूल भी जाती हैं, लेकिन कोशिश जारी रखेंगी. ये कहानी सिर्फ डिग्री की नहीं, बल्कि जीवन की लगन की है. किम की पोती ने बताया कि दादी हमेशा कहती थीं कि शिक्षा से जीवन खिल उठता है. युद्ध के समय गरीबी में अनपढ़ रह गईं, लेकिन अब डिग्री लेकर खुश हैं. अब वो बाल कल्याण (Child Welfare) में आगे पढ़ाई करना चाहती हैं, क्योंकि सोशल वेलफेयर में उनका इंटरेस्ट है. दुनिया भर में ऐसी कहानियां कम हैं, लेकिन ये दिखाती हैं कि उम्र कोई बाधा नहीं है.

First Published :

March 03, 2026, 09:01 IST

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