Last Updated:March 03, 2026, 06:45 IST
5th Generation Fighter Jet: देश और दुनिया के सामरिक हालात लगातार बदल रहे हैं. भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिये दक्षिण एशिया समेत पूरी दुनिया को अपने इरादे स्पष्ट तौर पर बता दिए हैं. वहीं, अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर दोबारा हमला कर दिया है. इससे ग्लोबल लेवल पर सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई है. इन सबके बीच भारत 5th जेनरेशन का फाइटर जेट अपने स्क्वाड्रन में जोड़ना चाहता है, ताकि वॉरटाइम में स्टील्थ फायर-पावर मिल सके.

5th Generation Fighter Jet: 21वीं सदी में युद्ध का स्वरूप पूरी तरह से बदल चुका है. अब एक तरफ अल्ट्रा मॉडर्न रडार सिस्टम (एयर डिफेंस सिस्टम) डेवलप किए जा रहे हैं तो दूसरी तरफ इन तमाम प्रणालियों को धता बताने वाली टेक्नोलॉजी के विकास पर तेजी से काम चल रहा है. दुनिया के कुछ गिनेचुने देशों के पास ही वायु सुरक्षा प्रणाली के चक्रव्यूह को भेदने वाले फाइटर जेट हैं. इनमें अमेरिका और रूस टॉप पर हैं. चीन ने भी स्टील्थ फाइटर जेट डेवलप कर लिया है, जो रडार को चकमा देने में सक्षम बताए जाते हैं. भारत के पास अभी तक यह टेक्नोलॉजी नहीं है. इंडियन एयरफोर्स के पास 4 और 4.5 पीढ़ी के फाइटर जेट हैं. 5th जेनरेशन के लड़ाकू विमान अभी IAF की फ्लीट में नहीं है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद तेजी से बदलते सामरिक और सुरक्षा माहौल में स्टील्थ फाइटर जेट की काफी जरूरत महसूस होने लगी है. रिपोर्ट्स की मानें तो पाकिस्तान अपने मित्र चीन से पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान हासिल करने में जुटा है. इससे भारत की चिंताएं बढ़नी स्वाभाविक हैं, क्योंकि एक तरफ पाकिस्तान तो दूसरी तरफ चीन से सैकड़ों किलोमीटर की सीमाएं लगती हैं. टेंशन वाली बात यह है कि इन दोनों देशों के साथ बॉर्डर पर अक्सर ही झड़पें होती रहती हैं. चीन लेह-लद्दाख, तिब्बत से लेकर अरुणाचल प्रदेश के लगते इलाकों तक में मिलिट्री डिप्लॉयमेंट लगातार बढ़ा रहा है. इससे भारत का पूरा अमला अलर्ट मोड पर है. हालात को देखते हुए गैप को भरने के लिए एयरफोर्स 5th जेनरेशन जेट खरीदने की कोशिश में जुटा है. वायुसेना के पास दो विकल्प हैं – अमेरिकी F-35 और रूसी Su-57. दिक्कत वाली बात यह है कि इन दोनों फाइटर जेट की खरीद में अपनी तरह की अड़चनें सामने आ रही हैं. हालांकि, भारत ने देसी टेक्नोलॉजी की मदद से पांचवीं पीढ़ी का स्वदेशी विमान डेवलप करने के लिए AMCA प्रोजेक्ट लॉन्च किया है, लेकिन फाइटर जेट प्रोडक्शन के लिए अभी सालों का इंतजार करना पड़ेगा. ऐसे में फौरी तौर पर 5th जेन जेट के कुछ स्क्वाड्रन खरीदने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है.
पहले बात करते हैं रूस के 5th जेन फाइटर जेट Su-57 की. रूस भारत का दशकों पुराना टेस्टेड पार्टनर है, जिसने कई बुरे वक्त में खुलकर साथ दिया है. मॉस्को के साथ अभी तक अनेकों सिक्योरिटी डील हो चुकी हैं और अभी वह जारी है. रिपोर्ट्स की मानें तो यही वजह है कि रूस ने भारत को टेक्नोलॉजिकल ट्रांसफर के साथ पांचवीं पीढ़ का Su-57 जेट मुहैया कराने का ऑफर दिया है. अब सवाल उठता है कि यदि ऐसा है तो फिर भारत रूस के साथ Su-57 को लेकर डील क्यों नहीं कर रहा है? अब इसकी वजह सामने आई है. रूस के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Sukhoi Su-57 की खरीद को लेकर अटकलों के बीच रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने स्पष्ट किया है कि भारत सरकार ने अभी तक इस विमान की खरीद पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है. रक्षा सचिव ने साफ शब्दों में कहा कि Su-57 को लेकर कई मुद्दे ऐसे हैं, जिनकी वजह से सरकार अब तक कोई ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है. उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि भारतीय वायुसेना की भविष्य की जरूरतों को देखते हुए विकल्पों का मूल्यांकन अभी जारी है और प्रक्रिया जटिल बनी हुई है. Su-57 की टेक्नोलॉजी में कुछ खामियां होने की बात सामने आ चुकी हैं.
रूस या अमेरिका…किसका फाइटर जेट कितना ताकतवर
| Su-57 फाइटर जेट | F-35 फाइटर जेट |
| स्टील्थ (Stealth) क्षमता: Su-57 को रडार से बचने के लिए विशेष तौर पर डिजाइन किया गया है. इसका एयरफ्रेम, कम्पोजिट मैटेरियल और अंदरूनी वेपन-बे (internal weapons bay) इसे कम रडार सिग्नेचर देता है. इससे यह दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर गहराई तक हमला कर सकता है. | स्टील्थ यानी रडार से बचने की क्षमता: F-35 Lightning II की सबसे बड़ी ताकत इसकी लो-ऑब्ज़र्वेबल स्टेल्थ डिज़ाइन है. इसकी बनावट और विशेष कोटिंग इसे दुश्मन के रडार पर पकड़ में आने से काफी हद तक बचाती है. यह दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम के अंदर घुसकर भी मिशन पूरा करने में सक्षम है. |
| सुपरक्रूज और सुपरमैन्युवरबिलिटी: यह विमान आफ्टरबर्नर के बिना भी सुपरसोनिक स्पीड (Supercruise) पर उड़ान भर सकता है. 3D थ्रस्ट वेक्टरिंग इंजन इसे बेहद फुर्तीला बनाते हैं, जिससे यह हवा में जटिल करतब (high agility maneuvers) कर सकता है. | एडवांस सेंसर फ्यूजन टेक्नोलॉजी: F-35 में लगे रडार, इन्फ्रारेड सेंसर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से मिलने वाली जानकारी एक ही स्क्रीन पर मिलती है. इस सेंसर फ्यूजन के कारण पायलट को युद्धक्षेत्र की पूरी तस्वीर रियल-टाइम में मिलती है, जिससे निर्णय लेना तेज और सटीक हो जाता है. |
| एडवांस्ड एवियोनिक्स और रडार सिस्टम: Su-57 में AESA (Active Electronically Scanned Array) रडार और मल्टी-सेंसर फ्यूजन तकनीक है. यह एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक और एंगेज कर सकता है. पायलट को 360 डिग्री सिचुएशनल अवेयरनेस मिलती है. | मल्टी-रोल क्षमता: यह फाइटर जेट हवा से हवा (Air-to-Air), हवा से जमीन (Air-to-Ground) और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तीनों तरह के मिशन कर सकता है. एक ही प्लेटफॉर्म से कई प्रकार के ऑपरेशन करने की क्षमता इसे बेहद बहुउद्देश्यीय बनाती है. |
| मल्टी-रोल क्षमता: यह एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड दोनों तरह के मिशन कर सकता है. लंबी दूरी की मिसाइलों, प्रिसिशन गाइडेड बम और हाइपरसोनिक हथियारों से लैस होने की क्षमता इसे बहुउद्देशीय फाइटर बनाती है. | अल्ट्रा मॉडर्न हेलमेट सिस्टम: F-35 का हेलमेट-माउंटेड डिस्प्ले सिस्टम पायलट को 360 डिग्री विज़न देता है. पायलट विमान के नीचे या पीछे की गतिविधि भी देख सकता है, मानो विमान पारदर्शी हो. यह डॉगफाइट और ग्राउंड अटैक दोनों में बड़ा फायदा देता है. |
| लंबी रेंज और पेलोड क्षमता: Su-57 की ऑपरेशनल रेंज लंबी है और यह भारी पेलोड ले जा सकता है. इससे यह लंबी दूरी के स्ट्राइक मिशन और एयर सुपीरियोरिटी ऑपरेशन में प्रभावी भूमिका निभा सकता है. | नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर क्षमता: F-35 अन्य लड़ाकू विमानों, ड्रोन और जमीनी सिस्टम के साथ डेटा शेयर कर सकता है. यह फ्लाइंग डेटा हब की तरह काम करता है, जिससे पूरे बेड़े की सामरिक क्षमता कई गुना बढ़ जाती है. |
किन मुद्दों पर अटकी है बात?
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के अनुसार, Su-57 पर अंतिम निर्णय न लेने के पीछे कई कारक हैं. हालांकि, उन्होंने विस्तृत तकनीकी विवरण सार्वजनिक नहीं किए, लेकिन रक्षा खरीद से जुड़े जानकारों का मानना है कि इसमें कई मुद्दे अहम हो सकते हैं. मसलन लाइफ-साइकिल लागत का मसला. केवल विमान की खरीद कीमत ही नहीं, बल्कि उसके रखरखाव, अपग्रेड और ऑपरेशनल लागत भी महत्वपूर्ण होती है. भारत की नीति अब अधिकतम तकनीक हस्तांतरण और स्वदेशी निर्माण पर केंद्रित है. इसके अलावा एक अहम पहलू यह भी है कि क्या विमान का निर्माण या असेंबली भारत में संभव हो सकेगी? स्पेयर पार्ट्स, इंजन सपोर्ट और लॉन्ग टर्म लॉजिस्टिक सपोर्ट की उपलब्धता भी अहम मुद्दा है. इसके अलावा कुछ राजनीति वजहें भी हो सकती हैं. रूस से रक्षा सौदे का अंतरराष्ट्रीय संबंधों, विशेषकर पश्चिमी देशों के साथ भारत के समीकरणों पर क्या असर पड़ेगा, इसके बारे में विचार-विमर्श भी जरूरी हो जाता है.
पाकिस्तान ने चीन से पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट हासिल करने की कोशिश में जुटा है. इस रिपोर्ट ने भारत की चिंताओं को और बढ़ा दिया है. F-35 को मॉडर्न फिफ्थ जेन जेट माना जाता है. (फाइल फोटो/Reuters)
F-35 पर क्यों नहीं बन रही बात?
अब सवाल उठता है कि यदि रूस के पांचवीं पीढ़ी के विमान में खामियां हैं तो फिर भारत अमेरिका से ही डील पक्की क्यों नहीं कर रहा है? अब इसकी वजहें भी सामने आने लगी हैं. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर सशंकित है. वॉशिंगटन के लगता है कि यदि भारत को पांचवीं पीढ़ी का F-35 फाइटर जेट मुहैया कराया जाता है तो उसकी स्टील्थ टेक्नोलॉजी कॉम्प्रोमाइज हो सकती है. यदि ऐसा होता है तो फिर एस-400 जैसे एयर डिफेंस सिस्टम से F-35 फाइटर जेट बच नहीं सकेगा और इसकी स्टील्थ होने की क्षमता खत्म हो सकती है. वहीं, भारत भी इस दिशा में सावधानी से कदम उठा रहा है.
भारत सतर्क क्यों?
भारत पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान क्षेत्र में अपने अगले कदम को लेकर सावधानीपूर्वक रणनीति तय करता दिखाई दे रहा है. नई दिल्ली अंतिम निर्णय लेने से पहले इस बात का इंतज़ार कर सकती है कि क्या अमेरिका की ओर से F-35 के लिए कोई औपचारिक प्रस्ताव सामने आता है. सूत्रों के अनुसार, यदि F-35 को गंभीरता से पेश किया जाता है, तो भारत की रुचि काफी हद तक उन सोवरेन कस्टमाइजेशन राइट्स पर निर्भर करेगी जैसे अधिकार इजराइल को उसके F-35I मॉडल के तहत हासिल हैं. मूल सवाल केवल यह नहीं है कि भारत F-35 खरीदेगा या नहीं, बल्कि यह है कि किन शर्तों पर ऐसी खरीद भारत के लिए रणनीतिक रूप से स्वीकार्य होगी. भारत की दीर्घकालिक वायु शक्ति योजना स्वदेशी एएमसीए (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम पर आधारित है. हालांकि, क्षेत्रीय संतुलन में तेजी से हो रहे बदलाव और स्टील्थ प्लेटफॉर्म्स के प्रतिरोधक क्षमता (डेटरेंस) में केंद्रीय भूमिका निभाने के कारण एक अंतरिम व्यवस्था या फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में सीमित संख्या में विदेशी 5th जेन फाइटर जेट की खरीद की संभावना पर भी विचार-विमर्श जारी है.
About the Author
बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें
Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
March 03, 2026, 06:42 IST

2 hours ago
